
Salary of Teachers: हमारे देश में पढ़ाई-लिखाई को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। सभी अभिवावक यह चाहते हैं कि उनके बच्चे किसी अच्छे स्कूल में पढ़ें। स्कूल के अलावा अभिवावक अपने बच्चों को ट्यूशन की भी सुविधा दिलाते हैं ताकि उनकी पढ़ाई में कोई कमी ना हो सकें। अभिवावकों और बच्चों की भी यहीं कोशिश रहती है कि अच्छे से अच्छे शिक्षकों के पास उन्हें पढ़ने का मौका मिलें।
हमारे देश में शिक्षकों को भगवान का दर्जा दिया गया है। लेकिन अगर शिक्षकों की आर्थिक स्थिति की बात करें तो भारत देश में शिक्षकों की आर्थिक स्थिति बहुत दयनीय है। शिक्षकों को अच्छी Salary नहीं दी जाती है। जबकि दुनिया के कई ऐसे देश हैं, जो शिक्षकों को सबसे ज्यादा सैलरी देते हैं।
यूरोप का एक देश है लक्जमबर्ग। पूरी दुनिया में इस देश के शिक्षकों को सबसे ज्यादा वेतन मिलता है। यहां के शिक्षक अपने छात्रों को सबसे बेहतर शिक्षा देने के लिए प्रयासरत रहते हैं। इसलिए इस देश की सरकार भी इन्हें सबसे ज्यादा वेतन देकर उनको सम्म्मान देती है। Word of Statistics ने इसी संबंध में एक डेटा जारी किया है। जिसके अनुसार लक्जमबर्ग में 15 साल के अनुभवी टीचर को सलाना 104,846 डॉलर यानी 87,14,060 रुपये मिलते हैं।
लक्जमबर्ग के बाद शिक्षकों को सबसे ज्यादा वेतन जो देश देता है, उसका नाम है जर्मनी। जर्मनी की बात करें तो इसे यूरोप की सबसे मजबूत इकॉनमी वाला देश भी कहा जाता है। जर्मनी में प्राइमरी स्कूल के टीचर्स की सैलरी 85,049 डॉलर यानि 70,73,359 रुपये सालाना है।
अपने देश भारत की बात करें, जहां शिक्षकों को भगवान का दर्जा दिया गया है तो भारत में टीचरों की सलाना सैलरी 8,828 डॉलर यानि 7,34,121 रुपये है। महीने के हिसाब से जोड़े तो तकरीबन 61 हजार रुपये महीने यहां के शिक्षकों को मिलता है। भारत के मुकाबले लक्जमबर्ग में 12 गुना है शिक्षकों का वेतन।
लक्जमबर्ग और जर्मनी के अलावा के दुनिया के कई और देश हैं, जो अपने शिक्षकों को ज्यादा वेतन देने में सबसे आगे हैं। इसमें स्विट्जरलैंड, कनाडा, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, आयरलैंड जैसे देशों के नाम शामिल हैं।
Updated on:
06 Feb 2025 10:32 am
Published on:
06 Sept 2024 06:06 pm
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