
अब गर्मी चुभने लगी है। बढ़ती गर्मी के साथ जल जीवन मिशन के तहत गांवों में शुद्ध जल सप्लाई की योजना आज भी अधूरी है। जिले के लगभग 200 से अधिक गांवों में जल जीवन मिशन के तहत पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। इस मामले को विधायक संगीता सिन्हा ने विधानसभा में भी उठाया था। तब सरकार की ओर से राशि नहीं देने के कारण काम रुकने की बात सामने आई थी। पीएचई के रिकॉर्ड में कई गांवों में काम पूरा हो चुका है, लेकिन हकीकत में पानी सप्लाई नहीं हो रही है।
जिले में जल जीवन मिशन के तहत कुल 690 गांव में टंकी व पाइप लाइन बिछाकर पानी सप्लाई करना है। अभी तक कुल 425 गांवों में ही पानी टंकी बनाकर व पाइप लाइन बिछाकर नल कनेक्शन देकर जल प्रदाय किया जा रहा है। लगभग 70 गांव में पानी टंकी बने दो साल हो चुके हैं। जल स्तर गिरने या फिर मुख्य मोटरपंप से कनेक्शन नहीं होने के कारण पानी सप्लाई नहीं की जा रही है।
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बालोद ब्लॉक के ग्राम लोंडी व खैरवाही में दो साल से टंकी तैयार है, लेकिन यहां से पानी सप्लाई की शुरुआत नहीं हो पाई है। दिलचस्प यह है कि पीएचई के रिकॉर्ड में काम पूरा हो चुका है। हकीकत यह है कि टंकी में ही जल नहीं है। यही हाल चारवाही का भी है। राज्य शासन, पीएचई के सचिव ने मार्च तक जल जीवन मिशन के तहत पानी सप्लाई करने के लिए स्थानीय अफसरों को निर्देश दिए हैं।
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ग्राम पंचायत पोंडी की सरपंच दिनेश्वरी साहू ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत आश्रित ग्राम खैरवाही में पानी टंकी का निर्माण लगभग 15 माह पूर्व हो चुका है। अभी भी आधे से ज्यादा काम बाकी है। जल स्रोत नहीं मिलने के कारण असफल रहा। गांव की गली की गई, उसका भी सीमेंटीकरण नहीं किया गया है, जिससे लोगों की आवाजाही में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम प्रमुख सुरेश नेताम कहना है कि ग्रामीणों को जल्द शुद्ध जल उपलब्ध कराया जाए। सरकार की योजना का लाभ अभी तक मिल जाना चाहिए था।
इधर गांवों में नई टंकी बनने के बाद ग्रामीण नल से पानी आने का इंतजार कर रहे हैं। ग्राम चारवाही के ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी सीजन में वाटर लेवल डाउन होने से पेयजल संकट से जूझना पड़ता है। नई टंकी बनने से पेयजल संकट दूर होने की उम्मीद थी, लेकिन दो साल से नल में पानी आने का इंतजार कर रहे हैं। पुरानी टंकी, पाइपलाइन के माध्यम से पानी सप्लाई हो रही है।
कलेक्टर दिव्या मिश्रा भी हर सप्ताह टीएल की बैठक में हर विभागों के साथ पीएचई के कार्यों की भी समीक्षा करती हैं। लेकिन विभाग के कार्यों में प्रगति न के बराबर है। अभी गर्मी की शुरुआत है। अप्रैल, मई में जल संकट की स्थिति गंभीर हो सकती है। वहीं पीएचई के अधिकारी सागर वर्मा कोई जवाब नहीं देते हैं और न ही कॉल रिसीव करते हैं।
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Updated on:
02 Mar 2026 11:31 pm
Published on:
02 Mar 2026 11:26 pm
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