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हजरत इमाम हुसैन के शहीद भतीजे जनाबे कासिम की याद में उठा मेंहदी का जुलूस

किसी जमाने में नवाबों का शहर कहे जाने वाले फैजाबाद में गमगीन माहौल में मनाया जा रहा मुहर्रम

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Muharram mehandi Ka julus orgnized In Faizabad

Muharram Faizabad


किसी जमाने में नवाबों का शहर कहे जाने वाले फैजाबाद में गमगीन माहौल में मनाया जा रहा मुहर्रम: अयोध्या और फैजाबाद शहर में कर्बला मैं हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम सहित 72 शहीदों की शहादत का गम पूरी अकीदत के साथ गमगीन माहौल में मनाया जा रहा है। इस बीच सातवीं मोहर्रम की कल देर शाम फैजाबाद शहर के ऐतिहासिक स्थल मकबरा बहू बेगम से शाही मेहंदी का जलूस अपनी पुरानी परंपरा और शान शौकत के साथ निकाला गया। जिसमें शहर की प्रमुख अंजुमनों ने शिरकत कर नोहा मातम के साथ सीनाजनी की। जुलूस में लगभग 40 फुट लंबी और 20 फुट ऊंची मेहंदी का ताजिया शामिल था,जिसकी हजारों लोगों ने जियारत किया। यह मेहंदी का जुलूस कर्बला में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के भतीजे जनाबे कासिम की शहादत की याद में उठाई जाती है । जिसकी स्थापना नवाबीने अवध ने की थी। यह जलूस विगत लगभग 200 वर्षों से अधिक वर्षों से उठाया जा रहा है। फैजाबाद और अयोध्या शहर में कर्बला मैं हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम सहित 72 शहीदों की शहादत की याद में निकलने वाला यह जुलुस गंगा-जमुनी तहजीब की एक मिसाल भी हमेशा ही बना रहा और उनकी शहादत हमें सब्र और भाई-चारे का सन्देश देता है |जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम थे।

किसी जमाने में नवाबों का शहर कहे जाने वाले फैजाबाद में गमगीन माहौल में मनाया जा रहा मुहर्रम

जुलूस में शहर की प्रमुख अंजुमनों ने शिरकत कर नोहा मातम के साथ सीनाजनी की। इस दौरान अंजुमनों ने जनाबे कासिम की शहादत को नौहों में बयान किया जिसे सुनकर अजादारों की आंखों से अश्कों का सैलाब उमड़ पड़ा। जुलूस में लगभग 40 फुट लंबी और 20 फुट ऊंची मेहंदी का ताजिया शामिल था। जिसकी हजारों लोगों ने जियारत किया। यह मेहंदी का जुलूस कर्बला में शहीद हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के 13 वर्ष के भतीजे जनाबे कासिम की याद में उठाया जाता है। जिसकी स्थापना नवाबीन-ए-अवध ने की थी। बताया गया कि यह जलूस विगत लगभग 200 वर्षों से उठाया जा रहा है। जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम थे। विगत दो वर्षों तक यह जुलूस दुर्गापूजा व दशहरा पर्व के मद्देनजर दिन के समय उठाया गया था। जबकि इस वर्ष अपने परम्परागत समय से निर्धारित मार्गों फतेहगंज, बजाजा, घंटाघर चौक होते हुआ इमामबाड़ा जवाहर अली खां में पहुंचकर सम्पन्न हुआ।