
Ram Setu
अयोध्या . श्रीराम सेतु होने के प्रमाण पर अमेरिकन के एक न्यूज चैनल द्वारा जारी वीडीओ पर अयोध्या के संत धर्माचार्यो ने अपनी प्रतिक्रिया दी है श्रीराम जन्म भूमि न्यास अध्यक्ष और मणिराम दास छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास महाराज ने कहा कि त्रेता युग में 17 लाख वर्ष पूर्व भगवान राम, सीता मा की रक्षा करने भारत के तट पर पहुंचे, उन्हे भारत और लंका के बीच एक् समुद्र नज़र आया. तब एक वानर सेना - जिसमे वानर और भालू शामिल थे - उन्होने पत्थरों से एक मार्ग बनाया, जो राम सेतु के नाम से जाना जाता है.रामसेतु को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा इसकी सत्यता पर सवालिया निशान उठाने वाले,भगवान श्रीराम को ही काल्पनिक कहकर नकारते रहे.लेकिन जो सत्य है वह सत्य है जिस प्रकार जल,थल नभ तथा सूर्य , चन्द्र है,उसी प्रकार भगवान श्रीराम का जन्म और उन्का सम्पूर्ण जीवन चरित्र भी सत्य है. इस देश का दुर्भाग्य है कि जिस श्रीराम के होने का अस्तित्व विदेशी सुविकार करते है,उसी पारब्रह्म को यहा के तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादियो को सुविकार करने मे शर्म आती है. उन्होने कहा श्रीराम सेतु के प्रमाण पर उंगली उठाने वालो ने ही बाबरी समर्थको को आगे कर श्रीराम जन्म भूमि को विवादित बनाया . उस स्थान का पुरातात्विक साक्ष्य भी प्राप्त हुए उसके बाद भी बाबरी समर्थक श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण मे बाधक बने हुये है.
संतों ने कहा कथित सेक्युलर कांग्रेस ने बनाया रामसेतु को विवादित अब दुनिया मान रही है ये सच्चाई
महंत कमलनयन दास महाराज ने कहा अमेरिका ही नही मुस्लिम देशो ने श्रीराम को अपनाया उनके जीवन चरित्र को आत्मसात किया परन्तु हिन्दुओ को विभाजित करने वाले श्रीराम को ही अदालत मे खड़ा कर दिया.श्रीराम हमारी आस्था श्रद्धा और सामाजिक जीवन चरित्र के केन्द्र है 'राम' यह शब्द दिखने में जितना सुंदर है उससे कहीं महत्वपूर्ण है इसका उच्चारण, राम कहने मात्र से शरीर और मन में अलग ही तरह की प्रतिक्रिया होती है जो हमें आत्मिक शांति देती है,ऐसे प्रभु पर उंगली उठाने वालो का राम के देश मे रहने का अधिकार नही है. विहिप के अखिल भारतीय सलाहकार समित सदस्य पुरूषोत्तम नारायण सिंह ने कहा कि जो हमारे धर्म ग्रंथ और धार्मिक मान्यताओं ने सदैव चीख -चीख कहा श्रीराम का जन्म और उन्के द्वारा निर्मित सेतु अकाटय् सत्य कहा उसे आज श्रीराम सेतु के होने पर दुबारा अमेरिकन वैज्ञानिको ने अपनी मोहर लगाई दी है,अब श्रीराम सेतु तोड़ने वाली कांग्रेस सहित तथाकथित सेक्यूलर दल और बाबरी समर्थको को भी स्वीकार कर लेना चाहिए कि श्रीराम लला की जन्मभूमि अयोध्या है,और अपने झूठे दावे से स्वतः हट जाना चाहिए .
संतों ने कहा भगवान राम के अस्तित्व को नकारने वाले लेटे हैं मृत्यु शैय्या पर
केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल के सदस्य और संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास ने कहा श्रीराम सेतु को तोड़ने का षडयंत्र करने वाले कांग्रेसियो को चुल्लू भर पानी मे डूब जाना चाहिए,राम थे,है और सदैव भक्तो के हृदय मे जीवंत रहेगे,उन्होने कहा भगवान राम को काल्पनिक बताने वाले आज मृत्यु शय्या पर सांसे ले रहे है. जबकि भगवान श्रीराम और उनके द्वारा निर्मित सेतु को दुनिया स्वीकार कर रही है. विहिप के प्रान्तीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा भारत के दक्षिण में धनुषकोटि तथा श्रीलंका के उत्तर पश्चिम में पम्बन के मध्य समुद्र में 48 किमी चौड़ी पट्टी के रूप में उभरे एक भू-भाग के उपग्रह से खींचे गए चित्रों को अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (नासा) ने जब 1993 में दुनिया भर में जारी किया तो भारत में इसे लेकर राजनीतिक वाद-विवाद का जन्म हो गया था.आज पुनः अमेरिकन वैज्ञानिको द्वारा इसे तथ्यो के साथ न्यूज चैनल पर कहा गया कि रामसेतु का निर्माण हुआ था ,जो आज भी है. जो हिन्दुओ की आस्था का प्रतीक है,जिसे भारत विरोधी तत्वो के दबाव मे कांग्रेस तोड़ना चाहती थी. राम सेतु कभी भी हिन्दुओ की सामूहिक कल्पना से दूर नहीं हुआ जिसे सत्य माना ही नही गया बल्कि प्रमाणित किया गया,भगवान राम आज से 17 लाख वर्ष पूर्व हुऐ थे,जिसे राम विरोधियो को स्वीकार कर लेना ही चाहिए और अब श्रीराम की जन्मभूमि के न्यायिक वाद से हटना ही उनके हित मे है.
Published on:
13 Dec 2017 04:47 pm
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