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चार साल से नर्सिंग कॉलेज में जमा छात्राओं के मूल दस्तावेज को एसपी ने दो घंटे में कराया वापस

दोबारा शिकायत मिलने पर दी एफआईआर की चेतावनी

डिंडोरीMay 15, 2024 / 10:46 pm

Ramashankar mishra

दोबारा शिकायत मिलने पर दी एफआईआर की चेतावनी
डिंडौरी. मापदंडों और नियमों को हासिए पर रख संचालित हो रहे नर्सिंग कॉलेज की गड़बड़ी उजागर हुई है। छात्रवृत्ति में हेरा-फेरी की फिराक में संस्था संचालकों ने नर्सिंग विद्यार्थियों के मूल दस्तावेजों को 4 साल से अपने पास बतौर बंधक जमा कर रखा था। इसकी शिकायत मिलते ही पुलिस अधीक्षक वाहिनी सिंह ने दो घंटे में छात्रों के मूल दस्तावेज वापस कराए और दोबारा ऐसी शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी संस्था संचालक को दी है। इसके साथ ही छात्रों की मांग पर अतिरिक्त कलेक्टर सरोधन सिंह ने फीस वापसी के लिए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। स्तावेज मिलने के बाद छात्राओं ने खुशी जाहिर की है। जानकारी अनुसार जिला मुख्यालय में संचालित नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत पत्र में उल्लेख किया था कि संस्था संचालक ने पिछले 4 साल से उनके समस्त मूल शैक्षणिक दस्तावेज जमा कर रखे हैं और वापस मांगने पर नहीं दिए जा रहे हैं। छात्राओं ने परीक्षा आयोजित नहीं होने की दशा में फीस वापसी की मांग भी की है। शिकायत पत्र में छात्राओं ने उल्लेख किया है कि उन्होंने 2021 में बीएससी नर्सिंग और जीएनएम कोर्स के लिए नर्सिंग इंस्टिट्यूट में प्रवेश लिया था। प्रवेश के दौरान संस्था संचालक ने उनके सभी मूल दस्तावेज जमा करा लिए थे। शिकायत के मुताबिक संस्था संचालक ने बीएससी नर्सिंग के लिए 70 हजार और जीएनएम कोर्स के लिए 20 हजार फीस जमा कराई थी। फीस जमा करने की रसीद छात्राओं के पास सुरक्षित है। छात्राओं का आरोप है कि संस्था संचालक ने ड्रेस, प्रवेश, क्लीनिक फीस, पंजीयन सहित अन्य कार्यों के लिए भी अलग से शुल्क वसूल किया था। नर्सिंग छात्राओं ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से उनकी वार्षिक परीक्षा आयोजित नहीं की गई है, जिसके चलते वह आहत हैं। किसी और विषय की पढाई के लिए जब छात्राओं ने मूल दस्तावेज और फीस वापसी की मांग की तो संस्था संचालक आनाकानी करने लगे। संस्था संचालक के इस रवैए से परेशान होकर छात्राओं ने प्रशासन और पुलिस से शिकायत करने पहुंची थी।
आदिवासी परिवार से हैंं छात्राएं, भविष्य की सता रही चिंता
शिकायत पत्र में छात्राओं ने उल्लेख किया है कि वह गरीब आदिवासी परिवारों से संबंध रखतीं हैं और डिंडौरी में किराए के कमरों में तीन वर्षों से रहकर परीक्षा का इंतजार कर रही हैं। इससे उनको आर्थिक हानि हो रही है और भविष्य भी अंधकारमय दिखाई दे रहा है। छात्राओं ने मांग की है कि संस्था से उनके मूल दस्तावेज और फीस वापस कराए जाएं, जिससे वह किसी अन्य महाविद्यालय में प्रवेश लेकर अध्ययन कर सकें।
एसडीओपी ने दी कार्रवाई की चेतावनी
नर्सिंग विद्यार्थियों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक वाहिनी सिंह ने एसडीओपी केके त्रिपाठी को फौरन कार्रवाई के निर्देश दिए। एसडीओपी ने संस्था संचालक को तलब करके छात्राओं के सभी दस्तावेज वापस करने कहा और भविष्य में ऐसी शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। हालांकि इस दौरान संस्था संचालक बहानेबाजी करते रहे, लेकिन पुलिस अधिकारी के सामने उसकी एक भी नहीं चली। चार साल से बिना परीक्षा पूरी फीस वसूली की शिकायत पर अतिरिक्त कलेक्टर सारोधन सिंह ने ताज्जुब जताया है। उन्होंने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच की बात कही है और फीस वापसी का भरोसा भी नर्सिंग छात्राओं को दिया है।

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