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हरिपुर गांव जहां फुटवियर डिजाइन एण्ड डवलपमेन्ट इंस्टीट्यूट है लेकिन 12 वीं तक स्कूल नहीं

पत्रिका ग्राउंड रिपोर्ट :3 हजार आबादी वाली हरिपुर पंचायत में नहीं है हायर सेकेंडरी स्कूल -10 वीं के बाद लड़कियां छोड़ देती हैं पढ़ाई, परिजन बोले, गुना से हरिपुर तक का रास्ता नहीं है सुरक्षित गांव में स्थापित एफडीडीआई भी नहीं बना सका अपनी पहचान, ग्रामीण बोले, इसका हमें नहीं कोई फायदा आरक्षण ने सहरिया को बनवाया सरपंच लेकिन वह आज तक पक्का मकान तक नहीं बना सका

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हरिपुर गांव जहां फुटवियर डिजाइन एण्ड डवलपमेन्ट इंस्टीट्यूट है लेकिन 12 वीं तक स्कूल नहीं

हरिपुर गांव जहां फुटवियर डिजाइन एण्ड डवलपमेन्ट इंस्टीट्यूट है लेकिन 12 वीं तक स्कूल नहीं

गुना. जिला मुख्यालय से सबसे नजदीकी और बमौरी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत हरिपुर में पढ़ाई के लिए सिर्फ 10 वीं तक ही स्कूल है। ऐसे में गांव के बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए गुना ही जाना पड़ता है। लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी गांव की बेटियों को उठानी पड़ रही है। जो चाहकर भी गुना नहीं जा पातीं। क्योंकि यह रास्ता उनके लिए महफूज नही है। मार्ग के बीच में पडऩे वाले अंडर ब्रिज इलाके में असमाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है।यह समस्या इतनी बड़ी है कि इससे गांव का हर परिवार जुड़ा हुआ है।
यहां बता दें कि ग्राम पंचायत हरिपुर में इस बार सरपंच पद आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है। जबकि पिछले 10 सालों से सरपंच पद पर एक ही परिवार का कब्जा है। इससे पहले आरक्षण प्रक्रिया के तहत सहरिया समाज का व्यक्ति सरपंच रहा। लेकिन वर्तमान में उसके पास रहने को पक्का मकान तक मौजूद नहीं है। जहां तक गांव में मूलभूत सुविधाओं की बात करें तो बिजली, सड़क को छोड़कर सभी जरूरी सुविधाओं की कमी है। पिछले 5 सालों में हुए विकास देखें तो कुछ भी नया नजर नहीं आता। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल 10 वीं तक ही है।
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सोचा था एफडीडीआई खुलने से गांव वालों को होगा फायदा
हरिपुर पंचायत में वर्षों पहले तत्कालीन सांसद व वर्तमान में केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योरिादित्य सिंधिया ने सन् 2017 में युवाओं को रोजगार दिलाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपए की लागत से एफडीडीआई (फुटवियर डिजाइन एण्ड डवलपमेन्ट इंस्टीट्यूट) की स्थापना कराई थी। लेकिन कनेक्टिविटी के अभाव में यह संस्था पूरी तरह दम तोड़ गई है। दूसरे प्रदेशों या शहरों से गुना आने के लिए कोई सीधा साधन नहीं है। यही वजह है कि इस संस्था में कोई आने को तैयार नहीं हैं। परिणामस्वरूप इस फैक्ट्री का फायदा स्थानीय ग्रामीण तो क्या गुना जिलेवासियों को भी नहीं मिल पा रहा है।
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महंगी फीस, आवागमन के साधन का अभाव
एफडीडीआई के सफल न होने की प्रमुख वजह के रूप में यहां लगने वाली महंगी फीस तथा आवागमन के साधनों का अभाव सामने आया है। एडमिशन लेने के इच्छुक स्टूडेंट ने बताया कि फुटवियर और डिजाइन कोर्स के आठ सेमेस्टर होते हैं जिसमें एक सेमेस्टर की फीस 56 हजार 800 रुपए है। इतनी फीस जमा करना सामान्य तो क्या मध्यम वर्गीय पविवार के वश की बात नहीं है। इस तरह यह संस्था पूरी तरह ये घाटे में चल रही है। संस्था में पदस्थ स्टाफ के वेतन पर हर माह लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं।
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हरिपुर पंचायत की प्रमुख समस्याएं
गांव में सीसी सड़क तो है लेकिन नालियां नहीं हैं।
लगभग हर घर के आसपास घूरे लगे हैं।
स्कूल सिर्फ 10 वीं तक है। आगे की पढ़ाई के लिए गुना जाना ही मजबूरी
ऐसा मुक्तिधाम नहीं जहां सभी समाज के लोग अंतिम संस्कार कर सकें
तालाब है लेकिन उससे फायदा कम नुकसान ज्यादा
10 साल पहले जो सहरिया समाज का व्यक्ति सरपंच बना लेकिन उसके पास आज रहने को पक्का मकान तक नहीं
बाउंड्रीवाल के अभाव में स्कूल सुरक्षित नहीं, कई बार हो चुकी हैं चोरियां, कम्प्यूटर तक ले गए चोर
खिड़की, दरवाजे से लेकर कुछ भी नहीं है सुरक्षित
जल जीवन मिशन के तहत नलजल योजना का काम अधूरा
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इन समस्याओं पर अमल जरूरी
स्थानीय ग्रामीणों ने पत्रिका को बताया कि गांव कुछ समस्याएं ऐसी समस्याएं हैं जिनसे सबसे ज्यादा लोग प्रभावित हैं। इनमें एक है मुक्तिधाम। गांव में ऐसा मुक्तिधाम नहीं है, जहां सभी समाज के लोग जा सकें। जो एक बना है वहां यादव और बैरागी समाज के लोग ही जाते हैं। अन्य समाज के लोग जिस जगह का उपयोग अंतिम संस्कार के लिए करते हंै, वहां न तो आने जाने का रास्ता ठीक है और न ही उक्त जगह कोई जरूरी सुविधा। वर्तमान में इस जगह पर घूरा डाला जा रहा है। पानी, छाया तथा चबूतरा तक नहीं है।
दूसरी बड़ी समस्या गांव काफी पुराना तालाब है। जो सिंचाई विभाग के अंतर्गत आता है। इस तालाब में बारिश के समय इतना पानी भर जाता है, कि आसपास के किसानों की हजार बीघा खेत पानी से लबालब हो जाते हैं। वह कोई भी फसल नहीं कर पाते। इसलिए वे इस तालाब को खाली कर देेते हैं। यही वजह है कि वर्तमान में इस तालाब में एक बूंद पानी तक नहीं है। गांव वालों का कहना है कि विभाग न तो किसानों को मुआवजा देता और न ही तालाब के लिए ऐसा कोई कदम उठा रहा जिससे तालाब भी भरा रहे और किसानों को भी समस्या न आए।
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यह बोली जनता जनता
स्कूल भवन बनाने पर तो काफी पैसा खर्च किया गया है लेकिन इसे सुरक्षित रखने किसी तरह के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। आए दिन चोरियां होती रहती हैं। एक बार तो चोर कम्प्यूटर तक चुरा ले गए थे। नलों की टोटियां व अन्य सामान चोरी होना आम बात हो गई है। यहां सुरक्षा के लिए ऊंची बाउंड्रीवॉल का होना बेहद जरूरी है।
गोलू प्रजापति, ग्रामीण
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10 साल पहले मेरे पिता चिरोंजी लाल इस गांव के सरपंच रह चुके हैं। लेकिन आज भी हम कच्चे झोंपड़े में ही रह रहे हैं। वर्तमान सरंपच और सचिव से कई बार कहा लेकिन अभी तक कुटीर मंजूर नहीं हुई है।
सैतान सिंह सहरिया, पूर्व सरपंच पुत्र
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हमारे गांव की सबसे गंभीर समस्या शिक्षा की है। क्योंकि यहां स्कूल सिर्फ 10 वीं तक है। इसके बाद बच्चों को पढऩे गुना ही जाना पड़ता है। लड़के तो जैसे-तैसे चले भी जाते हैं लेकिन लड़कियां अकेली नहीं जा पाती। गुना तक का रास्ता उनके लिए सुरक्षित नहीं है। गांव में स्कूल 12 वीं तक होना ही चाहिए।
जगमोहन यादव, ग्रामीण
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जलजीवन मिशन के तहत नई नलजल योजना अंतर्गत पाइन लाइन बिछाई जा रही है। लेकिन गांव में पिछले कई माह से काम बंद पड़ा है। जिससे कई इलाकों में पानी उपलब्ध नहीं है। इधर उधर से पानी भरकर लाना पड़ रहा है।
रामगोपाल यादव, ग्रामीण
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पीएचई वालों ने गांव में जगह-जगह सीसी सड़क खोदकर डाल दी है। जिसे ठीक से दुरुस्त नहीं किया गया। नालियां नहीं हैं। गांव में जगह-जगह घरों के आसपास घूरे लगे हैं। गांव में ऐसा मुक्तिधाम नहीं है, जहां सभी समाज के लोग जा सकेें। बारिश में बहुत ज्यादा परेशानी आती है।
धीरज लोधा, ग्रामीण
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फैक्ट फाइल
जनपद पंचायत : गुना
ग्राम पंचायत : हरिपुर ( महाराजपुरा, खासखेड़ा, चकसिंघाड़ी, माधौपुरा)
कुल आबादी : 3 हजार
कुल मतदाता : 1800
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इनका कहना
हमारी पंचायत में 10 वींं तक ही स्कूल है। इससे गांव के बच्चों को आगे पढऩे जाना पड़ता है। इस समस्या को देखते हुए हमने शासन से 12 वीं तक स्कूल खोलने की मांग की थी। लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। जहां तक गांव में ठीक से सफाई न होने का सवाल है तो पंचायत के पास इतना बजट नहीं है, जिससे यह काम हो सके।
इमरत बाई यादव, निवर्तमान सरपंच
ग्राम पंचायत हरिपुर