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मातृवेदी बागियों की अमर गाथा याद दिलाएगी चम्बल के बीहड़ों में गूजने वाली इन्कलाब की आवाज़

मातृवेदी भारत के सबसे बड़े गुप्त दल का क्रांतिकारी संगठन था जो स्वतंत्रता संघर्ष के दिनों में चंबल क्षेत्र में सक्रिय था

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फैजाबाद (अयोध्या) अयोध्या के कामता प्रसाद सुंदरलाल साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिसर में साकेत महाविद्यालय के पूर्व छात्र रहे प्रसिद्ध संस्कृतिकर्मी शाह आलम की प्रकाशित शोध पुस्तक मातृवेदी बागियों की अमर गाथा पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया ,अपनी पुस्तक के बारे में जानकारी देते हुए शाह आलम ने बताया कि मातृवेदी भारत के सबसे बड़े गुप्त दल का क्रांतिकारी संगठन था जो स्वतंत्रता संघर्ष के दिनों में चंबल क्षेत्र में सक्रिय था , मातृवेदी की सेंट्रल कमेटी में 30 चंबल के बागी और 10 क्रांतिकारी शामिल थे साथ ही 500 घुड़सवार 2000 की पैदल सेना में 80 लाख से अधिक संपत्ति संगठन के कोष में थी . इसका सैन्य विभाग कार्यालय जालौन जिले के कोंच प्रांत में था ,प्रांत के 40 जिलों में 4000 से अधिक सदस्यों का जाल बिछाया गया था जो आजादी के लिए दिन रात काम कर रहे थे .उस क्रांतिकारी संगठन की वीरता की कहानी इस किताब में लिखी गयी है

मातृवेदी भारत के सबसे बड़े गुप्त दल का क्रांतिकारी संगठन था जो स्वतंत्रता संघर्ष के दिनों में चंबल क्षेत्र में सक्रिय था

इस परिचर्चा के दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ प्रदीप खरे ने कहा कि साकेत महाविद्यालय के लिए गर्व की बात है कि शाह आलम महाविद्यालय के पुरातन छात्र हैं उनके इस लेख के लिए मैं और महाविद्यालय के शिक्षक इन्हें शुभकामनाएं देते हैं, परिचर्चा में मौजूद डॉ अनुराग मिश्र ने कहा कि यह बेहद अफसोस की बात है कि आजादी के बाद के दिनों में क्रांति की इस ऐतिहासिक धरोहर को भुला दिया गया, वास्तव में यह किताब चंबल क्षेत्र के ऐतिहासिक अनुभव और उसके समकालीन बोध की अवधारणा को नए सिरे से प्रश्नांकित करती है . विश्वविद्यालय कार्यपरिषद के सदस्य ओम प्रकाश सिंह ने इसे क्रांति की दूसरी परंपरा की खोज बताया उन्होंने कहा कि लेखक ने अपनी कृति के माध्यम से इतिहास लेखन को पुनर्जन्म प्रदान किया है जो एक सराहनीय पहल है . महाविद्यालय के मुख्या नियंता एस पी सिंह ने कहा कि साम्राज्यवाद के विरुद्ध चले संघर्ष को समग्रता में प्रस्तुत करने की जरूरत है . कार्यक्रम का संचालन श्रेया गुप्ता ने किया ,इस मौके पर डॉ अजय मोहन श्रीवास्तव ,डॉ आशुतोष सिंह ,डॉ ओमप्रकाश यादव ,राकेश पांडे ,अनूप कुमार सिन्हा ,डॉ नीता पांडे,डॉ उपमा वर्मा सहित अन्य प्राध्यापक और कर्मचारी मौजूद रहे