हिमालय की गोद में स्थित, सिलीगुड़ी एक ऐसा शहर है जो दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी के बीच में स्थित है। पश्चिम बंगाल का दूसरा सबसे बड़ा शहर, पूर्वोत्तर भारत का यह प्रवेश द्वार है, जोकि चाय, लकड़ी, पर्यटन और परिवहन के लिए जाना जाता है। भौगोलिक दृष्टि से, एक ओर सिलीगुड़ी नेपाल की सीमा से जुड़ा है और दूसरी ओर बांग्लादेश की सीमा से जुड़ा है। सिलीगुड़ी के गलियारें भारत को अपने विभिन्न पूर्वोत्तर राज्यों के साथ जोड़ती हैं। वन्यजीव अभ्यारण्य से चाय बागानों और मठों तक, सिलीगुड़ी पर्यटकों के लिए अंदर काफी कुछ
बर्फ से ढके पहाड़ों और प्राकृतिक सुन्दरता से भरपूर दृश्यों के बीच आधुनिक विकास, शॉपिंग मॉल और उभरते शहर के बारे में सोचकर देखें, सिलीगुड़ी शहर इसका एकदम परफेक्ट कॉम्बिनेशन है। अब पूर्वाचल,बिहार के लोागें को इस रमणीक स्थान पर जाने में आसानी होगी। गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस वे का डीपीआर बनाने का कार्य शुरु हो चुका है। इससे पर्यटन व उद्योग को बढ़ावा मिलेगा । साथ ही भूटान,नेपाल व बांग्लादेश की यात्रा भी यहां से की जा सकेगी। इसके साथ ही गोरखपुर-शामली एक्सप्रेस वे का भी डीपीआर तैयार किया जा रहा है।
कालेसर-जगदीशपुर मार्ग होगा सिक्स लेन-
कालेसर से लेकर जगदीशपुर तक फोरलेन सड़क (गोरखपुर बाईपास) भी सिक्स लेन बनाई जाएगी। इसके बनने के साथ ही देवरिया बाइपास सिक्टौर में सिक्सलेन से जुड़ जाएगा। इससे बाघागाढ़ा व कालेसर की तरफ से आ रहे सिक्टौर, इंजीनियरिंग कालेज, दिव्य नगर, मालवीय नगर आदि के नागरिक शहर में प्रवेश नहीं करेंगे, वे सीधे सिक्स लेन पकड़कर सिक्टौर चले जाएंगे और वहां से देवरिया बाइपास होते हुए अपने घर जा सकेंगे। इससे शहर का जाम कम होगा। लखनऊ से गोरखपुर के कालेसर तक फोरलेन को सिक्स लेन करने का निर्णय पूर्व में हो चुका है। कालेसर से लेकर जगदीशपुर तक 32 किलोमीटर फोरलेन इस योजना से वंचित था। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इस बची हुई दूरी को भी सिक्सलेन योजना में शामिल करा लिया है। इसकी डीपीआर बननी भी शुरू हो गई है।
सिक्स लेन हुआ फोरलेन-
एचएचएआइ के परियोजना निदेशक सीएम द्विवेदी ने बताया कि पहले लखनऊ से लेकर कालेसर तक ही सिक्स लेन का प्रस्ताव बना था। मुख्यमंत्री से मिलकर अनुरोध किया गया कि इसे जगदीशपुर तक बढ़ा दिया जाए। उन्होंने प्रयास कर कालेसर से लेकर जगदीशपुर तक की सड़क को भी सिक्स लेन योजना में शामिल करा लिया है। उन्होंने बताया कि डीपीआर तैयार होने के बाद शासन में प्रस्ताव स्वीकृति के लिए जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद जहां जरूरी होगी जमीन अधिग्रहित की जाएगी।
शामली तक एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का काम शुरू हो गया है। अभी तय किया जा रहा है कि इस एक्सप्रेस वे को पीपीगंज व कैंपियरगंज के बीच से निकाला जाए या सोनौली में फोरलेन से जोड़ा जाए। ज्यादा संभावना है कि यह एक्सप्रेस वे सोनौली से शुरू होकर नेपाल सीमा से होते हुए शामली तक जाएगा। इसकी दूरी लगभग पांच सौ किलोमीटर होगी। अंबाला से शामली तक लगभग 110 किलोमीटर एक्सप्रेस वे का निर्माण शुरू हो चुका है, जिसे पूरा करने का लक्ष्य 2024 है। इसी एक्सप्रेस वे शामली एक्सप्रेस वे को जोड़ा जाएगा। इसके बन जाने से गाेरखपुर से अंबाला की दूरी लगभग तीन सौ किलोमीटर कम हो जाएगी। अभी लोगों को एक हजार किलोमीटर दूरी तय करनी पड़ती है। गोरखपुर-शामली एक्सप्रेस वे पंजाब नार्ड ईस्ट कारीडोर का हिस्सा है।
एनएचएआइ के परियोजना निदेशक सीएम द्विवेदी ने बताया कि गोरखपुर-शामली एक्सप्रेस वे की डीपीआर बनाने का काम शुरू हो चुका है। ज्यादा संभावना है कि इसे नेपाल सीमा से होकर निकाला जाएगा। इसके अलावा गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक 519 किलाेमीटर एक्सप्रेस की भी डीपीआर तैयार हो रही है। यह एक्सप्रेस वे कुसम्ही के पास जगदीशपुर फोरलेन से जुड़ेगा।