
गुना@प्रवीण मिश्रा की रिपोर्ट...
कलेक्ट्रेट से निकाला लाखों रुपए का कीमती सामान बिना टेंडर ही कौडिय़ों के दामों में प्रशासनिक अधिकारियों ने बेच दिया प्रशासन ने न तो कोई टेंडर बुलाया और ना ही बाजार से दर मांगी।
पुरानी कलेक्ट्रेट से निकला लाखों कीमती सामान और यहां तक की नई कलेक्टे्रट का पुराना फर्नीचर भी बिना बताए गायब कर दिया। लाखों रुपए का कीमती फर्नीचर कर्मचारियों के घरों की शोभा बढ़ा रहा है। कई दशक से कलेक्ट्रेट पूर्व में जिस स्थान पर था, वहां लाखों रुपए की कीमती सागवान की लकड़ी से बना फर्नीचर लगवाया गया था।
बीते दो साल पूर्व नई कलेक्ट्रेट बनी जिसका शुभारंभ प्रदेश के तत्कालीन मुख्य शिवराज सिंह चौहान, तत्कालीन प्रभारी मंत्री जयभान सिंह पवैया ने किया था। इसके बाद कलेक्ट्रेट के कई कार्यालय नई कलेक्टे्रट में स्थानातरित हो गए। यहां से कार्यालय नई कलेक्ट्रेट में शि ट हो गए थे, यहां की स्टेशनरी, फर्नीचर और अन्य कीमती सामान इसी कलेक्टे्रट में रह गया था।
गायब होने लगा था फर्नीचर
बताया गया कि पुरानी कलेक्ट्रेट में लगे सागवान आदि के कई फर्नीचर कलेक्ट्रेट के कुछ बाबू वहां से अपने घर ले गए, यह फर्नीचर उनके घर की शोभा बढ़ा रहे हैं। जबकि ये फर्नीचर नियमानुसार नीलाम होना था या दूसरे सरकारी कार्यालयों में शि ट होना था।
कबाड़ में निकले टेबल-कुर्सी
पुरानी कलेक्ट्रेट में आबकारी के ठीक सामने एक कक्ष में वर्षों पुराना सामान भरा हुआ था। इसमें टेबल कुर्सी के अलावा कीमती फर्नीचर निकला। 20 नवंबर को इसे खाली कर बिना टेंडर बुलाए ही सामान बेच दिया। अच्छी गुणवत्ता वाला सामान कर्मचारी बिना बताए अपने घर ले गए। उधर, सामान को भी बेहद सस्ती दर पर बेच दिया है। सामान्य तौर पर 8 से 10 रुपए किलो रद्दी चल रही है, लेकिन कबाड़ में निकली रद्दी को तीन रुपए किलो में बेचे जाने का मामला सामने आया।
नए भवन का पुराना फर्नीचर भी गायब
नए कलेक्ट्रेट भवन में पुरानी फर्नीचर भी नजर नहीं आ रहा है। एक साल पहले नया फर्नीचर आया है, लेकिन कलेक्ट्रेट के बाबुओं से लेकर कलेक्टे्रट की विभिन्न शाखाओं का पुरानी फर्नीचर भी कर्मचारियों के घरों की शोभा बढ़ा रहे हैं। कलेक्टर की बैठक कक्ष के बाहर लगी एलईडी भी नजर नहीं आ रही है। यह भी लंबे समय से गायब है।
Published on:
02 Dec 2019 12:46 pm
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