पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण पर अप्रत्याशित नियंत्रण का दावा प्रशासन कर रहा है। प्रशासनिक आंकड़ों की मानें तो पिछले साल की अपेक्षा इस साल सख्ती अधिक होने से 76 प्रतिशत मामले कम सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार पराली जलाने के गोरखपुर मण्डल में पिछले वर्ष जहां 1330 मामले थे, वही इस वर्ष सिर्फ 317 मामले ही सामने आए। पिछले वर्ष की तुलना में इस अवधि में 76 फीसदी की कमी दर्ज की गई। देवरिया जिले में 58 मामलों के सापेक्ष सिर्फ 8, गोरखपुर के 128 के सापेक्ष 16, कुशीनगर 143 के सापेक्ष सिर्फ 30 और महराजगंज में 1001 के सापेक्ष सिर्फ 263 मामले पराली जलाने के सामने आए। यह आंकड़ा एक अक्तूबर से 24 नवम्बर तक का है।