5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी के सपने को बड़ा झटका, जीडीपी रैंकिंग में सातवें स्थान पर फिसला भारत

  • नई रैंकिंग के अनुसार फ्रांस और ब्रिटेन भारत से निकले आगे
  • 2017 में भारत दोनों देशों को पछाड़कर पांचवें स्थान पर पहुंचा था
  • 2024 तक देश को 5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने का रखा है लक्ष्य
  • भारत की इकोनॉमी पर ग्लोबल स्लोडाउन का दिखने लगा है असर

By: Saurabh Sharma

Updated: 02 Aug 2019, 02:07 PM IST

नई दिल्ली। World Bank की ताजा रिपोर्ट ने भारत के सबसे बड़े सपने को बड़ा झटका दिया है। रिपोर्ट के अनुसार GDP की नई रैंकिंग के अनुसार भारत दो पायदान फिसलकर एक बार फिर से 7वें स्थान आ गया है। वर्ल्ड बैंक की ओर से यह आंकड़े 2018 के जारी किए हैं। वहीं ब्रिटेन और फ्रांस ने एक बार फिर से दो साल पहले वाली पोजिशन हासिल कर ली है। जानकारों की मानें तो भारत को यह नुकसान 2018 में डॉलर के मुकाबले रुपए का लगातार कमजोर होना बताया है। अब भारत के 5 सालों में 5 ट्रिलियन डाॅॅॅलर की इकोनॉमी बनने पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आपको बात दें कि रेटिंग एजेंसियों ने लगातार भारत की अनुमानित विकास दर को नीचे गिराया है। हाल ही में क्रिसिल ने भारत की अनुमानित विकास दर को 7 फीसदी से नीचे गिरा दिया है।

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वल्र्ड बैंक की रिपोर्ट में भारत को नुकसान
2018 में भारत को जीडीपी के लिहाज से रैंकिंग में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। 2017 में पांचवें स्थान पर आया भारत अपनी इस पोजिशन को एक साल में गंवा बैठा है। वहीं ब्रिटेन और फ्रांस एक बार फिर से पांचवें और छठे स्थान पर आ गए हैं। आंकड़ों की मानें तो भारत की 2018 में अर्थव्यवस्था 2.7 ट्रिलियन डॉलर थी। इस आंकड़ें के साथ भारत 7वें स्थान पर है। जबकि ब्रिटेन 2.8 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ इस लिस्ट में पांचवें स्थान पर पहुंच गई है। वहीं फ्रांस 2.8 ट्रिलियन में कुछ अंतर से छठे स्थान पर आ गई है। वहीं टॉप 3 देशों की बात करें तो 20.5 ट्रिलियन डॉलर के साथ अमरीका पहले, चीन 13.6 ट्रिलियन डॉलर और 5 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ जापान तीसरी पोजिशन पर टिके हुए हैं।

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ब्रिटेन, फ्रांस और भारत में है काफी कम अंतर
जानकारों की मानें तो भारत, फ्रांस और ब्रिटेन के बीच काफी कम अंतर है। भारत के लिए अच्छा माहौल फिर रैंकिंग में सुधार ला सकता है, लेकिन भारत के लिए मौजूदा हालात फेवर में नहीं दिखाई दे रहे हैं। भारत की इकोनॉमी स्लोडाउन की ओर बढ़ रही है। तमाम एजेंसीज और आरबीआई खुद अनुमानित ग्रोथ रेट कम कर चुका है। ऐसे में भारत को थोड़ा इंतजार करने की जरुरत है। वहीं दूसरी ओर रुपए के मुकाबले डॉलर का कमजोर होना भी काफी जरूरी है। यही वजह है कि भारत पांचवें से 7वें स्थान पर फिसला है।

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खराब स्थिति रहेगी जारी
केडिया कमोडिटी के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि भारत की इकोनॉमी आने वाले दिनों में और भी ज्यादा नुकसान में रह सकती है। उसका कारण है सभी सेकटर्स के नतीजे नकारात्मक है। वहीं विदेशी निवेशकों का अपना रुपया निकालना जारी रखा हुआ है। जो भारत की इकोनॉमी के लिहाज से बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरी तिमाही के नतीजे और भी बुरे हो सकते हैं। उसका कारण है मानसून। ऐसे अगर भारत विदेश निवेश और बाकी जीचों को बेहतर करने में सफल रहता है तो ठीक है वर्ना स्थिति और बिगडऩे के आसार दिखाई दे रहे हैं।

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अब भारत पर ग्लोबल स्लोडाउन का असली असर
डॉलर के मुकाबले रुपए का गिरना और ग्लोबल स्लोडाउन का असली असर अब भारत पर साफ दिखाई दे रहा है। अजय केडिया ने कहा कि बीते कुछ सालों से ग्लोबल स्लोडाउन और ट्रेड वॉर का पॉजिटिव इंपैक्ट भारत पर दिखाई दे रहा था। अब जितना फायदा भारत को मिलना था वो मिल चुका है। भारत की इकोनॉमी पर ग्लोबल स्लोडाउन का नेगेटिव इंपैक्ट दिखना शुरू हो गया है। अभी यह कम है। आने वाले दिनों में यह असर ज्यादा दिखेगा।

 

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