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शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को जरुर अर्पित करें ये चीज, मिलेगा मनचाहा वरदान

शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को जरुर अर्पित करें ये चीज, मिलेगा मनचाहा वरदान

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भोपाल

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Tanvi Sharma

Feb 05, 2020

शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को जरुर अर्पित करें ये चीज, मिलेगा मनचाहा वरदान

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भोलेनाथ अपने नाम की तरह ही बहुत भोले हैं, इसलिये कहा जाता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करना बहुत आसान होता है। इसलिये सावन के महीने में या फिर शिवरात्रि के मौके पर भगवान शिव को मनाने की कोशिश की जाती है। विधि-विधान से पूजा कर भगवान को प्रसन्न किया जाता है और उनसे मनोकामना पूरी करने का आशीर्वाद लिया जाता है।

लेकिन आपको बता दें की भगवान शिव जितनी जल्दी प्रसन्न होते हैं, वैसे ही अगर उन्हें गुस्सा आ जाए तो व्यक्ति का सर्वनाश भी कर देते हैं। इसलिये भगवान शिव की पूजा में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिये।

शिव जी को बेलपत्र, धतूरा और एक लोट जल से भी खुश किया जा सकता है। वहीं महाशिवरात्रि का पावन दिन भी आने वाला है। इस बार 21 फरवरी 2020, शुक्रवार के दिन महाशिवरात्रि पड़ रही है। इस दिन भगवा शिव को प्रसन्न करने के लिये पूजा की जाएगी, लेकिन आइए जानते हैं भगवान शिव की पूजा में किन चीजों का विशेष महत्व है। आइए जानते हैं कौन सी हैं वो चीजें....

आयुर्वेद में भांग और धतूरा का इस्तेमाल औषधि के रूप में होता है। शास्त्रों में तो बेल के तीन पत्तों को रज, सत्व और तमोगुण का प्रतीक माना गया है साथ ही यह ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना गया है। इसके अलावा भगवान शिव को भांग और धतूरे का इस्तेमाल भी किया जाता है। इसलिए महाशिवरात्रि की पूजा में भगवान शिव को भांग, धतूरा और बेलपत्र जरुर चढ़ाएं। क्योंकि इसके पीछे भी एक कथा है, आइए जानते हैं वो कथा

शिव महापुराण में भगवान शिव को नीलकंठ कहा गया है क्योंकि सागर मंथन के समय भगवान भोलेनाथ ने सागर मंथन से उत्पन्न हालाहल विष को पीकर सृष्टि को तबाह होने से बचाया था। लेकिन विष पीने के बाद इसके प्रभाव से भगवान शिव का गला नीला पड़ गया क्योंकि इन्होंने विष को अपने गले से नीचे नहीं उतरने दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि विष भगवान शिव के मस्तिष्क पर चढ गया और भोलेनाथ अचेत हो गए। ऐसी स्थिति में देवताओं के सामने भगवान शिव को होश में लाना एक बड़ी चुनौती बन गई। देवी भाग्वत् पुराण में बताया गया है कि इस स्थिति में आदि शक्ति प्रकट हुई और भगवान शिव का उपचार करने के लिए जड़ी बूटियों और जल से शिव जी का उपचार करने के लिए कहा।

भगवान शिव के सिर से हालाहल की गर्मी को दूर करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव के सिर पर धतूरा, भांग रखा और निरंतर जलाभिषेक किया। इससे शिव जी के सिर से विष का दूर हो गया। इस समय से ही भगवान शिव को धतूरा, भांग और जल चढ़ाया जाने लगा।