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कोरोना ने घटा दी आमदनी, कैसे चलाएं घर-परिवार, स्कूल खुलने के बाद खर्चा और बढ़ा

हाय-री महंगाई कम होने की वजाए बढ़ती ही जा रही- पेट्रोल, डीजल के बाद रसोई गैस के बढ़ते दामों ने आमजन की मुश्किलें बढ़ाई

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पंचायतीराज विभाग की लगभग तीन हजार पुरानी जांचों पर कुण्डली

पंचायतीराज विभाग की लगभग तीन हजार पुरानी जांचों पर कुण्डली

गुना. कोरोना के बाद लोग सबसे ज्यादा परेशान महंगाई से हैं। क्योंकि समय के साथ-साथ हर क्षेत्र में कीमतें बढ़ती चली जा रही हैं। वहीं इसके उलट लोगों की आमदनी घटी है। जिसके कारण लोगों को परिवार का पालन पोषण करने से लेकर शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने में तक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ताजा मामला घरेलू गैस सिलेंडर की रेट बढऩे का सामने आया है। 5 अक्टूबर तक 14.2 किलोगा्रम का सिलेंडर 947 रुपए का था, जिसके देर रात अचानक से दाम बढ़ा दिए गए। अब यह सिलेंडर 962 रुपए का मिल रहा है। वहीं बिना सब्सिडी वाला व्यवायिक सिलेंडर कीमत में कोई इजाफा नहीं हुआ है। वर्तमान में इसकी रेट 1886 रुपए ही है।
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रसोई सहित परिवार का पूरा बजट गड़बड़ाया
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 15 रुपए का इजाफा भले ही सुनने में कम लग रहा है लेकिन पिछले 10 माह के दौरान खाद्य पदार्थों से लेकर पेट्रोल व डीजल की कीमतें बढऩे का असर हर वर्ग पर पड़ रहा है। उसे ऑटो से लेकर भाड़ा तथा निजी वाहन चलाने के लिए अतिरिक्त पैसे खर्च करना पड़ रहे हैं। वहीं खाद्य पदार्थों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुओं में तेल की कीमत 120 रुपए से बढ़कर 150 और 180 तक पहुंच गई है। खाद्य तेल अलग-अलग नामी ब्रांडों से आते हैं। उसके अनुसार उसकी कीमत बढ़ाई गई है। वहीं शक्कर भी 35 रुपए किलो से बढ़कर 38 से 40 रुपए तक में मिल रही है। चाय की पत्ती के दाम 280 रुपए किलो हो चुके हैं। इस तरह मध्यम वर्गीय परिवार का रसोई का बजट गड़बड़ा गया है।
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स्कूल खुलने से खर्चा बढ़ा
कोरोना की वजह से दो साल से लोगों के काम धंधे ठप थे। जिससे उन्हें काफी ज्यादा नुकसान हुआ है। कोरोना काल में स्कूल न खुलने से काफी हद तक लोगों के अन्य खर्चे बचे रहे। लेकिन जैसे ही धीरे-धीरे स्कूल खुलना शुरू हुए तो लोगों ेके एकाएक खर्चे बढ़ गए। स्कूल एडमिशन से लेकर मंथली फीस, कोर्स तथा बच्चों स्कूल भेजने का खर्चा बढ़ गया है। जबकि आमदनी में बढऩे की वजह घटी है। इसी वजह से मध्यम वर्गीय परिवार व आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा है।
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त्यौहारी सीजन में महंगाई ज्यादा कष्टदायक
त्यौहारी सीजन में सिलेंडर के बढ़ते दामों ने आमजन के साथ-साथ मध्यम वर्गीय परिवार की मुश्किलें ज्यादा बढ़ा दी हैं। क्योंकि पहले से ही लोग पेट्रोल, डीजल के बढ़ते दामों का दंश झेल रहे हैं। ऐसे विपरीत समय में सिलेंडर के दामों ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की पूरी तरह से कमर तोड़ दी है। नवरात्र से ऐन पहले सिलेंडर के बढ़ते दामों ने एक बार फिर उपभोक्ताओं को बड़ा झटका दिया है। धार्मिक त्यौहार शुरू होने के एक दिन पहले बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर पर 15 रुपयों की बढ़ोतरी की गई है। दो महीने तक चलने वाला त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे समय में सिलेंडर के दाम बढऩे से रसोई का बजट बिगड़ गया है।
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सरकारी की अपेक्षा निजी सिलेंडर सस्ता
5 अक्टूबर तक 14.2 किले के सिलेंडर का दाम 947 रुपए था। लेकिन रात में ही सिलेंडर के दाम 15 रुपए बढ़ा दिए गए। जिले में अब घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़कर 962 रुपए हो गयी है। बाजार से मिली जानकारी के अनुसार सरकारी सिलेंडर से कम कीमत निजी सिलेंडर मिल रहा है। 19 किलो वाला सिलेंडर सरकारी सिलेंडर से 200-300 रुपया कम में मिल रहा है।
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