
बालोद जिले में कुछ दिनों से चर्चा चल रही है कि शासन जल्द जलाशयों से ग्रीष्मकालीन धान फसलों की सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा, लेकिन सिंचाई विभाग ने इस पर विराम लगा दिया है। सिंचाई विभाग ने कहा कि शासन से इस तरह का कोई आदेश ही जारी नहीं किया गया है।
जिले में कृषि विभाग व जिला प्रशासन ने धान का रकबा ग्रीष्मकालीन में शून्य रखा है। फिर भी कई किसानों ने अपनी इच्छा अनुसार धान की बोआई शुरू कर दी है। किसान नर्सरी लगाने की तैयारी कर रहे हैं। किसान जिले के सभी जलाशयों में लबालब पानी भरे होने के कारण पानी छोडऩे की मांग कर रहे थे, लेकिन विभाग ने साफ मना कर दिया कि इस संबंध में शासन और जिला प्रशासन से कोई आदेश नहीं है। बीते साल के आंकड़े देखें तो जिले में जिला प्रशासन के धान का रकबा शून्य घोषित करने के बावजूद किसानों ने लगभग 10 हजार हेक्टेयर में धान की फसल ली थी।
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विगत दिनों जिला कलेक्ट्रेट में भी कुछ गांव के किसानों ने आकर ग्रीष्मकालीन धान की बोआई की मांग को लेकर कलेक्टर ज्ञापन सौंपा था। जानकारी यह भी मिल रही है कि जिले के दस से अधिक गांव के किसानों ने धान की फसल लेने अनुमति मांगी है, जिसमें परसोदा, पैरी, बिरेतरा सहित अन्य गांव शामिल हैं।
बीते दिनों डौंडी ब्लॉक के ग्राम सिंघनवाही व आश्रित ग्राम पद्देटोला के किसानों ने प्रतिबोर से 0.80 हेक्टेयर में धान की फसल बोआई करने की मांग जिला प्रशासन से की। किसानों का कहना है कि बाकी रकबा में दलहन व तिलहन की फसल ली जाएगी।
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सिंघनवाही के किसान रमेश कुमार, भाव सिंह, लतखोर सहित अन्य किसानों ने कहा कि ग्राम सभा में निर्णय लिया गया कि प्रति बोर किसान सिर्फ 0.80 हेक्टेयर में ही धान की फसल लेंगे। कोई इससे ज्यादा में फसल लेता है तो उस किसान के बोर की बिजली काट दी जाएगी, जिसके जवाबदार वे खुद होंगे।
भले ही जिले के सभी जलाशयों में लबालब पानी भरा हुआ है लेकिन धान फसल में सिंचाई के लिए जलाशय से पानी छोडऩा मुश्किल है। गुरुर ब्लॉक भूमिगत जल के मामले में रेड जोन में है। वहीं पहली बार बालोद व गुंडरदेही ब्लॉक भी क्रिटिकल जोन में है।
सिंचाई विभाग के मुताबिक वर्तमान में सभी जलाशयों में 90 से 95 फीसदी पानी भरा है। तांदुला जलाशय में 37 फीट, गोंदली जलाशय में 33 फीट, मटियामोती जलाशय में 20 फीट एवं खरखरा जलाशय में 29.40 फीट पानी भरा हुआ है।
जल संसाधन विभाग बालोद के ईई पीयूष देवांगन ने कहा कि जिले के सभी प्रमुख जलाशयों में 90 से 95 फीसदी जलभराव है। ग्रीष्मकालीन धान फसल की सिंचाई के लिए पानी छोडऩे की कोई नहीं योजना है। शासन के आदेशानुसार ही कार्य किया जाएगा।
कृषि विभाग बालोद के डीडीए आशीष चंद्राकर ने कहा कि जिला प्रशासन के निर्देशानुसार जिले में ग्रीष्मकालीन धान का रकबा शून्य रखा गया है। कृषि विभाग से ग्रीष्मकालीन धान की बोआई का कोई आदेश नहीं है। हम किसानों को गर्मी में दलहन-तिलहन की फसल लेने किसानों को प्रेरित कर रहे हैं।
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Updated on:
07 Jan 2026 11:57 pm
Published on:
07 Jan 2026 11:56 pm
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