प्रदेश में सबसे अधिक असुरक्षित हैं पढ़ने जा रही बेटियां, स्कूल-काॅलेज व कोचिंग हर जगह असुरक्षा का माहौल

वीमेन पाॅवरलाइन-1090 के आंकड़ों कामकाजी युवतियां कम हुई हैं छेडखानी की शिकार। यूपी में असुरक्षित है आधी आबादी की द्वितीय किश्त

धीरेंद्र विक्रमादित्य गोपाल

गोरखपुर। एंटी-रोमियो दल केे होने के बावजूद काॅलेज व स्कूल या कोचिंग करने जा रही हमारी बहन-बेटियां सबसे अधिक छेड़खानी की शिकार हो रही हैं। हर जगह उनको छेड़खानी का शिकार होना पड़ रहा। कामकाजी महिलाएं या युवतियां शायद शोहदों से निपटने में मुखर साबित हो रही इसलिए इनके साथ छेड़खानी की घटनाओं में कमी दिख रही।

अगर वूमेन पाॅवर लाइन-1090 के आंकड़ों पर गौर करें तो यह साफ हो जाएगा कि किस तरह घर से बाहर निकलने वाली हमारी बहू-बेटियों को असुरक्षा एवं दहशत भरे माहौल में जीना पड़ रहा।

हद तो यह कि काॅलेज और स्कूल जाने वाली लड़कियां सबसे अधिक छेड़खानी का शिकार हो रहीं। करीब 46 प्रतिशत छेड़खानी के मामले छात्राओं से संबंधित हैं। यानी कि साफ है कि स्कूल-काॅलेज जा रही हमारी बहन-बेटियां करीब-करीब हर गली-मोहल्ले और सड़क से लेकर फोन तक पर शोहदों की शिकार हुई हैं। इसके बाद छेड़खानी की सबसे अधिक शिकार गृहणियां व नहीं पढ़ने वाली लड़कियां हुई हैं। इस साल दर्ज हुई छेड़खानी की शिकायतों की संख्या में करीब39 प्रतिशत ऐसी महिलाओं या युवतियों की संख्या है जो न तो कामकाजी हैं न ही छात्राएं। जबकि इस साल के आंकड़ों पर अगर गौर करें तो कामकाजी लड़कियों या महिलाओं को छेड़खानी का कम सामना करना पड़ा है। वूमेन पाॅवरलाइन को मिली इस साल कुल शिकायतों में छेड़छाड़ की शिकार कामकाजी महिलाओं की संख्या करीब 15 प्रतिशत ही है।

वीमेन पाॅवरलाइन-1090 की रिपोर्ट के अनुसार 2017 में नवम्बर तक करीब199464 शिकायतें पीड़िताओं द्वारा दर्ज कराया गया है। दर्ज शिकायतों में अधिकतर मामलों में कार्रवाई भी की गई है। आंकड़ों के अनुसार 190347मामलों को निस्तारित भी कर दिया गया है। हालांकि, 9117 मामले निस्तारण की बाट जोह रहे।

छेड़खानी में टाॅप ट्वेल्व प्रदेश के जिले

जनपद शिकायतें

लखनउ 30208
कानुपर नगर 8774
इलाहाबाद 8039
वाराणसी 7380
गोरखपुर 6391
जौनपुर 4969
सीतापुर 4651
आगरा 4407
आजमगढ़ 4075
उन्नाव 3940
हरदोई 3921
फैजाबाद 3478

गोरखपुर-बस्ती मंडल का हाल
जनपद आई शिकायतें

बस्ती 2769

देवरिया 2564

कुशीनगर 2431

महराजगंज 1612

सिद्धार्थनगर 1135

संतकबीरनगर 1200

 

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धीरेन्द्र विक्रमादित्य
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