GST Tax rate 40 लाख तक को टैक्स नहीं, वित्त मंत्रालय ने Arun Jaitley को Death Anniversary पर किया याद

  • GST की वजह से Taxpayer Base का आधार दोगुना होकर 1.24 करोड़ पर पहुंचा
  • 40 लाख तक के कारोबार वाली कंपनियों को मिलती है GST की छूट, पहले थी 20 लाख

By: Saurabh Sharma

Updated: 24 Aug 2020, 04:54 PM IST

नई दिल्ली। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की पुण्यतिथि ( Arun Jaitley Death Anniversary ) पर वित्त मंत्रालय ( Finance Ministry ) की ओर से जीएसटी ( GST ) को लेकर काफी जानकारियों के साथ कई ट्वीट किए हैं। जिनके अनुसार पता चला है कि जीएसटी के लागू होने से टैक्सपेयर्स ( Taxpayers ) का आधार सवा करोड़ हो गया है। वहीं पहले जो छूट 20 लाख तक का कारोबार करने वालों को मिलती थी, अब वो बढ़कर 40 लाख हो गई है। वहीं इस दौरान कई सामानों को काफी सस्ता कर दिया गया है। आपको बता इें कि एक जुलाई 2017 को जीएसटी की घोषणा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने खुद की थी। यह इस दशक का सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म ( Tax Reform ) माना गया है। आइए आपको भी बताते हैं कि जीएसटी को लेकर किस तरह के ट्वीट किए गए हैं।

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बढ़ा टैक्सपेयर्स का आधार
वित्त मंत्रालय की ओर ट्वीट के अनुसार देश में सभी को समझ में आ गया है कि जीएसटी कंज्यूमर और टैक्सपेयर्स दोनों के लिए फायदेमंद है। जीएसटी लागू होने से पहले लोगों को टैक्स की बढ़ी हुई दरों के कारण लोगों को काफी परेशानी होती थी। जीएसटी लागू होने के कारण दरें कम हुई हैं और टैक्स देने की प्रथा में तेजी देखने को मिली है। मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जिस समय जीएसटी लागू हुआ था तब टैक्सपेयर्स की संख्या 65 लाख थी, जो अब बढ़कर 1.24 करोड़ पर आ गई है।

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40 लाख पर मिलती है छूट
फाइनेंस मिनिस्ट्री के अनुसार जीएसटी की वजह से भारी दरें अब काफी कम हो गई हैं। आरएनआर समिति की माने तो राजस्व तटस्थ दर 15.3 फीसदी है। इसके अलावा रिजर्व बैंक का जीएसटी की भारित दर सिर्फ 11.6 फीसदी है। ट्वीट के अनुसार 40 लाख रुपए तक के कारोबार करने वाली कंपनियों को जीएसटी की छूट दी जाती है, जिस शुरुआती दौर में 20 लाख रुपए रखा गया था। वहीं डेढ़ करोड़ रुपए तक के कारोबार वाली कंपनियां कंपोजिशन योजना का ऑप्शन ऑप्ट कर सकती है, जिन्हें एक फीसदी कर देना होता है।

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2017 में लागू हुआ था जीएसटी
जीएसटी में 17 स्थानीय शुल्कों को समाहित किया गया है। जीएसटी 1 जुलाई, 2017 को लागू हुआ थाा। नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में अरुण जेटली उस समय वित्त मंत्री थे। मंत्रालय की ओर किए ट्वीट के अनुसार आज हम अरुण जेटली को याद कर रहे हैं। जीएसटी के क्रियान्वयन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इतिहास में इसे भारतीय कराधान का सबसे बुनियादी ऐतिहासिक सुधार गिना जाएगा।

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