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गणतंत्र दिवस पर विशेष : फैजाबाद जेल में आज़ादी के तराने गाते हुए काकोरी काण्ड के नायक अशफ़ाक ने चूमा था फांसी का फंदा

Shaheed गोंडा जेल में राजेंद्र लाहिड़ी और गोरखपुर में राम प्रसाद बिस्मिल ने मुस्कुराते हुए चूमा फांसी का फंदा

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Kakori Kand Revolutionary Shaheed Ahfaq Ulla Khan News On Republic Day

Faizabad Jail

फैजाबाद . भारतीय गणतंत्र के वर्षगांठ के मौके पर आगामी 26 जनवरी को पूरे देश में जश्न का माहौल होगा और देश की आजादी में अपने प्राणों की आहुति देने वाले उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद किया जाएगा जिन्होंने देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी . ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ देश को आजाद कराने के लिए बगावत का बिगुल फूंकने वाले अनगिनत ऐसे देशभक्त थे जिन्होंने अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन किया और कहीं शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जताकर तो कहीं हाथों में हथियार उठा कर बर्तानिया हुकूमत के खिलाफ बगावत की ज्वाला भड़काई . ऐसे ही आजादी के दीवानों में नाम आता है अशफाक उल्ला खान ,रामप्रसाद बिस्मिल और राजेंद्र नाथ लाहिड़ी का . जिन्होंने देश को आजादी दिलाने के लिए चलाए जा रहे आंदोलन में क्रांतिकारियों को आर्थिक मदद देने के लिए लखनऊ के काकोरी में लखनऊ सहारनपुर पैसेंजर ट्रेन को रोककर उसमें रखें सरकारी खजाने को लूट लिया था .

गोंडा जेल में राजेंद्र लाहिड़ी और गोरखपुर में राम प्रसाद बिस्मिल ने मुस्कुराते हुए चूमा फांसी का फंदा

9 अगस्त सन 1924 को लखनऊ जिले के काकोरी रेलवे स्टेशन से सहारनपुर के लिए रवाना हुई पैसेंजर ट्रेन को इन क्रांतिकारियों के समूह ने पहले रोका और उसके बाद पूरी ट्रेन पर धावा बोलकर सरकारी खजाने को लूट लिया . इस मामले में ब्रिटिश हुकूमत ने दुनिया की सबसे तेज तर्रार पुलिस स्कॉटलैंड यार्ड द्वारा मामले की जांच करवा कर इस घटना को अंजाम देने में शामिल क्रांतिकारियों को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ मुकदमा चलाए .इस पूरी घटना में मुख्य आरोपी बनाए गए रामप्रसाद बिस्मिल राजेंद्र लाहिड़ी और अशफाक उल्ला खान को फांसी की सजा हुई और 19 दिसंबर 1927 को राम प्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर जेल में राजेंद्र लाहिड़ी को गोंडा जेल में और अशफाक उल्ला खान को फैजाबाद की जेल में फांसी पर लटका दिया गया .

ज़िन्दगी के आखिरी लम्हों में लबों पर तैरते रहे आज़ादी के तराने आज भी फैजाबाद जेल में मौजूद हैं क्रांतिकारियों के निशां

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जनपद के रहने वाले थे इनकी शहादत पर पूरा देश रोया लेकिन फांसी से कुछ देर पहले भी जीवन के अंतिम लम्हों में इन महान देशभक्तों के चेहरे पर मुस्कुराहट थी और देश की आजादी के लिए चल रहे हवन में इन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी .आज भी हर 19 दिसंबर को फैजाबाद जेल परिसर में स्थित शहीद अशफाक उल्ला खां शहादत स्थल पर कार्यक्रम का आयोजन होता है . जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों राजनेताओं और शहर की आम जनता द्वारा अमर शहीद अशफाक उल्ला खां को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है और उनके शौर्य की गाथा गाई जाती है . नवाबी अंदाज के लिए मशहूर किसी जमाने में अवध की राजधानी कहीं जाने वाले फैजाबाद में आजादी के महासंग्राम में अपनी भूमिका निभाने वालों में अयोध्या के साधु संत भी थे जिन्होंने भगवान की सेवा के अलावा देश की आजादी के लिए हो रहे आंदोलन में शामिल होने के लिए अपने भक्तों को और धर्म अनुरागी जनता को प्रोत्साहित किया . लेकिन फैजाबाद जेल परिसर की दीवारों में आज भी इन्कलाब जिंदाबाद के नारों की आवाज़ लोग महसूस करते हैं ..