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ओड़िशा दिवस पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन का गवाह बना अवध विश्वविद्यालय

बैले, रामायण, ओड़िसी नृत्य एवं गजाम जिले की प्रचलित लोक नृत्य शैलियों की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों का मनमोह लिया

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Odisa Divas 2018 Celebrated In Dr Ram Manohar Lohia Awadh University

Odisa Divas 2018 Celebrated In Dr Ram Manohar Lohia Awadh University

फैजाबाद : फैजाबाद का डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय का संत कबीर सभागार एक भव्य आयोजन का गवाह बना . अयोध्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग उप्र एवं ओड़िया समाज लखनऊ की ओर से ओड़िशा दिवस पर बैले गजाम एवं रामायण कार्यक्रम की भव्य प्रस्तुति दी गयी .जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में दर्शक सभागार में मौजूद रहे . कार्यक्रम में मौजूद मुख्य अतिथि नगर निगम अयोध्या के महापौर ऋषिकेश उपाध्याय ने कहा कि राष्ट्र का विकास एवं उसकी सामाजिक पहचान उसकी सांस्कृतिक परम्पराओं से होती है. उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र अपनी सांस्कृतिक परम्पराओं को नहीं संजो पाते उनकी पहचान खत्म हो जाती है. इस मौके पर पद्मश्री रामली इब्राहिम के कुशल निर्देशन में बैले, रामायण, ओड़िसी नृत्य एवं गजाम जिले की प्रचलित लोक नृत्य शैलियों की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों का मनमोह लिया . सांस्कृतिक संध्या का शुभारम्भ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्‍जवलन के साथ किया गया .अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ एवं अंगवस्त्रम भेंटकर किया गया। कार्यक्रम का संचालन अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह ने किया .

पद्मश्री रामली इब्राहिम के कुशल निर्देशन में बैले, रामायण, ओड़िसी नृत्य एवं गजाम जिले की प्रचलित लोक नृत्य शैलियों की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों का मनमोह लिया

इस भव्य कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्त ने कहा कि भारत की गौरवशाली परम्परा को विकसित करना ही हमारा परम ध्येय है. प्रदेश के तीन स्थानों लखनऊ, गोरखपुर एवं फैजाबाद में आयोजित पद्मश्री रामली इब्राहिम के कार्यक्रमों का आयोजन यह सिद्घ करता है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भारतीय संस्कृति के उत्थान के लिए काफी गंभीर है. अवध विवि के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि भारत में लोक-कलाओं को बहुत सम्मान दृष्टि से देखा जाता है .अन्तरराष्ट्रीय पटल पर यह हमारी सामाजिक समृद्घि का द्योतक है.उन्होंने कहा कि लोक-कलाएं सामाजिक व्यवस्था को आपस में जोड़ती है. कुलपति प्रो. दीक्षित ने ओड़िशा दिवस पर चर्चा करते हुए बताया कि इसका शुभारम्भ एक अप्रैल 1936 से प्रारम्भ हुआ. इसी दिन ओड़िशा को स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापित किया गया और एक अप्रैल को ओड़िशा दिवस के रूप में मनाया जाता है .उन्होंने बताया कि पद्मश्री रामली मलेशिया में रहते हुए लगभग 40 वषों से लगातार भारतीय लोक-कलाओं के संवाहक बने हुए हैं. उनके द्वारा ओड़िसी शास्त्रीय शैली, गोटी पुट की लोक शैली का भी व्यापक संचालन कर रहे है .