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इस Govt अस्पताल में जीने नहीं मरने आते हैं लोग, एक युवक की मौत से खुला राज

भले ही मंत्री यह कहते हुए नहीं थकते कि उनकी सरकार ने स्वास्थ्य को लेकर कई काम किए हैं। रायपुर शहर से लगे गरियाबंद जिले में सामने आए एक दर्दभरी घटना ने मंत्री के तमान दावों की पोल खोल दी है

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Chandu Nirmalkar

Jul 15, 2017

Young man died in govt hospital

Young man died in govt hospital

गरियाबंद/देवभोग. छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है। भले ही मंत्री यह कहते हुए नहीं थकते कि उनकी सरकार ने स्वास्थ्य को लेकर कई काम किए हैं। रायपुर शहर से लगे गरियाबंद जिले में सामने आए एक दर्दभरी घटना ने मंत्री के तमान दावों की पोल खोल दी है। सरकारी अस्पताल में एक युवक 2 घंटे तक स्ट्रेचर पर पड़ा रहा। उसके मां, पिता और भाई,बहन उपचार करने को लेकर गुहार लगाते रहे। लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। आखिरकार बुजुर्ग पिता का जवान बेटे की स्ट्रेचर में ही तड़पकर मौत के आगोश में समा गया। यह मंजर देख लोगों की रूहं कांप गई।

पेशे से मोटर मैकेनिक 35 वर्षीय मोहन के सीने में शााम साढ़े 5 बजे दर्द उठा। परिजनों ने उसे आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया। छोटे भाई मदन के मुताबिक अस्पताल में दाखिल करने तक मोहन पूरे होश में था। भर्ती कराने के बाद मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने ग्लूकोज चढ़ाना भी शुरू कर दिया। लेकिन डॉक्टर नहीं होने से समय पर इलाज नहीं मिला और मोहन की संासें उखड गईं। लगभग सवा 6 बजे डॉक्टर अंजु सोनवानी पहुंचीं। चेकअप किया और मोहन को मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमॉर्टम करने गई थी महिला चिकित्सक

जिस वक्त मोहन को अस्पताल में भर्ती किया गया उससे 20 मिनट पहले अंजु सोनवानी पीएम करने मरच्यूरी गईं थीं। अमलीपदर थाना क्षेत्र के मुढगेलमाल निवासी 55 लक्ष्मी बाई ने आत्महत्या की थी। जिसकी बॉडी परीक्षण के लिए पहुंची थी। इससे पहले मोटरापरा में सर्पदंश के शिकार 22 वर्षीय विद्याधर ध्रुवा की बॉडी भी पीएम के लिए पहुंची थी। बीएमओ सत्येन्द्र मार्कडेंय और एक अन्य मेडिकल अफसर एसएस गुप्ता गरियाबंद में आयोजित टीबी रोग के प्रशिक्षण में थे।

परिजनों का रो- रो कर बुरा हाल

जवान बेटे की मौत के बाद मोहन के पिता और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वे बार-बार बेहोश हो रहे थे। इधर, चिकित्सक की कमी के चलते हुई मौत को लेकर परिसर में एकत्र ग्रामीणों में भी प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर आक्रोश देखा गया।

मंत्री का भरोसा भी काम न आया

मालूम हो कि 23 जून को सुपेबेड़ा मामले को लेकर जब सूबे के स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर देवभोग पहुंचे थे, उस समय चिकित्सकों की कमी के बारे में अवगत कराया था। स्वीकृत में से केवल 3 की पदस्थापना को लेकर स्वयं मंत्री हैरान थे। उन्होंने भरी सभा में कमी को जल्द दूर करने का भरोसा भी दिलाया था, पर उनको लौटे 21 दिन हो गए चिकित्सको की संख्या नहीं बढ़ाई जा सकी है।

जब मरीज के आने की सूचना मिली तो मंै मरच्यूरी में थी। लेकिन यहां आकर पता चला कि उसकी भर्ती से पहले ही सांस रुक गई थी। परिजनों ने बताया हार्ट में परेशानी थी। गुरुवार को ही रायपुर के अस्पताल से वापस लाया गया था। शनिवार को मोहन को उपचार के लिए परिजन बाहर ले जाने वाले थे।
अंंजू सोनवानी, चिकित्सक, देवभोग