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नयी कहानी : राम मंदिर बना नही पुजारी बनने को लेकर इस बड़े महंत ने कर दिया है ये दावा

दावा करने वाले महंत ने जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में प्रतिवेदन देने की कही है बात

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Ram mandir

Ram mandir Nirman news In Ayodhya

फैजाबाद . पूरी दुनिया में चर्चा का केंद्र रहने वाली अयोध्या और अयोध्या में बाबरी मस्जिद राम मंदिर विवाद के हल के लिए जहां ये पूरा मामला देश की सबसे बड़ी अदालत में है वहीँ सुप्रीम कोर्ट की सलाह पर इस विवाद का हल आपसी समझौते के जरिये कर लेने की सलाह पर जहां दोनों ही समुदाय के कई बड़े नाम सामने आ रहे हैं वहीँ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के विवाद के बीच अब एक नयी कहानी सामने आ गयी है और ये मामला है भगवान्अ श्री राम के मंदिर में पूजा करने के अधिकार का , सुनने में ये थोड़ा अजीब लग रहा है लेकिन ये सच है कि अभी राम मंदिर का निर्माण तो दूर अभी इस विवाद के हल की दिशा में कानूनी तौर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है लेकिन राम मंदिर बनने की उम्मीद लगाए राम मंदिर मुकदमे के एक पक्षकार महंत धर्म दास ने इस मंदिर में पुजारपना के अधिकार को लेकर दावा ठोंक दिया है . महंत धर्मदास का तर्क है की राम लला के पहले पुजारी उनके गुरु महंत अभिराम दास थे जिनके वे उत्तराधिकारी हैं इसलिए राम मंदिर बनने के बाद राम लला की सेवा में वही नियुक्त किए जाएं, महंत धर्मदास के कानूनी सलाहकार व पूर्व न्यायाधीश सिविल वीरेंद्र चौबे का भी दावा है कि पुजारी के लिए महंत धर्मदास ही प्रबल दावेदार है इसके लिए जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में प्रतिवेदन डाला जाएगा.

दावा करने वाले महंत ने जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में प्रतिवेदन देने की कही है बात

राम मंदिर मुकदमे के मुख्या पक्षकारों में से एक महंत धर्मदास के कानूनी सलाहकार पूर्व न्यायाधीश वीरेंद्र ओझा का तर्क है कि 1949 में जब रामलला का प्राकट्य हुआ था उस समय यह मूर्ति महंत अभिराम दास के पास थी जिनकी पूजा उन्होंने ही शुरू की.मुकदमा शुरू होने के बाद जब रिसीवर बैठे तो यह मूर्ति सुप्रीमकोर्ट के आदेश के तहत अधिग्रहण में आ गयी,उन्होंने दावा किया कि मुकदमे के दौरान निर्मोही अखाड़े के महंत भास्कर दास ने भी गवाही दी है कि जब राम लला का प्राकट्य हुआ था उस समय मूर्ति अभिराम दास के पास थी. इस लिए राम मंदिर के पुजारी महंत अभिराम दास थे और अब उनकी गैरमौजूदगी में ये अधिकार उनके चेले और राम मंदिर के पक्षकार महंत धर्मदास के पास है और इस सम्बन्ध में अब वे जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में प्रतिवेदन देंगे .बताते चलें कि अयोध्या में मंदिर मस्जिद विवाद में उस समय एक बड़ी उठापटक देखने को मिली जब आध्यात्म गुरु श्री श्री रविशंकर ने इस मामले के हल के लिए आपसी समझौते की बात कहते हुए दोनों पक्षकारों से मुलाक़ात का दावा किया था वहीँ अब इस नए दावे ने पूरे मामले को और पेंचीदा बना दिया है और आने वाले समय में इस मामले को लेकर भी विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है क्यूंकि वर्तमान में रामलला की सेवा पूजा एक अन्य पुजारी कर रहे हैं .