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कॉलेज, कोचिंग और स्टूडेंट्स, लव-लस्ट-अफेयर्स और ब्लैकमेलिंग

परिवार के सभी जागरूक सदस्यों को उन बच्चों पर नजर रखनी चाहिए जो स्कूल, कॉलेज या कोचिंग में जा रहे हैं।

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Sunil Sharma

Jun 22, 2018

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देश और दुनिया में घटित हो रही घटनाओं से हम सभी वाकिफ हैं, ऐसा हमारे साथ भी हो सकता है लेकिन इस बात से हम दूर रहते हैं। परिवार के सभी जागरूक सदस्यों को उन बच्चों पर नजर रखनी चाहिए जो स्कूल, कॉलेज या कोचिंग में जा रहे हैं। देखा जाए तो पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव से कोई भी महफूज नहीं है लेकिन स्वयं को और परिवार को इन सब मुसीबतों से बचाने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। स्कूल में जा रहे छोटे बच्चों के साथ अध्यापक कहीं गलत हरकत तो नहीं कर रहे। बच्चों को स्कूल से आने के बाद उनसे स्कूल में पढ़ाई और अन्य घटना के बारे में जरूर पूछे, अध्यापक का रवैया जरूर जानने की कोशिश करें।

ऐसे पहचानें
बच्चों के बारे में जानना बेहद ही आसान है। अभिभावक अपने बच्चे की मानसिकता और व्यवहार को देखें और उसके पीछे की वजह को जानने की कोशिश करें। बच्चे की पढ़ाई में रुचि कम और उत्तीर्णांक में गिरावट कैसे हो रही है। बच्चा स्कूल/ कॉलेज जा रहा है या पढ़ाई का नाम लेकर कहीं दूसरी जगह तो नहीं जा रहा। देखा जाए तो अभिभावक को हफ्ते या महीने में कुछ दिन निकालकर बच्चे के आने और जाने के बारे में जानना चाहिए। बच्चे के घर से निकलकर स्कूल जाने तक रास्ते में होने वाली सभी एक्टिविटी को नोट करें। परीक्षा में कम अंक आना और स्वभाव में चिड़चिड़ापन होना लव अफेयर की शुरुआत या निशानी हो सकती है। बच्चों को स्कूल लाइफ में अगर मोबाइल फ़ोन से दूर रखा जाए तो अच्छा रहता है।

कॉलेज/कोचिंग लाइफ
कॉलेज या कोचिंग में जाने वाले स्टूडेंट्स लव अफेयर में फंस जाते हैं और पढ़ाई से दूरी बनाने लगते हैं कुछ विद्यार्थी राजनीति को करियर के तौर पर चुन लेते हैं। कॉलेजों में अक्सर जूनियर और सीनियर में कोई फासला नहीं होता लेकिन वही सीनियर पास-आउट होने के बाद पढ़ाने लगते हैं। अपनी हम उम्र के विद्यार्थियों को पढ़ाना और वहीं पर प्रेम प्रसंग चलाना शिक्षक की मर्यादा को लांछन लगाता है। अभिभावकों को कॉलेज शिक्षक और कॉलेज में बच्चे की एक्टिविटी को ध्यान रखना चाहिए। किसी भी अनहोनी के लिए बच्चे के साथ-साथ अभिभावक भी जिम्मेदार होता है। अपनी बेटी/बेटे को शिक्षा के लिए आजादी देनी चाहिए लेकिन यह भी नहीं होना चाहिए हम लापरवाह हो जाएं।

ऐसी तमाम घटनाएं देखने को मिलती है
आए दिन अखबारों में हम पढ़ते हैं, "मध्य प्रदेश में कोचिंग संचालक और अध्यापक ने छात्रा का अपहरण कर लिया", "उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में शिक्षक ने छात्रा को बनाया था हवस का शिकार, गर्भवती होने पर हुआ खुलासा"। ये तो कुछ ही उदाहरण हैं जो समाज के सामने आए, हमारे आसपास ऐसे बहुत से मामले हैं जिनमें छोटी स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक जांच के घेरे में आ चुके हैं। यही नहीं बच्चे हॉस्टल में भी सुरक्षित नहीं है। हॉस्टल लाइफ में वार्डन द्वारा छात्राओं को शिकार बनाने की भी कई घटनाएं सामने आई हैं तो छात्राओं द्वारा रातभर हॉस्टल से गायब रहने की भी घटनाएं आम बात लगने लगी हैं।

इनसे रहें सावधान
बच्चों को स्कूल या कॉलेज ले जाने वाले वाहन और उसके चालक के बारे में पुख्ता जानकारी रखें। अपहरण और रेप की घटनाओं में भी कई मामले वाहन चालकों के आए हैं। अभिभावकों द्वारा बच्चों से वाहन चालक की गतिविधि के बारे में भी जानकारी लेनी चाहिए। पडोसी छात्र के साथ अपनी बिटिया को स्कूल या कॉलेज भेजने में थोड़ी सावधानी बरतें। जिस कॉलेज में आपकी बेटी पढ़ाई कर रही है उस कॉलेज में कोई गलत गतिविधियां तो नहीं हो रही। इसी तरह की छोटी-छोटी लेकिन महत्वपूर्ण सावधानियां रखकर हम अपने बच्चों को सुरक्षित रख सकते हैं।