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शहर में हाई टेंशन का टेंशन, खतरे में जान

घरों के नजदीक व छत के ऊपर से निकले हैं तार, हादसों के बाद भी नहीं चेत रहा बिजली महकमा घर से लेकर स्कूल तक हाइटेंशन की जद में

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शहर में हाई टेंशन का टेंशन, खतरे में जान

शहर में हाई टेंशन का टेंशन, खतरे में जान

गुना ्र. प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के प्रभार वाले गुना जिले में बिजली वितरण की स्थिति कतई ठीक नहीं है। हम बात कर रहे हैं हाइटेंशन लाइन की, जो शहर के कई रिहायशी इलाकों से होकर निकली है। इन तारों के नीचे और आसपास घर व स्कूल बने हैं। लेकिन बिजली कंपनी ने सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए हैं। आए दिन तार टूटने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इससे पहले कुछ घटनाओं में लोग अपनी जान तक गवां चुके हैं। इतना सब होने के बावजूद बिजली महकमा नहीं चेत रहा है। यह गंभीर चिंता का विषय है। बता दें कि कई साल पहले बिजली कंपनी ने हाइटेंशन लाइन क्षेत्र में रहने वालों को नोटिस जारी किए थे लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

स्थानीय नागरिकों की शिकायत पर शहर के ऐसे इलाकों में जाकर देखा तो वाकई में दृश्य भयावह नजर आया। कुछ घरों की छत और हाइटेंशन लाइन की दूरी इतनी कम रह गई है कि परिवार के सदस्य अपनी छत पर तक नहीं जा पाते। इसके वजह जब उनसे पूछी गई तो बताया गया कि मकान निर्माण के दौरान इलाके में कुछ ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं जब काम करने वाला व्यक्ति हाइटेंशन लाइन की चपेट में आकर घायल ही नहीं मौत के मुंह में तक समां चुका है। इस डर से कुछ लोगों ने तो निजी तौर पर भी सुरक्षा के इंतजाम किए हैं लेकिन पावरफुल लाइन के आगे यह नाकाफी हैं।

इस तरह से शहरवासियों के लिए हाइटेंशन लाइन एक बड़ी टेंशन बन गई है। हर साल शहर के किसी न किसी इलाके में लोग हाइटेंशन लाइन का शिकार हो रहे हैं। लेकिन बिजली महकमे ने आज तक इन घटनाओं से सबक नहीं लिया है और न ही घटनाओं को रोकने के लिए किसी तरह के सुरक्षा इंतजाम किए हैं। यही कारण है कि लगातार लोग घटनाओं का शिकार होते चले जा रहे हैैं।

खुलेआम हो रही सुरक्षा मापदंडों की अनदेखी

हाइटेंशन लाइन को लेकर शासन की स्पष्ट गाइड लाइन है लेकिन इन नियमों का पालन बिजली कंपनी नहीं कर रही है। जिससे इसके आसपास रहने वाले लोगों की जान पर खतरा बना हुआ है। न तो लोग अपनी छतों पर जा पा रहे हैं और न ही अपने मकान में नया निर्माण कार्य करवा पा रहे हैं। यहां बता दें कि बिजली कंपनी द्वारा हाइटेंशन लाइन के नीचे सुरक्षा गार्डर नहीं लगाए गए हैं। जो तार टूटने की स्थिति में गंभीर दुर्घटना को रोकने में मदद करता है।

ये घटनाएं हो चुकी हैंगुलाबगंज इलाके मेें रहने वाली एक महिला आरती ओझा किसी काम से अपनी छत पर गई उसी दौरान वह ऊपर से निकली हाइटेंशन लाइन का शिकार हो गई थी। जिसकी घटना स्थल पर ही मौत हो गई। सबसे ज्यादा चर्चित हनुमान कॉलोनी की घटना रही है। क्योंकि यह देश के राष्ट्रपति के भाई के परिवार से जुड़ी थी। जिसमें एक मासूम बच्चे की मौत हो गई थी। तत्समय खुद राष्ट्रपति भी यहां आए थे। इस दौरान कॉलोनीवासियों ने राष्ट्रपति से की गई शिकायत में बताया था कि उनके घर व छत के नजदीक से हाइटेंशन लाइन निकली है, जिसे अन्य जगह स्थानांतरित करवाया जाए। लोगों की शिकायत पर राष्ट्रपति ने भी तत्कालीन कलेक्टर को समस्या निराकरण के लिए निर्देशित किया था। लेकिन तब से लेकर आज तक इस समस्या को लेकर न तो स्थानीय प्रशासन ने ध्यान दिया है और न ही बिजली कंपनी के अधिकारियों ने सुरक्षा इंतजामों को लेकर कोई कदम उठाया है।
इस इलाके में सबसे अधिक खतराशहर के रेलवे स्टेशन रोड पर बिजली कंपनी का पावर हाउस स्थित है। यहां से ग्राम सिंगवासा, मावन सहित अन्य गांवों के लिए हाइटेंशन लाइन गई है। गौर करने वाली बात है यह लाइन जिस समय डाली गई थी उस दौरान लाइन के आसपास कोई घर नहीं बने थे। लेकिन बाद में कॉलोनाइजरों ने अपना फायदा देखते हुए कहीं भी सस्ते दामों पर प्लाट काट दिए। जिसका हर्जाना अब लोगों को हाइटेंशन लाइन का टेंशन झेलकर उठाना पड़ रहा है। यहां बता दें कि पावर हाउस से एक नहीं बल्कि तीन तीन हाइटेंशन लाइनें निकली हैं जो इस क्षेत्र के बड़े एरिया को कवर करती हुई मावन गांव तक गई है। इस बीच इलाके में कई लोगों के घर तो ऐसे हैं जहां घरों के अंदर तक खंभे लगे हुए हैं।
शहर के कई इलाकों से गुजरी हाइटेंशन लाइन की रेंज में न सिर्फ लोगों के घर आ रहे हैं बल्कि कई सरकारी व निजी स्कूल भी इसकी चपेट में हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि पावर हाउस के पास घोसीपुरा क्षेत्र मेें एक निजी स्कूल है। जहां पुताई करते समय एक कर्मचारी हाइटेंशन लाइन का शिकार होकर घायल हो गया था। वहीं दूसरी घटना दिवाली से पहले बांसखेड़ी क्षेत्र की है। जहां सरकारी स्कूल के ठीक सामने स्थित एक घर में सफाई के दौरान एक व्यक्ति भी हाइटेंशन का शिकार हो चुका है। इन घटनाओं के बाद आसपास के लोग काफी दहशत में हैं। बांसखेड़ी स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि वे कई बार बिजली अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों को समस्या से अवगत करा चुके हैं।
बिजली के क्षेत्र में बहुत सुधार हुआ है। हाइटेंशन लाइनों को दूसरी जगह शिफ्ट किया है। कई जगह हाइटेंशन लाइनों के नीचे मकान बना लिए हैं उनको दिखवाया जाएगा।

प्रधुम्न सिंह तोमर ऊर्जा मंत्री मध्यप्रदेश
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हाइटेंशन लाइन के लिए ये हैं सुरक्षा मानक● 650 वॉट तक की लाइन से होरिजेंटल दूरी 1.2 मीटर और वर्टीकल दूरी 2.5 मीटर दूर कंस्ट्रक्शन होनी चाहिए।

● 11 हजार हाईटेंशन लाइन से होरिजेंटल 1.2 मीटर और वर्टीकल 3.7 मीटर की दूरी पर निर्माण किया जा सकता है।

● 11 केवी से 33 केवी लाइन से होरिजेंटल 2 मीटर और वर्टीकल 3.7 मीटर की दूरी होनी आवश्यक है।

● 33 केवी की लाइनों से होरिजेंटल 2 मीटर से ज्यादा और वर्टीकल 3.7 मीटर से ज्यादा होनी चाहिए।