
इष्टमित्रों से की मुलाकात डमरूघाटी में किया पूजन, अर्चन
गाडरवारा। हिंदी फिल्मों में अभिनय से नगर का गौरव मान बढ़ाने वाले तथा सिने जगत में अपनी अलग छाप छोडऩे वाले सिने कलाकार आशुतोष राणा का सोमवार को एक दिवसीय प्रवास पर ग़हनगर आगमन हुआ। इस दौरान उन्होंने अपने इष्ट मित्रों के साथ भेंटवार्ता की। इसी दौरान उन्होंने बताया कि हमारे अभिनय की शुरुआत वर्षों पहले होने वाली नगर में रामलीला से हुई जिसमें हम छोटे, मोटे किरदार निभाया करते थे। हायर सेकेंडरी तक हमारी शिक्षा गाडरवारा में हुई। जिसके बाद उच्च शिक्षा के लिए सागर विश्वविद्यालय से पूर्ण की। इस बीच हमारे गुरुदेव पंडित देव प्रभाकर जी शास्त्री का सानिध्य मिला। और उनका आदेश हुआ कि दिल्ली जाकर एनएसडी कोर्स करें, जो मैंने किया भी। फिर उनका आदेश हुआ कि अब कला के क्षेत्र में प्रवेश करो, और मैं 1994 में मुंबई गया। यहां दुश्मन, संघर्ष आदि फिल्मों ने मुझे पहचान दी। अनेकों फिल्में अलग.अलग किरदार में अभिनीत की गईं। जिन्हें दर्शकों ने सराहा तथा प्रेम दिया। मेरी उपलब्धि के पीछे मेरे गुरुदेव परम पूज्य पंडित देव प्रभाकर शास्त्री का आशीर्वाद है जो सदैव बना रहेगा। आगामी दिनों में मेरी पांच फिल्में जिनमें तीन फिल्में बड़े बजट की है जो रिलीज होने को है। अपने नगर से सदैव बड़ा प्यार मिलता है, जो मुझे भी स्मरणीय बना रहता है। साहित्य की रुचि प्रेरणा बचपन से रही जिसे मैं लेखन के माध्यम से साहित्य प्रेमियों तक पहुंचाने का काम कर रहा हूं और सराहना भी मिल रही है। मौन मुस्कान की मार के बाद रामराज्य पुस्तक पूरी होने को है जिसका विमोचन रामनवमी पर किया जाएगा। राणा ने बताया कि वह आज जो भी हैं अपने गुरु की कृपा की बदौलत हैं। दिन भर की गतिविधियों के साथ ही आशुतोष राणा नगर के शिवधाम डमरूघाटी पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा अर्चना की। जिसके उपरांत वह गुरुदेव पंडित देव शास्त्री से मिलने कटनी रवाना हुए। इस दौरान नवनीत मल्होत्रा, नवनीत पलोड़, कीर्ति राज लूनावत, संजय मानसाता, आलोक भारद्वाज, आलोक जैन, राजेश नीरस, अब्दुल फिरोज खान, अशोक विश्वकर्मा, संदीप पलोड़, जिनेश जैन, कपिल साहू, मकसूद खान, बबलू गुप्ता आदि मौजूद रहे।
Published on:
11 Feb 2020 05:06 pm

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