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मंडे मेगा स्टोरी : जिले के 140 प्राइमरी हैल्थ केयर सेंटर होंगे हाइटेक

45 प्रकार की जांचों की सुविधाओं होगी, बीमारी जांचने बनेंगी लैब टेलीमेडिसिन कंसल्टेशन के माध्यम से हाई बीपी मरीजों की होगी काउंसलिंग गंभीर बीमारियों के मरीजों को जिला स्तर तथा हायर सेंटर पर किया जाएगा रेफरल टीबी के मरीजों की प्रतिदिन मिस्ड कॉल से होगी मॉनिटरिंग

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मंडे मेगा स्टोरी : जिले के 140 प्राइमरी हैल्थ केयर सेंटर होंगे हाइटेक

मंडे मेगा स्टोरी : जिले के 140 प्राइमरी हैल्थ केयर सेंटर होंगे हाइटेक

गुना. जिले वासियों के लिए अच्छी खबर है, खासकर ग्रामीण अंचल के लोगों के लिए। क्योंकि सरकार जिस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने जा रही है, उसका लाभ इन्हीं लोगों को ज्यादा मिलेगा। सरकार का प्रमुख फोकस प्राइमरी स्टेज पर ही बीमारी की रोकथाम करना है। इसलिए इसकी शुरूआत भी सबसे निचले स्तर उपस्वास्थ्य केंद्र से की है। जिसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल है। इन्हें आरोग्य केंद्र यानी कि हैल्थ एंड वेलनेस सेंटर नाम तो काफी समय पहले ही दिया जा चुका है। जहां स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने सीएचओ (कम्प्यूनिटी हैल्थ ऑफीसर) की पदस्थापना भी हो चुकी है। जिसके माध्यम से करीब 5 हजार आबादी को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। अब तक यहां 12 प्रकार की जांचों की सुविधा उपलब्ध थी। वहीं बीपी, शुगर के मरीजों की स्क्रीनिंग कर उन्हें दवाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं। लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने इसे बढ़ाने का फैसला किया है। जिसके तहत अब प्राथमिक और उपस्वास्थ्य केंद्रों पर सुविधाओं में इजाफा करते हुए न सिर्फ 45 प्रकार की जांचों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जिसके लिए अलग से लैब भी बनाई जाएगी। कुल मिलाकर प्राइमरी लेवल के हैल्थ सेंटर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर की सुविधाएं मिल सकेंगी। यहां बता दें कि गुना जिले में इस समय 18 प्राथमिक और 140 उपस्वास्थ्य केंद्र हैं। जहां स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा होना है। वर्तमान
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सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए यह व्यवस्था
प्राइमरी लेवल के हैल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर जो सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं, इनका बेहतर तरीके से क्रियान्वयन कराने के लिए जिला सलाहकार एनसीडी का पद निर्मित किया है। जो सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से नेत्र रोग, नाक, कान एवं गला रोग, मानसिक स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य, एवं वृद्ध जन स्वास्थ्य देखभाल, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कराएंगे। उक्त क्रम में आरोग्य केंद्रों पर 45 प्रकार की जांच सुविधाओं के लिए डिग्नोस्टिक लैब स्थापित की जाएंगी।
चूंकि हाइपरटेंशन कंट्रोल प्रोग्राम (आईएचसीएल) को विशेष रूप से सामाजिक स्तर पर लाने की आवश्यकता है। जिसमें अतिआवश्यक दवाओं की लिस्ट में हाइपरटेंशन कंट्रोल के लिए टेलीमेडिसिन कंसल्टेशन के माध्यम से हाई बीपी मरीजों की काउंसलिंग के बाद नियमित दवा उपलब्ध कराए जाने को प्राथमिकता से लिया जाएगा। साथ ही सीएबीसी चेकलिस्ट से कैंसर, डायबिटीज, हाइपरटेंशन के मरीजों का आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में डिजिटल आईडी बनाकर
विधिवत तरीके से सलाह प्रदान की जाएगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य 12 सर्विसेज को समुदाय स्तर पर क्रियान्वयन किया जाना है। अभी तक कुल 4 विषय पर सीएचओ को प्रशिक्षित किया जा चुका है। गंभीर बीमारियों के मरीजों को स्क्रीनिंग के बाद जिला स्तर तथा हायर सेंटर पर रेफरल की जाएगा। टेलीमेडिसिन के माध्यम से हाइपरटेंशन के मरीजों का फॉलोअप होगा। वहीं टीबी के मरीजों की मिस्ड कॉल से मॉनीटरिंग होगी। इसके लिए केंद्रीयकृत व्यवस्था की गई है। जांच के बाद डिटेक्ट हुए टीबी के मरीज की आईडी बनाई जाएगी। उक्त मरीज को एक टोल फ्री नंबर दिया जाएगा, जिस पर उसे दवा लेते समय मिस्ड कॉल करना है। जिससे यह दर्ज हो जाएगा कि उक्त मरीज नियमित रूप से दवा ले रहा है।
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मरीजों की संख्या बढ़ी तो पैमान बदला
स्वास्थ्य विभाग से मिली से मिली जानकारी के मुताबिक वर्तमान में जिले में हाइपरटेंशन के 4000 मरीज चिन्हित हंै। पहले हाइपरटेंशन के मरीजों की स्क्रीनिंग करने जो उम्र का जो दायरा निर्धारित किया गया था, उसमें 30 वर्ष आयु निर्धारित की गई थी। लेकिन जब मरीजों की संख्या बढ़ी और जो डाटा निकलकर सामने आया तो पैमाने को अपग्रेड करते हुए 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के व्यक्ति भी इसी श्रेणी में चिन्हित किए जाने लगे हैं। कैंसर स्क्रीनिंग में सर्वाइकल कैंसर के लिए व्हीआईए (विजुअल इंसपेक्शन ऑफ एसिड) के माध्यम से जिले में सस्पेक्टेड मरीजों को चिन्हित किया जा रहा है।
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वर्तमान में यह है जांच सुविधा
रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा
गर्भ ठहरने की जांच
पेशाब में एलब्यूमिन की जांच
पेशाब में शुगर की जांच
रक्त में शुगर की जांच
मलेरिया की त्वरित जांच
टाइफाइड की त्वरित जांच
हेपेटाइटिस-बी के लिए एवबीएसएजी की जांच
टीबी के लिए स्पुटम संग्रह
नमक में आयोडीन की जांच
पानी में मल प्रदूषण तथा क्लोरीन की जांच
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इनका कहना है
असंचारी रोगों से पीडि़त मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मरने वाले लोगों में भी इन्हीं बीमारी से पीडि़त लोगों की संख्या ज्यादा है। इसी को कंट्रोल करने के लिए प्राइमरी हैल्थ केयर की सुविधाओं में इजाफा किया जा रहा है। जिसके तहत जांच की संख्या बढ़ाकर 45 की जा रही है। साथ ही जांच के लिए लैब भी बनाई जाएगी। इसके अलावा मरीजों का फोलॉअप करने टेलीमेडिशन सहित अन्य तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
सत्येंद्र शर्मा, जिला सलाहकार सीपीएचसी
आयुष्मान भारत जिला गुना