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जानिये एक ऐसे प्राचीन मंदिर की कहानी जहां भगवान राम भी करने जाते थे अपनी कुलदेवी की पूजा

मंदिर में विराजमान माँ की दुर्लभ प्रतिमा में होते हैं तीन महाशक्तियों के दर्शन

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Badi Devkali Mandir News On navratri 2017 special Story in Hindi

Badi Devkali Mandir

अनूप कुमार

फैजाबाद . शारदीय नवरात्रि के मौके पर इन दिनों पूरे देश भर में मां जगतजननी की आराधना और पूजा का क्रम जारी है ,अलग-अलग पौराणिक मान्यताओं और किंवदंतियों के आधार पर देवी भक्त विभिन्न देवी मंदिरों पर अपने परिवार की सुख समृद्धि शांति और खुशहाली की कामना लेकर 9 दिन के इस महाव्रत पर धार्मिक अनुष्ठान संपूर्ण कर रहे हैं और पूजन पाठ में व्यस्त हैं . मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या और नवाबी शहर फैज़ाबाद में भी कई ऐसे प्राचीन सिद्ध पीठ हैं जहां के बारे में शास्त्रोक्त रूप से कथाएं प्रचलित हैं . जिनके आधार पर आज भी इन मंदिरों में भक्तों श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होती है और लोग अपने मनोकामना की पूर्ति के लिए देवी मां के चरणों में साष्टांग दंडवत होते हैं . ऐसा ही एक प्राचीन मंदिर है फैजाबाद का बड़ी देवकाली मंदिर जिसके बारे में पौराणिक मान्यता है कि इस देवी मंदिर में विराजमान देवी मां भगवान राम की कुलदेवी थी .

मंदिर में विराजमान माँ की दुर्लभ प्रतिमा में होते हैं तीन महाशक्तियों के दर्शन

फैजाबाद अयोध्या शहर के बीचोबीच बड़ी देवकाली क्षेत्र में स्थित इस पौराणिक विशालकाय मंदिर में वर्ष में पड़ने वाले दो नवरात्र वासंतिक नवरात्र और शारदीय नवरात्र के मौके पर 9 दिनों तक चलने वाला विशाल मेला आयोजित किया जाता है . जिस में शामिल होने के लिए प्रदेश के अलग-अलग जनपदों से मां भक्त श्रद्धालु मंदिर में पहुंचते हैं . इस वर्ष भी शारदीय नवरात्र 2017 के अवसर पर मंदिर परिसर में विशाल मेले का आयोजन किया गया है . जहां प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर मां बड़ी देवकाली का दर्शन और पूजन कर रहे हैं . विशालकाय परिसर में बने इस मंदिर के गगनचुंबी प्रवेश द्वार के अंदर मां जगत जननी का मंदिर है जहां पर मां विराजमान है . इस मंदिर परिसर की विशेषता है कि यहां पर शिलापट्ट पर 3 महाशक्तियों का संगम है जिसमें मां महालक्ष्मी महाकाली और मां महासरस्वती की प्रतिमाएं एक साथ विराजित हैं .
शाश्त्रों में वर्णित है इस पवित्र स्थल की महीमा भगवान राम भी करते थे देवी की पूजा

इतिहासकारों का मानना है कि यह प्रतिमाएं बेहद प्राचीन हैं वहीं मंदिर परिसर के सामने एक विशालकाय कुंड भी बना हुआ है . जिसमें भक्त श्रद्धालु स्नान और जल आचमन करने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन और पूजन करने के लिए जाते हैं . इस पौराणिक मंदिर के बारे में मान्यता है कि इस मंदिर में विराजमान मां देवकाली भगवान श्रीराम की कुलदेवी हैं और इस मंदिर में भगवान श्री राम भी पूजन करने आ चुके हैं . शास्त्रों में मिली जानकारी के मुताबिक भगवान श्रीराम का जन्म महा प्रतापी सम्राट इक्ष्वाकु कुल में हुआ था ,महाराजा इक्ष्वाकु कि कई पीढ़ियों ने अयोध्या पर राज किया था ऐसी पौराणिक मान्यता है कि इस मंदिर में विराजमान मां की प्रतिमा राजा इक्ष्वाकु के समय की है . तब से लेकर आज तक इस प्राचीन मंदिर में अपनी मुरादों को पूरी करने के लिए भक्तों की कतारें लगती हैं और इसी कड़ी में इस वर्ष भी शारदीय नवरात्र के मौके पर मां भक्तों की लंबी कतार मंदिर परिसर के बाहर देखने को मिल रही है जहां सुबह शाम मां के जयकारे गूँज रहे हैं .