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123 सरकारी स्कूल जर्जर और 234 मरम्मत योग्य

पढ़ाई के दौरान स्कूल में छत गिरने की खबरों के बाद भी जिला शिक्षा विभाग नहीं ले रहे सबक। शासन से स्वीकृति के इंतजार में स्कूल भवनों का कायाकल्प नहीं हो रहा है।

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पढ़ाई के दौरान स्कूल में छत गिरने की खबरों के बाद भी जिला शिक्षा विभाग नहीं ले रहे सबक। शासन से स्वीकृति के इंतजार में स्कूल भवनों का नहीं हो रहा है कायाकल्प।

देश के विभिन्न राज्यों में जर्जर स्कूल भवन ढहने से स्कूल में पढ़ाई कर रहे बच्चों की मौत की खबर आए दिन आती है। बीते साल जुलाई माह में राजस्थान के झालावाड़ जिले के ग्राम पीपलोदी में जर्जर शासकीय प्राथमिक स्कूल भवन गिरने से मलबे में दबने से सात बच्चों की मौत हो गई थी। वहीं हाल ही में गुरुवार को वाड्रफनगर के एक निर्माणाधीन स्कूल का छज्जा गिरने से एक बच्चे की मौत हो गई। इस तरह की घटना के बाद से अब जिले के शिक्षा विभाग को भी सबक लेने की जरूरत है क्योंकि जिले में भी कई जर्जर स्कूल भवन है। हालांकि जिले के जर्जर स्कूल भवनों में तो बैठकर पढ़ाई नहीं कराते लेकिन लेकिन स्कूल परिसर में ही जर्जर स्कूल भवन होने से हल पल खतरा बना हुआ है।

जर्जर स्कूल भवन की जानकारी शासन को भेजी गई है

जिला शिक्षा विभाग के मुताबिक जिले में लगभग 1402 स्कूल हैं। इसमें से 123 सरकारी स्कूल जर्जर और 234 स्कूल मरम्मत योग्य हैं। इस मामले में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि जितने भी जर्जर स्कूल भवन हैं, उनकी जानकारी शासन को भेजी गई है। शासन से जैसे ही स्वीकृति मिलती है, आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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लगातार मांग लेकिन आज तक नहीं हुई पहल

जिले में आए दिन जर्जर स्कूल भवनों को लेकर पालक व स्कूली बच्चों ने प्रदर्शन व मांग की लेकिन कोई असर नहीं हुआ। हालांकि जिला शिक्षा विभाग के मुताबिक जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत व नवनिर्माण के लिए प्रयास किया जा रहा है। जुलाई माह 2025 में ही डौंडी विकासखंड के ग्राम भर्रीटोला के स्कूल भवन की छत का प्लास्टर गिर गया था, जिसके बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन भी किया था व विद्यार्थियों को स्कूल नहीं भेजनें का निर्णय लिया था। हालांकि शिक्षा अधिकारी के आश्वासन के बाद ही ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त किया था।

जर्जर भवन में कक्षा नहीं लगाने के निर्देश

जिला शिक्षा विभाग ने पहले ही आदेश जारी कर दिया है कि जहां जर्जर भवन हैं, वहां कक्षा न लगाएं। जिले में शिक्षा विभाग द्वारा चिन्हांकित जर्जर व मरम्मत योग्य स्कूल भवनों की संख्या चिंताजनक है। जानकारी के मुताबिक सबसे ज्यादा जर्जर भवन डौंडी विकासखंड में हैं। यहां पुराने स्कूल भवन हैं लेकिन अब जवाब देने लगे हैं।

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तीन स्कूलों की निर्माण की मिली स्वीकृति

अच्छी बात यह है जिले के तीन स्कूल भवन निर्माण की स्वीकृति मिल गई है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इन तीन स्कूल भवन, जिनमें पिपरछेड़ी, कमकापार व सांकरा (ज) स्कूल शामिल हैं और यहां स्कूल भवन का निर्माण भी चल रहा है। आने वाले साल 2027 तक इन तीनों जगहों पर स्कूल भवन बनकर तैयार हो जाएगा।

स्कूल जनत योजना के तहत पापरा में जर्जर भवन का निर्माण

जिले के डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम पापरा में संचालित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय परिसर में स्कूल जतन अभियान के तहत बनाए गए अतिरिक्त कमरों में दरारें पड़ गई हैं। लगभग दो साल पहले बनाए गए इस भवन में आई दरार इस स्कूल भवन की गुणवत्ता को बता रही है।

लोक निर्माण विभाग की टीम निरीक्षण करने तक नहीं पहुंची

मिली जानकारी के मुताबिक लोक निर्माण विभाग ने इस भवन का निर्माण लगभग 14 लाख रुपए की लागत में किया। पूर्व में जब ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत लोक निर्माण विभाग से की गई थी तो लोक निर्माण विभाग ने इस मामले को दिखवाने की बात कही थी पर ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी लोक निर्माण विभाग की टीम यहां निरीक्षण करने तक नहीं पहुंची। ग्रामीणों के मुताबिक यह स्कूल भवन पुराने अतिरिक्त भवन में संचालित हो रहे हैं। जबकि पुराने भवन पूरी तरह से खंडहर हो गया है। जगह की कमी की वजह से ही स्कूली बच्चों को पढ़ाई करने में बहुत ज्यादा परेशानी होती है। वहीं इस मामले में लोक निर्माण विभाग की ईई पूर्णिमा चंद्रा ने कहा कि इस मामले की जानकारी लेकर आगे की कार्यवाही की जाएगी।

शासन को भेजे गए प्रस्ताव

जिला शिक्षा अधिकारी मधुलिका तिवारी ने बताया कि जिले भर में कितने जर्जर स्कूल हैं और कितने मरम्मत योग्य हैं, इसकी जानकारी मंगाई गई है। हमने जर्जर व मरम्मत योग्य स्कूलों की सूची शासन को भेज दी है। शासन से जैसे ही स्वीकृति मिलती है फिर आगे की कार्यवाही की जाएगी।


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