
je controversial statement over guna farmers power cut protest (फोटो- Patrika.com)
MP News: जहां एक ओर किसानों को सिंचाई के लिए कम से कम दस घंटे बिजली देने के प्रदेश सरकार के आदेश हैं। इस सबके बाद भी गुना जिले के हरिपुर ग्राम पंचायत के किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है। बिजली न मिलने से खफा किसानों का गुस्सा भड़क गया, वे अचानक सड़क पर आकर विरोध (Farmers Protest) करने लग गए। उन्होंने हरिपुर विद्युत सब स्टेशन का घेराव किया और मुख्य सड़क पर जाम लगा दिया। इसको लेकर बिजली कंपनी के जेई आरिफ खान से ग्रामीणों की तीखी झड़प हुई, यहां तक कि किसानों ने जेई पर पैसे लेकर बिजली देने के आरोप तक लगा दिए।
इसके साथ ही इस जाम के दौरान जेई आरिफ खान (JE Arif Khan) का यह कहना कि दिन में बिजली दस घंटे देना है, इसका मुख्यमंत्री से आदेश मुझे दिलवा दीजिए। मैं ऊर्जा मंत्री और ऊर्जा सचिव का आदेश मानता हूं, उस आदेश के अनुसार आपको बिजली मिल रही है। जेई के इस कथन का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, हालांकि इस वीडियो की पत्रिका पुष्टि नहीं करता। चार घंटे से अधिक चले इस आंदोलन के दौरान ग्रामीणों की ओर से क्षेत्रीय विधायक ऋषि अग्रवाल ने भी कलेक्टर से चर्चा कर किसानों को सुविधानुसार दिन में और पर्याप्त बिजली दिलाने की बात भी कही।
गुना शहर से सटी पांच किलोमीटर दूर माधोपुर राजपुर के सिवान खासखेड़ा और हरिपुर गांव आते हैं, जहां की आबादी लगभग पांच हजार से अधिक है। इस गांव में बिजली सप्लाई हरिपुर विद्युत सब स्टेशन से होती है। इसी सब स्टेशन से ग्राम पंचायत पुरापोसर आदि में भी बिजली सप्लाई होती है। वर्तमान में बिजली कंपनी किसानों को रात्रि के दस बजे से सुबह सात बजे तक बिजली दे रही है। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि बिजली सप्लाई रात्रि दस की बजाय दो बजे से सुबह 11 बजे तक दी जाए। जबकि बिजली कंपनी उच्च आदेशानुसार ही बिजली देने की बात कह रही है। किसानों का कहना है कि सुबह के समय हमें दो-तीन घंटे बिजली मिल जाए तो हम सिंचाई आदि का काम आसानी से कर सकते हैं।
सिंचाई के लिए दी जाने वाली बिजली को नियमित दस घंटे सुबह दस-11 बजे तक दिए जाने की मांग को लेकर हरिपुर ग्राम पंचायत और पुरापोसर आदि ग्राम पंचायत से जुड़े किसान अचानक हरिपुर रोड पर सड़क पर आ गए और वहां बने विद्युत सब स्टेशन का घेराव कर दिया। इसी बीच जानकारी मिलने पर वहां बिजली कंपनी के अधिकारी पहुंच गए। किसानों का कहना था कि हमें बिजली दिन में भी चाहिए। इसको लेकर विद्युत कंपनी के अधिकारियों और किसानों के बीच तीखी झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने न केवल बिजली सप्लाई बंद की, बल्कि सड़क पर वाहन खड़े कर आवागमन भी बाधित कर दिया। गुस्साए किसानों ने कहा कि मजदूर भी दिन के 800 रुपये कमा लेता है, लेकिन खाद और बिजली की मार झेल रहा किसान अपने बच्चों को पढ़ाने तक के लिए मोहताज है। किसानों ने मांग की है कि उन्हें सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक अनिवार्य रूप से बिजली दी जाए ताकि वे खेतों में पानी दे सकें।
आंदोलनकारी किसानों ने कनिष्ठ अभियंता आरिफ खान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पूरा बिल वसूलने और रिश्वतखोरी के बावजूद उन्हें नियमानुसार 10 घंटे बिजली नहीं मिल रही है। किसानों का कहना है कि सरकार का दावा 10 घंटे निर्वाध बिजली का है, लेकिन हकीकत में दिन के समय बमुश्किल एक-दो घंटे ही सप्लाई दी जा रही है। रात में बिजली मिलने के कारण कड़ाके की ठंड में किसानों को रतजगा करना पड़ता है, जिससे स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों पर संकट मंडरा रहा है।
हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस और बिजली विभाग के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों की समस्याओं को सुना और सप्लाई में सुधार का आश्वासन देकर मामला शांत कराया। हालांकि, किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दिन में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हुई और भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगा, तो वे उग्र जिला स्तरीय आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। (MP News)
जिला स्तर पर जो बिजली सप्लाई दस घंटे देने का चार्ट बना है, उसके अनुसार बिजली रात्रि दस बजे से सुबह सात बजे तक दी जा रही है। एक सप्ताह दिन में और एक सप्ताह रात में बिजली दी जाती है। चार्ट से हटकर बिजली कैसे दी जा सकती है।-अशोक शर्मा, महाप्रबंधक, गुना सर्कल, बिजली कंपनी
मैंने तो यह कहा है कि आप अपनी बात कहीं भी रख सकते हैं। वीडियो में क्या चल रहा है, यह मुझे नहीं मालूम। मैंने उनका आवेदन अपने वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंचा दिया है।- आरिफ खान, कनिष्ठ यंत्री, हरिपुर सब स्टेशन
Published on:
21 Jan 2026 11:36 pm
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