स्लो प्वॉइजन देकर किया जा रहा था लता जी की मौत का इंतजार,ये शख्स चखने लगे थे उनका खाना

स्लो प्वॉइजन देकर किया जा रहा था लता जी की मौत का इंतजार,ये शख्स चखने लगे थे उनका खाना

Pratibha Tripathi | Updated: 28 Sep 2019, 10:11:34 AM (IST) दस का दम

  • 28 सितंबर, 1929 को मध्य प्रदेश के इंदौर में जन्मी लता मंगेशकर
  • लता जी ने अब तक करीब 30 हजार से ज्यादा गाने गाए

नई दिल्ली। भारत की स्वर कोकिला लता मंगेशकर आज 90 साल की हो चुकी हैं। 28 सितंबर, 1929 को मध्य प्रदेश के इंदौर में जन्मी लता रंगमंच के कलाकार और गायक पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बेटी है। लता जी को गाने का शौक विरासत के रूप में मिला था। इसलिये गाने और म्यूजिक में उनकी दिलचस्पी बचपन से ही थी। लता ने 13 साल की उम्र में पहली बार 1942 में आई मराठी फिल्म ‘पहली मंगलागौर’ में गाना गाया। हिंदी फिल्मों में उनकी एंट्री 1947 में फिल्म ‘आपकी सेवा’ से हुई। वो अब तक करीब 30 हजार से ज्यादा गाने गा चुकी हैं।
लताजी पहली ऐसी महिला है जिन्हें भारत सरकार ने पद्म भूषण (1969) और भारत रत्न (2001) से सम्मानित किया। बॉलीवुड में भी उन्हें ‘राष्ट्रीय पुरस्कार’, ‘दादा साहेब फाल्के पुरस्कार’ और ‘फिल्म फेयर’ जैसे कई अवार्ड्स से नवाजा जा चुका है। साल 2011 में लता जी ने आखिरी बार ‘सतरंगी पैराशूट’ गाना गाया था, उसके बाद उनकी बढ़ती उम्र नें उन्हें गानों से दूर कर दिया। उनके बर्थडे पर आज हम ऐसे किस्से शेयर कर रहे है,जिनसे शायद आप हैं अनजान ...

किस्सा नंबर-1
लता मंगेशकर ने मात्र 14 साल की उम्र से घर की सारी जिम्मेदारियों को अपने कंधे पर लेकर परिवार को संभालना शुरऊ कर दिया था। क्योकि पिता के असमय निधन की वजह से उन पर ये जिम्मेदारी आ गई थी। और बड़ी बेटी होने के नाते ये जिम्मेदारी बखूबी निभाई भी। जैसे जैसे वो बड़ी हो रही थी उनकी गायिकी के सुर और अधिक सुरीले होते जा रहे थे जिसके चलते वो हर जगह अपना नाम कमा चुकी थी। 1962 में जब लता 32 साल की थी तब उनके किसी करीबी ने स्लो प्वॉइजन देना शुरू किया था जिससे उनकी अावाज दुनियां से खो जाए। इसका खुलासा लता की बेहद करीबी पद्मा सचदेव ने अपनी किताब ‘ऐसा कहां से लाऊं’ में किया है। जिसके बाद राइटर मजरूह सुल्तानपुरी कई दिनों तक उनके घर आकर पहले खुद खाना चखते, फिर लता को खाने देते थे। हालांकि, उन्हें मारने की कोशिश किसने की, इसका खुलासा आज तक नहीं हो पाया।

किस्सा नंबर-2

लता जी के पिता दीनानाथ मंगेशकर मराठी थिएटर का जाना माना नाम थे। अफरात पैसा होने के चलते उन्होनें गोवा में आम और काजू के बागानों के अलावा 2 लाख रुपए में एक पहाड़ भी खरीदा था। इरादा तो था पुर्तगालियों से पूरा ‘गोवा’ खरीदने का लेकिन वक्त ने करवट बदली और दीनानाथ को नशे की लत लग गई, और इस नसे के असर ने उनका पूरा परिवार बिखेर दिया। जिसका असर घर की माली हालत पर भी पड़ा। इसके बाद लता जी को कम उम्र में ही काम करना पड़ा।

किस्सा नंबर-3
कहा जाता है कि लता जा और उनकी बहन दोनों के मिजाज़ आपस में नही थे। जहां लता नियमों में बंधकर रहने वाली थी तो वही आशा जी किसी भी तरह के नियमों में बंधना पसंद नहीं था। इसलिये उन्होंने अपने अलग रास्ते चुने। 16 साल की उम्र में ही आशा ने परिवार के विरूध खड़े होकर होकर 31 साल के गणपतराव भोंसले से शादी कर ली। गणपत राव उस वक्त लता मंगेशकर के सेक्रेटरी हुआ करते थे। एक इंटरव्यू में खुद आशा ने बताया था कि लता मंगेशकर ने आशा और गणपत के इस रिश्ते को मंजूरी नहीं दी थी। जिसके बाद दोनों के बीच काफी दूरी आ गई ।

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किस्सा नंबर-4
लता ने मोहम्मद रफी के साथ सैकड़ों गानें गाए थे, लेकिन एक समय ऐसा भी आया था जब उन्होंने रफी के साथ काम करना तो क्या बातचीत करना भी बंद कर दिया। दोनों ने एक साथ गीत गाने से इंकार कर दिया था। हालांकि चार वर्ष के बाद अभिनेत्री नरगिस के प्रयास से दोनों ने एक साथ एक कार्यक्रम में ‘दिल पुकारे’ गीत गाया।

किस्सा नंबर-5

मधुबाला जब भी फिल्मों को साइन करती थी तो वो अपने हर कॉन्ट्रैक्ट में ये शर्त रखती थीं कि उनके लिए लता ही प्लेबैक करें। लेकिन लता जी को सायराबानों पर प्लेबैक करना अच्छा लगता था।

किस्सा नंबर-6
बचपन में जब लता जी ने कुंदनलाल सहगल की एक फिल्म 'चंडीदास'देखी थी तो वह कहती थीं कि वह बड़ी होकर सहगल से शादी करेंगी। लेकिन घर के जिम्मेदारियों के सामने उनके सारे सपने चकनाचूर हो गए। जिसके चलते उन्होंने शादी नहीं की। उनका कहना है कि घर के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी उन पर थी,ऐसे में शादी करना के मतलब था अपने परिवार से दूर हो जाना। जो उन्हें मंजूर नही था।

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किस्सा नंबर-7
लता जी को देख कर ये अंदाज लगा पाना मुश्किल है कि बचपन में वो मस्तीखोर रही होंगी। लेकिन उनकी मानें तो वो बचपन में काफी शरारती थीं।
किस्सा नंबर-8
बचपन में पढ़ाई के दौरान फीस समय पर ना चुका पाने के कारण उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। जिसके बाद से लता जी ने स्कूल जाना ही छोड़ दिया। लेकिन इसके बाद भी लता जी को दुनिया की 6 बड़ी यूनिवर्सिटीज से डॉक्टरेट की डिग्री मिली है।
किस्सा नंबर-9
लता जी को हवाई सफर करना काफी डरवना लगता हैं। इसलिए जब फ्रांस की सरकार ने उन्हें ‘प्रेस्टीजियस अवॉर्ड’ से सम्मानित किया, तो लता ने उनसे मुंबई आकर ये अवॉर्ड देने की गुजारिश की थी।

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किस्सा नंबर-10
अपनी आवाज को और सुरीली और मीठा बनाने के लिए वो रोज ढेर सारी हरी मिर्च खाती थीं,खासकर तीखी कोल्हापुरी मिर्च। इसके अलावा लता जी अपनी आवाज की फिटनेस के लिए बबल गम भी चबाती थीं।

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