मुरादनगर श्मशान हादसे के दो माह बाद भी योगी सरकार ने नहीं दी पीड़ित परिवारों को नौकरी

Highlights

- हादसे में 25 लोगों की मौत के बाद योगी सरकार ने की थी पीड़ित परिजनों को सरकारी नौकरी देने की घोषणा

- पीड़ित परिवार बोले- नौकरी नहीं मिली तो भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे

- अधिकारी बोले- सरकार के किए सभी वादे पूरे कराए जाएंगे

By: lokesh verma

Published: 03 Mar 2021, 11:52 AM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
गाजियाबाद. मुरादनगर में हुए दर्दनाक हादसे को दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक सरकार की घोषणा के बाद भी मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी नहीं मिल पाई है। जबकि पीड़ित परिवार तभी से नौकरी की सूचना मिलने की बाट जोह रहे हैं। पीड़ित लगातार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। जबकि प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि जो भी वादे उस वक्त सरकार ने किए थे, वह निश्चित तौर पर पूरे कराए जाएंगे।

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उल्लेखनीय है कि तीन जनवरी को सुबह संगम विहार कॉलोनी निवासी जयराम सिंह की अंत्येष्टि के दौरान अचानक बारिश होने से श्मशान घाट की गैलरी का लेंटर के नीचे खड़े लोगों पर गिर गया था। इसी दौरान लेंटर गिरने से सभी लोग लेंटर के नीचे दब गए थे, जिनमें से 25 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि दो दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। शासन ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए की आर्थिक मदद और आठ लोगों को नि:शुल्क आवास व बच्चों की नि:शुल्क शिक्षा के लिए प्रमाण पत्र सौंप दिए थे, लेकिन पीड़ित परिवारों के एक भी सदस्य को शासन व प्रशासन से सरकारी नौकरी नहीं मिल पाई है।

इसी हादसे के शिकार संगम विहार कॉलोनी में रहने वाले नीरज की भी मौत हुई थी। उनकी 36 वर्षीय पत्नी कविता का कहना है कि उसके पति की मौत के बाद उसके परिवार में कमाने वाला कोई नहीं रहा है। जिला प्रशासन ने उनके घर की स्थिति को देखते हुए उन्हें नौकरी देने का आश्वासन दिया था और जिला रोजगार अधिकारी उनके प्रमाण पत्र भी ले गए थे, लेकिन हादसे के बाद अब तक उन्हें नौकरी नहीं मिली है। जबकि उनको दो बेटे व दो बेटी की परवरिश भी करनी है और पढ़ाई का खर्च भी वह कैसे वहन करेगी। उनके पास फिलहाल आय का कोई भी साधन नहीं है। यदि उन्हें नौकरी नहीं मिली तो उनके परिवार के सामने रोजी-रोटी की समस्या और भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी।

नीरज के अलावा जिन परिवारों के सदस्यों ने इस हादसे हमें अपनी जान गवाई थी, उन्हें भी अभी तक नौकरी नहीं मिल पाई है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि सरकार के द्वारा की गई घोषणा के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने कागजात मांगे थे, जिसके बाद तमाम औपचारिकता पूरी करते हुए सभी कागजात सौंप दिए हैं, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है। इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की तरफ से एसडीएम मोदीनगर आदित्य प्रजापति का कहना है कि वह खुद पीड़ित परिवारों से संपर्क बनाए हुए हैं। सोमवार को भी उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी। इस दौरान पीड़ित परिवारों को यह भरोसा दिलाया है कि जो भी वादे सरकार के द्वारा किए गए थे, वह जल्द ही पूरे कराए जाने का प्रयास किया जा रहा है।

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