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किराने की दुकान से बदली इस संगीतकार की जिंदगी, ऐसे बन गए बॉलीवुड के चहीते

ग्राहक ने उधार चुकाने के बदले कल्याणजी-आनंदजी को दी संगीत की शिक्षा

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इंडस्ट्री में अपना खास मुकाम बनाने वाले मशहूर संगीतकार कल्याणजी की आज पुण्यतिथि है। उन्होंने अपने भाई आनंदजी के साथ मिलकर इंडस्ट्री को कई सुपरहिट गाने दिए हैं। इनमें 'डॉन', 'सफर', 'कोरा कागज' आदि शामिल है। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम आपको उनसे जुड़ी कुछ खास बातें बताएंगे।

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कल्याणजी का जन्म गुजरात के कच्छ में हुआ था। उनके पिता का नाम वीरजी था। उनके पिता काम के सिलसिले में परिवार समेत मुंबई आ गए थे। उन्होंने यहां एक किराने की दुकान खोली थी।

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संगीत के क्षेत्र में कल्याणजी की एंट्री बेहद ही दिलचस्प थी। उन्हें संगीत की शिक्षा किसी महारथी या बड़े उस्ताद से नहीं मिली थी, बल्कि उन्हें संगीत का ज्ञान उनके पिता की दुकान से सामान खरीदने वाले एक शख्स ने दी थी।

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कल्याणजी के संगीत सीखने की शुरुआत भी काफी रोचक है। दरअसल उनके पिता वीरजी की दुकान से सामान खरीदने वाले एक ग्राहक पर काफी कर्ज था। वो दुकान से उधार पर सामान लिया करता था। जब उससे उधार का पैसा वापस करने को कहा तो उसने रुपयों के बदले कल्याणजी और आनंद जी को संगीत सिखाने की बात कही थी।

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पिता ने उधारी वसूलने के लिए इस बात पर हामी भर दी। इस तरह से दोनों भाईयों का रिश्ता संगीत से जुड़ा। वक्त के साथ उनकी संगीत में रुचि बढ़ गई और उन्होंने इसे बतौर करियर अपनाने की ठान ली।

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कल्याणी जी ने अपने भाई आनंदजी के साथ 'कल्याणजी वीरजी एंड पार्टी' के नाम से एक आर्केस्ट्रा कंपनी बनाई थी। इस सिलसिले में वो देश के अलग-अलग कोनों में जाकर अपने हुनर को दर्शाते थे। इसी बीच वो बॉलीवुड के म्यूजिक डायरेक्टरों से मिलें।

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हालांकि उस दौर में नौशाद, एसडी बर्मन और हेमंत कुमार जैसे नामचीन संगीत निर्देशक पहले से ही मौजूद थे। ऐसे में अपना एक अलग वजूद बनाना काफी मुश्किल था। तब भी कल्याणजी ने हार नहीं मानी और अपने भाई के साथ मिलकर मूवीज में संगीत देने का काम किया।

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उनकी पहली मूवी चंद्रगुप्त थी, जो सन् 1959 में रिलीज हुई थी। उस वक्त वो कल्याणजी—आनंदजी की जगह अपने पिता वीरजी शाह के नाम से जाने जाते थे। बाद में दोनों भाई अपने नाम का इस्तेमाल करने लगे।

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पहली मूवी में ब्रेक मिलने के बाद भी कल्याणजी को अपना करियर बनाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। उनकी ये जद्दोजहत करीब दो सालों तक चलती रही। बाद में उन्होंने अपने भाई के साथ गाने बनाने शुरू किए।

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कल्याणजी-आनंदजी ने मिलकर करीब 250 फिल्मों में संगीत दिया है। इनमें 17 फिल्में गोल्डन जुबली और 39 सिल्वर जुबली फिल्मों मेें से एक हैं। पूरी दुनिया में अपने हुनर का जलवा बिखेरने वाले कल्याणजी ने 24 अगस्त 2000 को दुनिया को अलविदा कह दिया।