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Cyber Security Tips: क्या Play Store पर मिलने वाला हर ऐप सुरक्षित? एक क्लिक में फोन, पैसा और निजी डेटा खतरे में, जानें कैसे रहें सुरक्षित

Cyber Security Tips: साइबर अपराधी असली और लोकप्रिय ऐप्स की नकल करके फेक या मैलिशियस (Malicious) ऐप्स बनाते हैं, जो सिंगल क्लिक में आपका बैंक खाता खाली कर सकते हैं। निजी डेटा चुरा सकते हैं और फोन की जासूसी कर सकते हैं। आइए जानते हैं. किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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भारत

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Adarsh Thakur

Jul 22, 2026

Cyber Security Tips Cyber Alert Play Store

Cyber Security Tips: ऐप डाउनलोड करते वक्त रखें सावधानी। (Image: AI)

Cyber Security Tips: आज की डिजिटल दुनिया में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग से लेकर शॉपिंग, मनोरंजन और सोशल मीडिया तक, हर काम के लिए हम ऐप्स (Apps) पर निर्भर हैं। ज्यादातर एंड्रॉयड (Android) यूजर्स किसी भी नए ऐप को डाउनलोड करने के लिए गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) का रुख करते हैं। हमारे मन में यह धारणा होती है कि गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद हर ऐप पूरी तरह सुरक्षित और जांचा-परखा हुआ है।

क्या Play Store पर मिलने वाला हर ऐप सुरक्षित?

लेकिन क्या वाकई Play Store पर मिलने वाला हर ऐप सुरक्षित होता है? जवाब है- नहीं। तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था कितनी भी मजबूत क्यों न हो, साइबर अपराधी (Scammers) प्ले स्टोर की सुरक्षा दीवारों में सेंध लगाने का कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेते हैं। एक छोटी सी लापरवाही या गलत ऐप डाउनलोड करने का एक सिंगल क्लिक आपके बैंक अकाउंट को खाली कर सकता है, आपके निजी फोन कॉल्स, मैसेज, तस्वीरों और डेटा को चोरी कर सकता है। आइए समझते हैं इन ऐप्स को डाउनलोड करते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

गलत ऐप डाउनलोड करने के गंभीर खतरे

साइबर अपराधी असली और लोकप्रिय ऐप्स की हूबहू नकल करके 'फेक ऐप्स' (Fake Apps) या 'मैलिशियस ऐप्स' (Malicious Apps) तैयार करते हैं। जैसे ही आप इन्हें अपने फोन में इंस्टॉल करते हैं, ये पीछे से कई तरह की खतरनाक गतिविधियां शुरू कर देते हैं:

  1. वित्तीय नुकसान (Financial Loss): कई फेक ऐप्स आपके बैंकिंग पासवर्ड, यूपीआई पिन और क्रेडिट कार्ड डिटेल्स चुरा लेते हैं। कुछ ऐप्स बैकग्राउंड में प्रीमियम सब्सक्रिप्शन सर्विस चालू कर देते हैं, जिससे आपके खाते से अनजाने में पैसे कटते रहते हैं।
  2. निजी डेटा की चोरी (Data Theft): आपके कॉन्टैक्ट्स, पर्सनल फोटोज, वीडियोस और ईमेल एड्रेस साइबर अपराधियों के हाथों में पहुंच जाते हैं। इस डेटा को फिर डार्क वेब पर बेचा जाता है या ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
  3. फोन पर जासूसी (Spying and Tracking): कुछ मैलवेयर ऐप्स आपके फोन के माइक्रोफोन और कैमरे का कंट्रोल अपने हाथ में ले लेते हैं। इससे साइबर ठग आपकी बातें सुन सकते हैं और आपकी हर गतिविधि पर नजर रख सकते हैं।
  4. डिवाइस का स्लो होना या खराब होना: ये ऐप्स आपके फोन की बैटरी, रैम और इंटरनेट डेटा का बहुत तेजी से इस्तेमाल करते हैं, जिससे फोन गर्म होने लगता है और बहुत स्लो काम करने लगता है।

कैसे पहचानें सही और सुरक्षित ऐप?

  1. डेवलपर का नाम और डिटेल्स चेक करें (Check Developer Details) : जब भी आप कोई ऐप ढूंढें, तो ऐप के नाम के ठीक नीचे लिखे डेवलपर के नाम को ध्यान से पढ़ें। स्कैमर्स जाने-माने ब्रांड्स के नाम से मिलते-जुलते नाम इस्तेमाल करते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप किसी लोकप्रिय ऐप को डाउनलोड कर रहे हैं, तो स्पेलिंग में मामूली हेरफेर (जैसे 'WhatsApp' की जगह 'WhatsAp' या 'WatsApp') हो सकता है। हमेशा ऑफिशियल डेवलपर के नाम के आगे लगे 'Verified Badge' या 'Top Developer' टैग को जरूर देखें।
  2. ऐप की रेटिंग और रिव्यूज पढ़ें (Check Ratings and Reviews) : डाउनलोड करने से पहले ऐप के रिव्यू सेक्शन में जाएं। केवल स्टार रेटिंग (Star Rating) पर भरोसा न करें, क्योंकि स्कैमर्स बॉट्स के जरिए फर्जी 5-स्टार रेटिंग और रिव्यूज खरीद लेते हैं। नेगेटिव रिव्यूज पढ़ें: हमेशा '1-Star' या 'Critical' रिव्यूज को ध्यान से पढ़ें। अगर कई यूजर्स ने लिखा है कि ऐप काम नहीं कर रहा, पैसे कट गए या बहुत सारे विज्ञापन आ रहे हैं, तो उसे डाउनलोड न करें।रिव्यू की भाषा पर ध्यान दें: अगर सभी पॉजिटिव रिव्यूज में एक जैसी भाषा या सिर्फ 2-3 शब्द लिखे हैं, तो वे फर्जी हो सकते हैं।
  3. डाउनलोड्स की संख्या (Number of Downloads) : किसी भी आधिकारिक और लोकप्रिय ऐप के डाउनलोड्स की संख्या लाखों या करोड़ों में होती है। अगर आप कोई बैंकिंग या फेमस सोशल मीडिया ऐप डाउनलोड कर रहे हैं और उसके डाउनलोड सिर्फ कुछ हजार ही हैं, तो तुरंत समझ जाएं कि वह फर्जी ऐप है।
  4. ऐप की परमिशन (App Permissions) पर पैनी नजर रखें : ऐप इंस्टॉल करते वक्त या पहली बार खोलते वक्त वह आपसे कुछ परमिशन (अनुमतियां) मांगता है। यहीं पर सबसे बड़ा खेल होता है। अगर कोई साधारण कैलकुलेटर या वॉलपेपर ऐप आपसे आपके कॉन्टैक्ट्स, लोकेशन, एसएमएस (SMS) या कैमरे की परमिशन मांग रहा है, तो समझ जाएं कि दाल में कुछ काला है। एक फ्लैशलाइट या कैलकुलेटर ऐप को आपके SMS या कॉल्स की एक्सेस की कोई जरूरत नहीं होती। अनावश्यक परमिशन मांगने वाले ऐप को तुरंत डिलीट कर दें।
  5. ऐप डिस्क्रिप्शन की स्पेलिंग और ग्रामर (Description Quality): असली और प्रोफेशनल कंपनियां अपने ऐप के डिस्क्रिप्शन (विवरण) को बहुत ध्यान से लिखती हैं। फर्जी ऐप्स के डिस्क्रिप्शन में अक्सर स्पेलिंग की गलतियां, खराब ग्रामर और अजीब शब्द देखने को मिलते हैं।

स्कैमर्स से कैसे बचें और अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रखें?

  1. हमेशा 'Google Play Protect' को ऑन रखें: प्ले स्टोर की सेटिंग्स में जाकर 'Play Protect' फीचर को हमेशा एक्टिव रखें। यह फीचर आपके फोन में डाउनलोड होने वाले और पहले से मौजूद ऐप्स को लगातार स्कैन करता रहता है और किसी भी संदिग्ध ऐप की चेतावनी देता है।
  2. अनजान सोर्स (Third-Party Sources) से ऐप्स इंस्टॉल न करें: कभी भी किसी व्हाट्सएप मैसेज, टेलीग्राम लिंक, या अनजान वेबसाइट (APK Files) से ऐप डाउनलोड न करें। ऐप्स केवल गूगल प्ले स्टोर या फोन के ऑफिशियल ऐप स्टोर से ही लें।
  3. फोन के सॉफ्टवेयर को हमेशा अपडेट रखें: अपने फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और सुरक्षा पैच (Security Update) को हमेशा अपडेट रखें। अपडेट्स में पुरानी सुरक्षा खामियों को ठीक किया जाता है।
  4. 2-फैक्टर्स ऑथेंटिकेशन (2FA) का इस्तेमाल करें: अपने सभी जरूरी अकाउंट्स (जीमेल, सोशल मीडिया, बैंकिंग) पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू करें, ताकि अगर आपका पासवर्ड लीक भी हो जाए, तो भी कोई बिना ओटीपी के कोई लॉगिन न कर सके।

अगर गलती से फर्जी ऐप डाउनलोड हो जाए तो क्या करें?

  1. तुरंत इंटरनेट बंद करें: सबसे पहले फोन का मोबाइल डेटा और वाई-फाई बंद कर दें, ताकि ऐप आपके फोन का डेटा बाहर न भेज सके।
  2. ऐप को अनइंस्टॉल करें: फोन की 'Settings' > 'Apps' में जाकर उस ऐप का डाटा और कैश (Cache) क्लियर करें, परमिशन हटाएं और फिर उसे अनइंस्टॉल करें।
  3. पासवर्ड बदलें: अपने सभी अहम अकाउंट्स (खासकर बैंकिंग और ईमेल) के पासवर्ड तुरंत बदल दें।
  4. प्ले स्टोर पर रिपोर्ट करें: प्ले स्टोर पर उस ऐप के पेज पर जाकर 'Report as Inappropriate' पर क्लिक करें, ताकि गूगल उसे स्टोर से हटा सके।