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मेसी के पैर का 8,000 Cr का इंश्योरेंस: ये भारतीय भी लिस्ट में, क्या आम आदमी भी ले सकता है यह बीमा?

Celebs Body Part Insurance Explainer : मेसी के पैर की इंश्योरेंस राशि करीब 8 हजार करोड़ की बताई जा रही है। इस लिस्ट में देखिए अन्य विदेशी व भारतीय सेलेब्स के नाम।
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भारत

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Ravi Gupta

Jul 22, 2026

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Celebs Body Part Insurance | प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- Claude AI

Celebs Body Part Insurance : खेल का मैदान हो या सिनेमा का पर्दा, किसी भी खिलाड़ी या स्टार की सबसे बड़ी संपत्ति उसकी प्रतिभा के साथ-साथ उसका शरीर होता है। जैसे फुटबॉल के जादूगर लियोनेल मेसी की जादुई बाईं टांग, ये केवल गोल नहीं करती, बल्कि अरबों रुपये के व्यापार और करोड़ों प्रशंसकों की उम्मीदों को भी चलाती है।

यही कारण है कि लियोनेल मेसी के बाएं पैर का बीमा लगभग 8,000 करोड़ रुपये ($900 Million) में किया गया है, जिसे कई रिपोर्ट्स में €750 मिलियन (करीब $880 मिलियन) भी बताया जाता है। राशि को लेकर स्रोतों में मामूली अंतर है, लेकिन यह खेल जगत की अब तक की सबसे मूल्यवान बॉडी पार्ट इंश्योरेंस पॉलिसी मानी जाती है।

लेकिन मेसी अकेले नहीं हैं।

वैश्विक स्तर पर क्रिस्टियानो रोनाल्डो, डेविड बेकहम और गैरेथ बेल से लेकर भारत के दिग्गज खिलाड़ियों और बॉलीवुड सितारों तक - सबने अपने करियर और पहचान को सुरक्षित करने के लिए अपने शरीर के खास अंगों का बीमा करवाया है।

विदेशी खिलाड़ी और इंश्योर्ड अमाउंट

बेकहम की पॉलिसी की कहानी दिलचस्प है

2003 में उनकी टांगों का बीमा शुरुआत में $70 मिलियन का था, लेकिन 2006 में रियल मैड्रिड में रहते हुए उन्होंने Lloyd's of London के साथ £100 मिलियन (करीब $195 मिलियन) की बड़ी पॉलिसी ली, जिसमें उनका पूरा शरीर और चेहरा भी कवर था।

उस दौर में इसे खेल इतिहास की सबसे बड़ी पर्सनल इंश्योरेंस पॉलिसी कहा गया था।

खेल की दुनिया के बाहर भी बड़े नाम इस लिस्ट में शामिल हैं। NFL स्टार टॉम ब्रैडी की थ्रोइंग आर्म करीब $100 मिलियन में बीमित है, तो बास्केटबॉल के दिग्गज लेब्रॉन जेम्स का पूरा शरीर भी लगभग $100 मिलियन की पॉलिसी से कवर है।

सिंगर मारिया कैरी ने अपनी आवाज़ और पैरों का बीमा करीब $70 मिलियन में करवाया, वहीं अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स ने अपनी मशहूर मुस्कान का बीमा $30 मिलियन में कराया है।

क्या सेलेब्स इसके लिए भारी प्रीमियम भरते हैं?

एक आम धारणा यह है कि कंपनियों के साथ ब्रांड सौदों में इंश्योरेंस फ्री मिलता है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। सेलेब्रिटीज को इन पॉलिसियों को चालू रखने के लिए हर साल भारी प्रीमियम चुकाना पड़ता है, जो बीमित राशि के जोखिम स्तर के आधार पर तय होता है।

पेशेवर क्लब (जैसे पेरिस सेंट-जर्मेन या रियल मैड्रिड) या बड़े स्पॉन्सर अक्सर इस प्रीमियम का कुछ हिस्सा या पूरा खर्च वहन करते हैं।

उदाहरण के लिए, बेकहम की पॉलिसी में उनके क्लब और स्पॉन्सर शामिल थे, जबकि अलोंसो के अंगूठों की पॉलिसी बैंक सैंटेंडर के प्रचार अभियान का हिस्सा थी।

इन पॉलिसियों में सख्त शर्तें भी होती हैं। यदि कोई खिलाड़ी प्रतिबंधित या जोखिम भरे खेलों (जैसे स्कीइंग, स्काईडाइविंग) में बिना अनुमति भाग लेता है या अपनी जीवनशैली से खुद को नुकसान पहुंचाता है, तो बीमा दावा खारिज हो सकता है।

भारतीय सेलेब की बीमित स्थिति

भारत में बॉडी पार्ट इंश्योरेंस का चलन अभी भी विकासशील चरण में है। गोपनीयता और सुरक्षा कारणों से भारतीय हस्तियां और बीमा कंपनियां पॉलिसी की राशि का खुलासा नहीं करती हैं। नीचे दी गई सूची मीडिया में वर्षों से रिपोर्ट होती आ रही जानकारी पर आधारित है, इनमें से किसी भी पॉलिसी की राशि आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं की गई है।

क्या भारत में एक आम आदमी बॉडी पार्ट इंश्योरेंस ले सकता है?

भारत में बीमा से जुड़े सामान्य सिद्धांतों के अनुसार, बॉडी पार्ट इंश्योरेंस से जुड़े मानक नियम इस तरह समझे जा सकते हैं:

बीमा योग्य हित का सिद्धांत (Insurable Interest)

बीमा का मूल नियम है कि आपके पास उस अंग में प्रत्यक्ष आर्थिक हित होना चाहिए। एक आम क्लर्क या सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपने हाथों का अलग से 5 करोड़ का बीमा नहीं करा सकता, क्योंकि उनके हाथ में चोट लगने से उनकी पूरी आजीविका का नुकसान उस अनुपात में नहीं होता जो एक सर्जन या गिटार वादक का होता है। लेकिन यदि कोई आम आदमी पेशेवर सर्जन, शेफ, या पियानो वादक है, जिसकी आजीविका पूरी तरह से शरीर के किसी विशेष अंग पर टिकी है, तो वह कस्टमाइज्ड पॉलिसी का आवेदन कर सकता है।

क्लेम का सिद्धांत (Principle of Indemnity)

बीमा का उद्देश्य किसी नुकसान की भरपाई करना है, उससे लाभ कमाना नहीं। कोई भी विश्वसनीय कंपनी किसी आम व्यक्ति को ऐसी पॉलिसी नहीं देगी जिससे उसे अंग खोने पर अनुचित वित्तीय लाभ मिले।

आम आदमी के लिए उपलब्ध विकल्प?

भारतीय बाजार में आम नागरिकों के लिए सीधे बॉडी पार्ट इंश्योरेंस का रिटेल प्रोडक्ट नहीं बिकता। इसके बदले कंपनियां पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस और क्रिटिकल इलनेस कवर प्रदान करती हैं। इसमें दुर्घटना के कारण स्थायी विकलांगता होने पर पूर्व-निर्धारित शर्तों के आधार पर भुगतान किया जाता है।

एक सबसे लॉजिकल कारण यह है कि खास अंगों का इंश्योरेंस कराना काफी महंगा पड़ता है, जो आम आदमी के बजट में नहीं हो सकता।

भारत में भी सानिया मिर्जा और विजेंद्र सिंह जैसे एथलीटों ने अपने पेशेवर हथियारों यानी हाथों को सुरक्षित करने की परंपरा शुरू की। यद्यपि आम नागरिकों के लिए विशेष बॉडी पार्ट बीमा के बजाय स्टैंडर्ड पर्सनल एक्सीडेंट बीमा ही सबसे व्यावहारिक और कानूनी रूप से सुलभ माध्यम है, लेकिन जैसे-जैसे भारत में नीश करियर बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे इस क्षेत्र में नियमों के और अधिक लचीले होने की संभावनाएं बन रही हैं।