25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गुना शहर : एक माह के स्वच्छता मिशन की हकीकत

- 495 कर्मचारी, 75 लाख रुपए खर्च, पचास हजार से अधिक स्वच्छता दूत, फिर भी शहर गंदा- सोशल मीडिया तक सिमटा मिशन-10, धरातल पर कुछ भी नहीं, पार्षद और जनता नहीं दिखा रही रुचि, न वार्डों में पहुंचे डोर टू डोर कचरा कलेक्शन वाहन

3 min read
Google source verification

गुना

image

Praveen Mishra

Dec 06, 2019

गुना शहर : एक माह के स्वच्छता मिशन की हकीकत

गुना शहर : एक माह के स्वच्छता मिशन की हकीकत

गुना। शहर के जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, आमजन सभी चाहते हैं कि स्वच्छता सर्वेक्षण के टॉप टेन में गुना शामिल हो। इसके लिए सहयोग देने को आतुर हैं। लेकिन चंद लोगों के चंगुल में फंस जाने और सोशल मीडिया पर फोटो सेशन तक सिमट जाने का असर ये है कि एक माह से चल रहे स्वच्छता मिशन के तहत कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार के तमाम प्रयासों और सोशल मीडिया पर पचास हजार से अधिक बनाए गए स्वच्छता दूतों के बाद भी गुना गंदा शहर बना हुआ है।

धरातल पर न तो शहर में सफाई नजर आ रही है और न ही गलियों में नालियां साफ दिख रही हैं। इस सबके पीछे की वजह ये है कि नगर पालिका अध्यक्ष राजेन्द्र सलूजा, क्षेत्रीय विधायक गोपीलाल जाटव समेत कांग्रेस और भाजपा के 37 में से 30 पार्षदों के अलावा शहर के कई नामी-गिरामी राजनेता, समाजसेवी और प्रबुद्धजन इस स्वच्छता अभियान से दूरी बनाए हुए हैं।

दो दर्जन से अधिक पार्षदों ने स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान में स मान न मिलने की पीड़ा बताई। यह बात अलग है कि स्वच्छता मिशन के तहत नगर पालिका के कर्मी तीस-तीस रुपए और दुकानदारों से दो-दो सौ रुपए एकत्रित करने का काम बड़ी तेजी से चलने लगा है।

मिली खबर के अनुसार एक माह पूर्व कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार ने कलेक्ट्रेट में स्वच्छता मिशन को लेकर शहर के लोगों की बुलाई बैठक में कलेक्टर ने कहा था कि यह शहर आपका है, आपको ही स्वच्छ रखना है। इस बैठक के बाद नगर पालिका अधिकारियों के साथ बैठक करके स्वच्छता मिशन को लेकर पूरी तैयारी कराई थी।

इसके लिए सोशल मीडिया पर मिशन टेन के नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बना, उसमें कई लोग जुड़ गए। स्वच्छता मिशन को लेकर फोटो सेशन का ऐसा क्रम चला जो रुकने का नाम नहीं ले रहा है।

जबकि हकीकत ये है कि शहर में 495 सफाई कर्मचारी और 75 लाख रुपए हर माह खर्च करने और एक माह स्वच्छता मिशन के चलने के बाद भी शहर में धरातल पर सफाई दिखाई नहीं दे रही है। नपा ने कचरा एकत्रित करने डस्टबिन लगाए हैं, लेकिन पर्याप्त कर्मचारी होने के बाद भी कचरे के वे डिब्बे खाली नहीं हो पा रहे हैं।

वार्डों में नहीं हो रही सफाई
37 वार्डों की नपा में कई ऐसे वार्ड हैं, जिनमें सफाई नहीं हो रही है। श्रीराम कालोनी का कलेक्टर लाक्षाकार ने खुद निरीक्षण किया था, इसके बाद हालात नहीं सुधरे।

पत्रिका टीम ने जब शहर के कुछ क्षेत्रों में जाकर स्वच्छता मिशन के चलने के बाद हालात देखे तो सिसोदिया कालोनी, दुर्गा कालोनी, प्रताप छात्रावास रोड, रसीद कालोनी, बूढ़े बालाजी में हरिपुर रोड, कर्नलगंज, पिपरौदा रोड सहित कई जगह ऐसी दिखीं, जहां के हालात नहीं बदले दिखाई दिए।

नानाखेड़ी मंडी गेट से लेकर गोकुलसिंह के चक तक एबी रोड पर सफाई नजर नहीं आई। रोड के दोनों साइड धूल और मिट्टी से लोग परेशान होते दिखे। वहीं वार्ड एक की कांग्रेस पार्षद पति ने तो वहां सफाई न होने को लेकर गंदे पानी में धरना तक दिया था।

खाली प्लाटों से साफ नहीं हुआ कचरा
शहर में जगह-जगह वर्षों से भूखंड खाली पड़े हैं। उनमें कचरा के ढेर हैं। उनकी न तो सफाई हो सकी और ना ही उन पर कोई जुर्माना लगा। कैंट विवेक कालोनी से लेकर हनुमान चौराहा तक कई जगह खाली भूमि पर कचरे के ढेर देखे जा सकते हैं। उधर, बीजी रोड,विंधाचल कॉलोनी, कोल्हूपुरा रोड, बूढ़े बालाजी रोड, मुहालपुर कालोनी रोड सहित कई जगह की स्थिति बेहद खराब दिखी।

कार्रवाई के बाद भी नहीं हुआ सुधार
इधर, पुरानी गल्ला मंडी में प्रशासन ने खुद सफाई कराई। यहां तक की व्यापारियों पर जुर्माना भी लगाया और दुकानदारों के भी चालान बनाए। इसके बाद भी यहां पर सफाई नजर नहीं आ रही है। दुकानदार पांच-पांच कदम पीछे हट गए। इससे निकलने रास्ता जरूर हो गया, लेकिन जगह-जगह उखड़ी गिट्टी और कचरे की वजह से परिसर गंदा नजर आ रहा है।

फोटो सेशन तक सिमटे कई लोग
शहर को सुंदर बनाने में ३ लाख लोग भी उतने ही जि मेदार हैं, जितना की नपा और प्रशासनिक अधिकारी। सदर बाजार में शहर के बड़े कारोबारी रहते हैं, लेकिन शाम को बाजार ही गंदा नजर आता है।

मैरिज गार्डन संचालक हर साल लाखों की कमाई करते हैं, लेकिन वहां से निकले कचरे के निपटाने केलिए कोई उपाय नहीं है। अभियान में भी कई लोग ऐसे हैं, जो फोटो सेशन तक सीमित हैं। उनके हाथ में झाडू तक नजर नहीं आती। कुछ समय पूर्व प्रदेश के श्रम मंत्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया भी इस स्वच्छता अभियान में शामिल हुए थे।

निचला बाजार में गुनिया अभी भी सबसे ज्यादा गंदी
निचले बाजार में गुनिया सबसे ज्यादा गंदी है। कचरा डालने से गुनिया आधी भर गई है। नपा बारिश से पहले हर साल सफाई कराती है, लेकिन कचरा उतना का उतना ही बना हुआ है। इससे शहर और गंदा नजर आता है। पत्रिका ने गुनिया की सफाई का मुद्दा उठाया है।

गुनिया की सफाई होने से ही शहर के १० वार्डों की सुंदरता निर्भर है। अगर, गुनिया की ठीक तरह से सफाई होती है। काफी हिस्सा सुंदर और साफ दिखने लगे है। साफ सफाई के अलावा हजारों टन कचरा नपा के कर्मचारी और लोगों ने मिलकर इसमें डंप किया है। इस वजह से यह गुनिया नदी, गंदे नाले की सूरत में नजर आती है।