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अयोध्या में भक्त प्रहलाद और होलिका की कथा के अलावा एक और कारण है होली मनाने का

भगवान श्री राम के वंशज महाराजा रघु के शाशनकाल में त्रेता युग में अयोध्या में शुरू हुई थी चौक चौराहों पर लकड़ियाँ जलाने की परम्परा

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Ancient story of Holi 2018 associated with Ayodhya Faizabad

Holi 2018


फैजाबाद(अयोध्या) 2 मार्च को शुक्रवार के दिन रंगों का पर्व होली पूरे देश में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाएगा . इस पर्व को मनाने के लिए पूरे देश भर में बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई हैं . रंगोत्सव के मौके पर ना सिर्फ शुभ मुहूर्त में रंगों से खेलने की परंपरा रही है . बल्कि विविध प्रकार के पकवान और नए कपड़े पहन कर एक दूसरे के गले मिलकर शुभकामनाएं और बधाई देना इस महापर्व का एक अभिन्न अंग है . होलिकोत्सव का यह पर्व प्रमुख रुप से सतयुग काल में हुई एक घटना के फलस्वरुप होने वाली परंपरा है . जिसमें भक्त प्रहलाद और उनकी बुआ होलिका की कथा प्रचलित है . उसी कड़ी में प्रतिवर्ष होली के पर्व से 1 दिन पूर्व संध्या समय पर देश भर में हर चौक चौराहे पर प्रतीकात्मक रूप से होलिका बनाकर होलिका दहन किया जाता है . जिस के बाद होली का पर्व मनाया जाता है .आमतौर पर यही कथा हर किसी को पता भी है लेकिन अयोध्या के धर्मावलंबी और विद्वान होली के पर्व को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के वंशज महाराजा रघु से भी जोड़ कर चलते हैं .

भगवान श्री राम के वंशज महाराजा रघु के शाशनकाल में त्रेता युग में अयोध्या में शुरू हुई थी चौक चौराहों पर लकड़ियाँ जलाने की परम्परा

पौराणिक मान्यता के अनुसार महाराजा रघु के समय एक राक्षसी के उपद्रव से दुखी होकर उसके संहार के लिए होलिका जलाने की परंपरा बताई जाती है . अयोध्या के विद्वान आचार्य हरफूल शास्त्री का कहना है कि त्रेता काल में भगवान राम के वंशज महाराजा रघु के समय में ढूंढा नामक एक राक्षसी थी . जिसके उपद्रव और अत्याचार से समाज त्रस्त हो गया था उस समय महाराजा रघु ने गुरु वशिष्ट से इस राक्षसी का निवारण पूछा था . जिसके फलस्वरुप गुरु वशिष्ठ ने महाराजा रघु से कहा था कि चौक चौराहे पर हुड़दंग मचाते हुए युवा जब उसका दहन करेंगे तो उसका उपद्रव स्वत शांत हो जाएगा .गुरु की सलाह के उपरांत महाराजा रघु ने पूरे नगर में यह सूचना प्रसारित करवाई .जिसके बाद प्रत्येक चौराहों पर लकड़ियां एकत्र कर युवाओं ने दहन किया और उस राक्षसी का अत्याचार समाप्त हुआ . तब से होलिका दहन की परंपरा प्रारंभ हुई तब से लेकर आज तक अयोध्या में प्रतिवर्ष रंगोत्सव के 1 दिन पूर्व चौराहे पर लकड़ियां एकत्र कर जलाने की परंपरा है और इसी कड़ी में इस वर्ष भी धार्मिक नगरी अयोध्या और नवाबी शहर फैजाबाद में परंपरागत रूप से होली का यह त्यौहार मनाया जाएगा .