लीची से है चमकी बुखार का कनेक्शन, इन 10 प्वाइंट्स में जानें कैसे बीमारी बना रहा है बच्चों को शिकार

लीची से है चमकी बुखार का कनेक्शन, इन 10 प्वाइंट्स में जानें कैसे बीमारी बना रहा है बच्चों को शिकार

Soma Roy | Updated: 14 Jun 2019, 02:16:14 PM (IST) दस का दम

  • एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के चलते फैल रही है ये बीमारी
  • लीची के बीज में मौजूद टॉक्सिन्स के बच्चों के लिवर में जमा होने से बढ़ रही है परेशानी

नई दिल्ली। पूरे उत्तर भारत में चमकी नामक बीमारी बहुत तेजी से फैल रही है। इससे अभी तक करीब 50 बच्चों की मौत हो चुकी है। ये आंकड़ा अभी भी जारी है। बताया जा रहा है कि ये बीमारी एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के चलते फैल रही है, जो दिमागी बुखार का कारण बन रही है। वहीं कुछ डॉक्टरों के मुताबिक इस बीमारी के बढ़ने की मुख्य वजह लीची है। तो क्या है यह बीमारी और बच्चे ही क्यों बन रहे हैं इसके शिकार आइए जानते हैं।

1.चमकी बुखार का कहर सबसे ज्यादा बिहार के सीतामढ़ी, शिवहर, मोतिहारी, बेतिया और वैशाली ज़िले में देखने को मिल रहा है। यहां बच्चे तेजी से दिमागी बुखार के शिकार हो रहे हैं। उन्हें इलाज के लिए मुज़फ्फरपुर के अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है।

2.आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ 10 जून को मुज़फ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल में करीब 44 बच्चे भर्ती हुए थे। जिनमें से 25 बच्चों की मौत हो गई थी। वहीं 13 जून तक अस्पताल में 137 बच्चे भर्ती किए गए। जिनमें से 50 बच्चों की मौत हो गई।

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3.मरने वाले बच्चों की उम्र ज्यादातर 5 से 10 साल के बीच की थी। वरिष्ठ राज्य स्वास्थ अधिकारी संजय कुमार के मुताबिक बच्चों में ये बीमारी खून में शर्करा की कमी के चलते हो रही है। इसे हाइपोग्लिसीमिया भी कहते हैं।

4.संजय कुमार ने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक लीची में कुछ ऐसे टॉक्सिन्स होते हैं जो बच्चों के लिवर में जाकर जम जाते हैं और तापमान के बढ़ने पर वो विषैले तत्व शरीर में फैलने लगते हैं। चूंकि बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होती है इसलिए वो इसकी गिरफ्त में जल्दी आते हैं।

5.वरिष्ठ राज्य स्वास्थ अधिकारी के अनुसार एक्सपर्टों की राय के मुताबिक लीची से इस बीमारी के फैलने की आशंका है, क्योंकि मुज़फ्फरपुर क्षेत्र में लीची की काफी ज्यादा पैदावार होती है।

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6.साल 2017 में द लैनसेट ग्लोबल हेल्थ मेडिकल जनरल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक इंसेप्लोपैथी या दिमागी बुखार के फैलने में लीची जिम्मेदार होती है। उनके मुताबिक जिन बच्चों ने खाने के बजाय लीची ज्यादा खाई है और खासतौर रात का भोजन न किया हो, उनके हाइपोग्लैसीमिया के शिकार होने का खतरा ज्यादा होता है

7.एक्सपर्ट्स के मुताबिक बच्चों की मौत के पीछे एक और वजह भी है। बताया जाता है कि जिन बच्चों ने लीची खाने के बाद पूरे दिन कम पानी पिया। इससे उनके शरीर में सोडियम की कमी हो गई। जिसके चलते वे दिमागी बुखार के शिकार हो गए।

8.द लैनसेट स्टडी के मुताबिक जब बच्चों के शरीर में शुगर की मात्रा कम हो जाती है। तब मेटाबॉलिज्म सिस्टम ग्लूकोज को बढ़ाने के लिए फैटी एसिड का निर्माण करता है।

9.आंकड़ों के मुताबिक पहले भी इस बीमारी से बिहार में कई बच्चों की जान गई थी। उनके यूरीन सैम्पल में पाया गया कि उन्होंने लीची का सेवन किया था। चूंकि लीची एक अधपका फल है इसलिए इसके बीज में टॉक्सिन्स ज्यादा होते हैं।

10.इन विषैले तत्वों में ग्लूकोज सिंथेसिस नामक तत्व पाया जाता है जो सबसे ज्यादा खराब रहता है। जब बच्चों के शरीर में शुगर की कमी होती है तो बॉडी इसे बैलेंस करने के लिए ज्यादा ग्लूकोज रिलीज करती है। तभी लिवर में जमा ग्लाइकोजेन नामक विषैला तत्व भी शरीर में फैल जाता है, जो चमकी बीमारी का कारण बनता है।

 

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