Girl Sainik School: स्कूल का निर्माण बीकानेर के जयमलसर क्षेत्र में किया गया है, जिसकी लागत लगभग 108 करोड़ रुपये है। यह स्कूल पूरी तरह आवासीय (हॉस्टल बेस्ड) होगा और राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त होगा।
Girl's First Sainik School: देश का पहला गर्ल्स सैनिक स्कूल खुलने जा रहा है। बीकानेर, राजस्थान में देश का पहला बालिका सैनिक स्कूल(Girl Sainik School) स्थापित किया जा रहा है, जो महिला शिक्षा और सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम है। इस स्कूल का निर्माण बीकानेर के जयमलसर क्षेत्र में किया गया है, जिसकी लागत लगभग 108 करोड़ रुपये है। यह स्कूल पूरी तरह आवासीय (हॉस्टल बेस्ड) होगा और राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त होगा।
विद्यालय में कक्षा 6 और कक्षा 9 में सिर्फ छात्राओं को ही प्रवेश मिलेगा। प्रत्येक कक्षा में 80 बालिकाओं को दाखिला दिया जाएगा। प्रवेश के लिए एंट्रेंस परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसके लिए आवेदन जनवरी 2026 में लिए जाएंगे। परीक्षा अप्रैल 2026 में कराई जाएगी और परिणाम मई 2026 में घोषित होगा। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत 1 जुलाई 2026 से होगी। प्रदेश में कुल 9 नए सैनिक स्कूल शुरू करने की योजना है, जिनमें से एक सामान्य सैनिक स्कूल श्रीगंगानगर में खोला जाएगा। इन सभी स्कूलों में साइंस स्ट्रीम के सभी विषयों की पढ़ाई की जाएगी। स्कूल का संचालन चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल की तर्ज पर होगा।
विद्यालय में प्रधानाचार्य और हॉस्टल वार्डन के पदों पर सेवानिवृत्त सेना अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी, जबकि अन्य शैक्षणिक और अशैक्षणिक कर्मचारी राज्य सरकार की सेवाओं से लिए जाएंगे।
सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था। 3 जनवरी 1831, को महिलाओं के अधिकारों के लिए जीवन समर्पित करने वाली सावित्रीबाई फुले का जन्म हुआ था। वह भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं और उन्होंने 1848 में महाराष्ट्र के पुणे में देश का पहला बालिका विद्यालय शुरू किया था। इस स्कूल की स्थापना उन्होंने अपने पति महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर भिड़ेवाड़ा, पुणे में की थी। इस स्कूल की प्रिंसिपल की जिम्मेवारी भी उन्होंने खुद संभाली।
175 साल पहले जिस इमारत से महिला शिक्षा की शुरुआत हुई थी, आज वह जर्जर अवस्था में है। कभी इस स्कूल ने महिलाओं को पढ़ाकर उन्हें सशक्त बनाने का मार्ग दिखाया था, लेकिन आज वह बंद पड़ा है। कई बार इसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग उठ चुकी है, पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हालांकि पहले स्कूल के बाद देश में कई स्कूल खुले, जिसका मुख्य उद्देश्य लड़कियों की पढ़ाई को बढ़ावा देना था। लेकिन सावित्रीबाई फुले ने बहुत पहले इसी शुरुआत कर दी थी।
सावित्रीबाई का विवाह केवल 9 वर्ष की उम्र में 13 वर्षीय ज्योतिराव फुले से हुआ था। विवाह के समय वह अनपढ़ थीं, पर अपने पति की प्रेरणा से पढ़ाई की और आगे चलकर हजारों महिलाओं के लिए शिक्षा का द्वार खोला। उन्होंने दलित और वंचित वर्ग की महिलाओं को शिक्षित करने में अहम भूमिका निभाई।
जहां एक ओर बीकानेर में बालिकाओं के लिए नया सैनिक स्कूल लड़कियों को सशक्त बनाने का एक आधुनिक माध्यम बन रहा है, वहीं सावित्रीबाई फुले जैसे व्यक्तित्व हमें यह याद दिलाते हैं कि महिला शिक्षा की नींव वर्षों पहले रखी जा चुकी थी। जरूरत है उस विरासत को संरक्षित रखने और आगे बढ़ाने की।