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बीएसपी इंटर डिपार्टमेंट म्यूजिक कांपीटिशन: छत्तीसगढ़ी गीतों में मराठी और बंगाली भाषा का तड़का

छत्तीसगढ़ी ने मराठी गीत गाया तो मराठी ने बंगाली गीतों का तड़का लगाया। कलामंदिर में गुरुवार को गैर हिन्दीभाषी गीतों की स्पर्धा में जैसे पूरे हिन्दुस्तान का संगीत उतर आया हो।

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Satya Narayan Shukla

Jun 22, 2017

SAIL BSP, Bhilai steel plant, BSP Inter Department

SAIL BSP, Bhilai steel plant, BSP Inter Department Music Competition, Music program, BSP employees

भिलाई.
संगीत की कोई भाषा नहीं होती वह तो सुरों के हिसाब से ढल जाता है। कुछ ऐसा ही छत्तीसगढ़ी, बांग्ला, तेलुगु, मराठी,गुजराती, पंजाबी,भोजपुरी जैसी कई भाषाओं के गीत और उन्हें गाने वालों की भाषा अलग। छत्तीसगढ़ी ने मराठी गीत गाया तो मराठी ने बंगाली और बंगाली प्रतिभागी ने छत्तीसगढ़ी गीतों का तड़का लगाया। कलामंदिर में गुरुवार को गैर हिन्दीभाषी गीतों की स्पर्धा में जैसे पूरे हिन्दुस्तान का संगीत उतर आया हो।


म्यूजिक को लोगोंं ने खूब एंजाय किया

जितने मस्त मगन गाने वाले उतने ही बजाने वालों ने इन गीतों पर एंजाय किया। महिला एवं पुरुष वर्ग की प्रतियोगिता में 78 गायकों ने हिस्सा लिया। यह प्रतियोगिता काफी रोचक रही, क्योंकि सभी भाषा में गीत गाए जाने की वजह से कुछ गीत तो दर्शकों को समझ आए पर जो नहीं आए उसके म्यूजिक को लोगोंं ने खूब एंजाय किया। इस स्पर्धा का सेमीफाइनल शाम को हुआ और इनमें से 10-10 प्रतिभागी फाइनल के लिए चुने गए।


बैंजो और शहनाई भी पहुंची

लोकगीतों की प्रतियोगिता होने की वजह से संगतकारों के वाद्ययंत्रों में भी बदलाव किया गया। हारमोनियम, ढोलक तबला और बांसूरी के साथ-साथ बेंजो और शहनाई भी शामिल हुई। संगतकार भी लोकसंगीत की समझ वाले थे। बस प्रतिभागियों ने मोबाइल पर अपने गीतों की धुन क्या सुनाई उन्होंने पूरे गीत में गायक का खूब साथ निभाया।


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बीच-बीच में गायकों का साथ निभाया

गैर हिन्दीभाषी स्पर्धा में गुरुवार को संगतकार में हारमोनियम पर भारत भूषण परगनिया, की- बोर्ड पर युगल साहू, बैंजो पर डायमंड साहू, बांसूरी-शहनाई- भोला यादव, तबला जितेन्द्र साहू, ढोलक पर रेखराम साहू और ऑक्टोपेड पर पूनम साहू ने संगत की। इसके साथ ही भालचंद शेजेकर, दीपेन्द्र हालदार, दुष्यंत हरमुख ने भी बीच-बीच में गायकों का साथ निभाया।


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परखने वाले भी थे खास

लोकगीतों को सुनने और परखने के लिए आज के निर्णायक भी खास थे। जिसमें इप्टा भिलाई से जुड़े रंगकर्मी एवं संगीतज्ञ मणिमय मुखर्जी, रंगकर्मी व म्यूजिक एक्सपर्ट वरदा जोशी एवं छत्तीसगढ़ी गीतों के जानकार दुर्वाशा टंडन शामिल थे। इन तीनों निर्णायकों ने प्रतिभागियों को हर पैमानें पर परखा।


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आज होगी पति-पत्नी की जुगलबंदी

अब तक अलग-अलग गीत गाकर अपनी प्रतिभा दिखाने वाले पति और पत्नी शुक्रवार को एक साथ नजर आएंगे। युगल स्पर्धा में पति और पत्नी को साथ गाना होगा। इस प्रतियोगिता के लिए कई कपल ने महीनों पहले तैयारी की है तो कुछ ऐसे है जो सिर्फ एंजाय करने ही मंच पर आएंगे।

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