
IAS Dr Anil Kumar Pathak
फैजाबाद . आमतौर पर एक कुशल प्रशासनिक अधिकारी के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले फैजाबाद के वर्तमान जिलाधिकारी डॉ अनिल कुमार पाठक एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति हैं इस बात का अंदाजा शहर के लोगों को तब हुआ जब शनिवार को आईएएस अधिकारी डाॅ0 अनिल कुमार पाठक की स्वयं प्रकाशित पुस्तक ‘पारस-बेला‘ का लोकापर्ण करते हुये प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि पुस्तिका में अंकित कवितायें हमारे ग्रामीण आंचल का स्पर्श करते हुए हमे अपने माता-पिता व गुरूजन की महत्ता को बतलाती हैं, उन्होनें कहा कि हमारे सबसे प्रचीनतम् ग्रन्थ ऋगवेद की रचना से अब तक हर साहित्य चाहे किसी भी भाषा में लिखा गया हो, में माता-पिता व गुरूजन को सबसे ऊंचा स्थान दिया गया है. उन्होेने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति त्याग की शिक्षा देती है, यह धरती धन्य है अयोध्या से भगवान राम ने सत्ता का तनिक भी लोभ न करते हुये पिता के बिना कहे हुए उनके वचनो का मान रखने के लिये 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया. वहीं भरत ने उनकी खड़ांऊ रखकर राज्य का संचालन करते हुये 14 वर्ष तपस्या की. इसी धरती से उत्पन्न श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता की अनूठी भक्ति एवं सेवा की मिसाल पेश की है. उन्होने कहा कि इसी भावना के धनी कवि डाॅ0 अनिल कुमार पाठक ने अपने माता-पिता को समर्पित काव्य रचना की है. जो हिन्दी युग की अद्वितीय रचना है, यदि आज की पीढ़ी इससे शिक्षा एवं सन्देश लेकर अपने माता-पिता व गुरूजन को सेवा भक्ति अपर्ण करती है तो निश्चित रूप से सफल काव्य रचना होगी. उन्होनें आगे कहा कि माता-पिता के प्रति कृतज्ञ होने की अनुशंसा इस पारस-बेला के हर पन्ने पर बिखरी हुई है. इससे आज की पीढ़ी को सन्देश जाता है कि अपना सर्वश न्योछावर करने वाले माता-पिता को कभी भूलना नहीं चाहिए.
फैजाबाद के जिलाधिकारी हैं डॉ अनिल कुमार पाठक अवधि भाषा में लिखा काव्य संग्रह
समारोह के विशिष्ठ अतिथि सुप्रसिद्ध समालोचक डाॅ0 सूर्य प्रसाद दीक्षित ने अपने उद्बोधन में कहा कि माता-पिता के लिये यदि घर में कोई स्थान नही है तो वृद्धा आश्रम में संतान द्वारा पैसा भेजने का कोई औचित्य नही है. ऐसी संतान माता-पिता का कृतज्ञ नही हो सकती, उन्होने कहा कि जिस पिता ने संतान को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, माता ने अपना वात्सल्य प्रेम न्योछावर किया, उसी से हम दूर भाग रहे हैं,उन्होने कवि डाॅ0 अनिल कुमार पाठक को साधुवाद देते हुये कहा कि जिस मानवीयता को हम खोते जा रहे है पारस-बेला उसकी ओर लौटने का एक उपक्रम है. आज की पीढ़ी को पारस-बेला से सीख लेनी चाहिए और अपने माता-पिता व गुरूजन को उचित स्थान व सम्मान देना चाहिए. उन्होने आगे कहा कि यह रचना लेखक के पिता स्व0 श्री पारसनाथ तिवारी ‘प्रसून‘ और माता स्व0 बेला देवी को समर्पित है. माता-पिता व गुरू के प्रति कृतज्ञता ही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है. पुस्तिका प्रकाशक प्रभात कुमार ने कहा कि भारत से ओल्ड एज होम समाप्त हो और हम भारतीय अपने माता-पिता की सेवा करें यही इस रचना का मूल्य उद्देश्य है. उन्होने कहा कि इस पुस्तक में पाठक जी ने अपने माता-पिता का पून्य स्मरण करते हुये उनसे उरिन होने का एक प्रयास किया है जबकि कोई उरिन नही हो सकता. लेखक ने आज के पीढ़ी को सन्देश दिया है कि अपना सर्वश संतान पर नेछावर करने वाले मां-बाप को भूले नही, उनकी सेवा करें, उनके पास बैठे, उनसे बातें करे और उनके साथी बने.
इन वरिष्ठ अतिथियों ने की कार्यक्रम में शिरकत
पारस-बेला के रचनाकार डाॅ0 अनिल कुमार पाठक ने कविता के माध्यम से पिता के अन्तिम क्षण में प्रकृति के साथ संवाद, गेहूँ की बाली, चने की फली, आम के पेड़ों की डाल, गाय एवं बछिया के आपसी बातचीत का विलक्षण एवं हृदय स्पर्श करने वाली कविता को भरे मन से पाठ किया. कविता के माध्यम से माता-पिता के जीवन चर्चा के साथ उनके प्रकृति, खेत-खलियान, गाय एवं उसकी बछिया के प्रति वात्सल्य का वर्णन किया है.समारोह का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार यतीन्द्र मोहन मिश्र ने किया, एल0पी0 पाण्डेय ने सभी को धन्यवाद दिया, समारोह का शुभारम्भ राष्ट्रगीत वन्देमातरम्...... व समापन राष्ट्रगान जन-गण-मन..... के साथ हुआ. समारोह में डा0 राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 डा0 मनोज दीक्षित, नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति अख्तर हसीब, फैजाबाद मण्डल फैजाबाद के आयुक्त मनोज मिश्र, आई0जी0 श्री विजय प्रकाश, एस0एस0पी0 सुभाष सिंह बघेल, सी0डी0ओ0 रवीश गुप्ता, ए0डी0एम0 सिटी विन्ध्यवासिनी राय, ए0डी0एम0 एफ0आर0 मदन चन्द दूबे, परियोजना निदेशक ए0के0 मिश्र, डी0डी0ओ0 हवलदार सिंह, बी0एस0ए0 श्रीमती अनिता सिंह आदि उपस्थित थे.
Published on:
25 Nov 2017 05:26 pm
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