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Ground Report : इंतजार को नियति मान चुके अयोध्या के लोग, कहा- अब नहीं किसी से उम्मीद, रामलला हैं सिर्फ राजनीति का जरिया

मंदिर मस्जिद मुकदमे को लेकर देश भर में हो रही चर्चा, आखिर मामले पर मौन क्यों है अयोध्या...

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Ayodhya people Statment On supreme Court hearing On Ram Mandir babari

मंदिर मस्जिद मुकदमे को लेकर देश भर में हो रही चर्चा आखिर मौन क्यूँ है अयोध्या

अनूप कुमार
फैजाबाद ( अयोध्या ) देश की सबसे बड़ी अदालत में राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर 29 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई टल गई है | बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट की नई बेंच अब नियमित रूप से इस मुकदमे की सुनवाई करने वाली थी लेकिन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने इस मुकदमे की सुनवाई को जनवरी तक के लिए टाल दिया है | इस फैसले के आने के बाद जहां हिंदू पक्षकारों में निराशा देखी जा रही है वह मुस्लिम पक्षकारों ने इसे कोर्ट का फैसला बताते हुए इस पर कोई टिप्पणी करने की जगह इसे स्वीकार करने की अपील की है |

इंतज़ार को अपनी नियति मान चुके हैं अयोध्या के लोग अब नहीं किसी से कोई उम्मीद

आज की सुनवाई को लेकर पूरे देश भर की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी थी और सुनवाई टल जाने के बाद अब पूरे देश भर से राजनेताओं के अलावा आम लोगों की भी प्रतिक्रिया टीवी चैनल और सोशल मीडिया पर दिखाई दे रही है | लेकिन इन सबसे हटकर आम अयोध्यावासी बेहद शांत दिख रहा है | अयोध्या हमेशा की तरह अपनी रफ्तार में है और अयोध्या के लोगों के लिए यह कोई नई बात नहीं है | स्थानीय व्यापारी बालकृष्ण वैसे का कहना है कि अयोध्या के लोगों को तो तारीख लेने की आदत पड़ गई है | रामलला को इंसाफ कब मिलेगा इसका कोई पता नहीं है | हर बार ये सुनने को मिलता है कि इस तारीख को कुछ खास होगा लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती है | समाजसेवी घनश्याम दास पहलवान का कहना है फैसला जो कुछ हो आ जाना चाहिए | इस तरह से बार बार टालने से दोनों समुदाय के लोगों में निराशा बढ़ती जा रही है | हमें उम्मीद थी कि सुनवाई होगी लेकिन एक बार फिर से निराशा हाथ लगी है | आम अयोध्या के निवासी के रूप में मोहम्मद चांद का कहना है कि वैसे भी हमें तो रोजी-रोटी से मतलब है | यह तो बड़े लोगों का मामला है | लेकिन टीवी पर जब देखते और सुनते हैं तो लगता है की कितनी बड़ी बात है पर अयोध्या में तो कुछ दिखाई नहीं देता | फैसला आ जाता तो सभी को राहत हो जाती |

एक तरफ कोर्ट से मिल रही तारीख दूसरी तरफ आपस में लड़ रहे हिन्दू पक्षकार

एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई टालने के बाद दोनों पक्षकारों की अलग-अलग प्रतिक्रिया आ रही है | वहीं इस मुकदमे में रामलला का पक्ष रखने वाले दो पक्षकार ही आपस में आमने सामने आ गए हैं | इस मुकदमे के एक अहम पक्षकार निर्मोही अखाड़े ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के लिए जिन पत्थरों को मंगाया है वह हमारे किसी काम का नहीं है | अगर फैसला हमारे पक्ष में आता है तो हम स्वयं के पत्थरों से मंदिर का निर्माण करेंगे | हम विश्व हिंदू परिषद के मंगाए पत्थरों का निर्माण राम मंदिर के लिए नहीं करेंगे | दिलचस्प बात यह की इस मुकदमे को लेकर कुल 3 पक्ष का मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट में आमने-सामने हैं जिसमें दो पक्ष का हिंदू पक्ष से हैं और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड मुस्लिम पक्षकार के रूप में मुकदमा लड़ रहा है जाहिर तौर पर हिंदू पक्षकारों में आपसी विघटन इस मुकदमे को कमजोर कर सकती है |