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इन 10 जाबांज महिला अफसरों ने बदल दी सेना की तस्‍वीर, किसी ने किया एवरेस्‍ट फतह तो किसी ने उड़ाया फाइटर जेट

Internaltional Women’s Day पर जानिए 10 जाबांज महिला अधिकारियों की कहानी, जिन्‍होंने बदल दी सेना की तस्‍वीर

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Vivhav Shukla

Mar 08, 2020

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10 जाबांज महिला अधिकारियों की कहानी, जिन्‍होंने बदल दी सेना की तस्‍वीर

नई दिल्ली। 8 मार्च 2020 को पूरी दुनिया अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस (Internaltional Women’s Day ) के तौर पर मनाता आ रहा है। इस महिला दिवस ( women indian army) आज हम आपको 8 ऐसी महिलाओं के बारे में बताएंगे जिन्‍होंने वर्दी की शान और देश की आन-बान में अपना पूरा

पुनीता अरोड़ा: पुनीता (punita arora) पहली महिला ऐसी महीला हैं जिन्होंने इंडियन आर्म्ड फोर्सेज (indian armed forces) में दूसरी सबसे बड़ी रैंक (लेफ्टिनेंट जनरल) मिली।इतना ही नहीं 16 जून 2005 को पहली महिला वाइस एडमिरल भी बनीं थी।

अंजना भादुरिया: अंजना (anjana bhadauria) भारतीय सेना में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली महिला हैं। अंजना वुमन स्‍पेशल एंट्री स्‍कीम (Women Special Entry Scheme ) के जरिए सेना में शामिल हुईं थी।

पद्मावती बंदोपाध्याय: पद्मावती (Padma Bandopadhyay) ने साल 1968 में वायु सेना जॉइन किया था। पद्मावती बंदोपाध्याय (Padma Bandopadhyay) भारतीय वायु सेना की पहली महिला एयर मार्शल थीं।साल 1978 में उन्‍होंने डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज कोर्स पूरा किया। ऐसा करने वाली वह पहली महिला अधिकारी बन गईं। बता दें साल 1971 के भारत-पाकिस्‍तान संघर्ष के दौरान उनके सराहनीय सेवा के लिए उन्हें विशिष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किया गया।

अवनि चतुर्वेदी: अवनि (Avani Chaturvedi) फ्लाइट लेफ्टिनेंट हैं। वे मध्य प्रदेश के रीवा जिले से हैं 19 फरवरी 2018 को पहली भारतीय महिला बनीं, जिन्होंने अकेले ही फाइटर विमान उड़ा कर दिखाया।

गुंजन सक्सेनाः गुंजन (Gunjan Saxena) को लोग करगिल गर्ल के नाम से जानते हैं।कलगिल युद्ध (kargil war) के दौरान वह पहली महिला थीं, जिन्हें वहां महिला हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में तैनात किया गया था। इतना ही नहीं गुंजन सक्सेना की जिंदगी के ऊपर फिल्म भी बनाई जा रही है। फिल्म में उनका किरदार श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर निभा रही है।

दिव्या अजित कुमार: साल 2010 में दिव्या (Divya Ajith Kumar) पहली महिला कैडेट बनीं, जिन्हें ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकैडमी (ओटीए) ने सोर्ड ऑफ ऑनर से नवाजा गया था।इतना ही नहीं साल 2015 में वे गणतंत्र दिवस की परेड में सीआपीएफ टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली वह पहली महिला बनी थी।

मिताली मधुमिता: मिताली (Mitali Madhumita) को साल 2011 में सेना पदक मिला था। ये पदक पाने वाली वे देश की पहली महिला अधिकारी बनीं थी। बता दें जब साल 2010 में काबुल स्‍थ‍ित भारतीय दूतावास पर आत्‍मघाती हमला हुआ, तब वह वहां पहुंचने वाली पहली अधिकारी थीं। उस वक्त उनके पास कोई हथियार नहीं था इसके बावजूद वे वहां दौड़ कर मौके पर पहुंचीं। और पूरे ऑपरेशन को लीड़ किया था।

शांति तिग्गाः शांति (Shanti Tigga) जब भारतीय सेना में शामिल हुई थीं, तब वह दो बच्चों की मां थीं। उन्होंने 35 की उम्र में यह साबित कर दिया था किसी काम के लिए जज्बा होना चाहिए। उम्र कोई मायने नहीं रखती। हालाँकि उनका सफ़र काफी छोटा रहा, लेकिन जितना रहा उतने में उन्होंने कई कारनामे किए जिसके लिए उनका नाम आज भी लोगों का जुवान पर है।

प्रिया सेमवाल: प्रिया देश के सैन्‍य अध‍िकारी की पत्‍नी के तौर पर सेना में बतौर अध‍िकारी सेवा देने वाली पहली महिला हैं।साल 2014 में कोर ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग (आर्मी) में शामिल किया गया।प्रिया के पति सेना में थे लेकिन एक काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशन में वे शहीद हो गए थे। जिसके बाद उन्‍होंने सेना ज्वाइन कर लिया।

निवेदिता चौधरी: निवेदिता भारतीय वायु सेना (IAF) की पहली महिला बनीं जिन्होंने माउंट एवरेस्‍ट फतह किया। उन्होंने साल 2009 में IAF अधिकारी के तौर पर आगरा में स्क्वाड्रन में शामिल हुई थीं।