
गुना, अशोकनगर के एड्स मरीजों को इलाज कराने जाना पड़ रहा शिवपुरी
गुना . सरकार एचआईव्ही एड्स के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए तो प्रचार प्रसार पर हर साल एक बड़ा बजट खर्च कर रही है। लेकिन इस बीमारी से पीडि़त व्यक्तियों के समुचित इलाज के लिए ज्यादा गंभीर नहीं है। यही कारण है कि गुना जिले में वर्ष 2003 से अब तक 696 मरीज एचआईव्ही एड्स के पॉजिटिव पाए जा चुके हैं।
लेकिन गुना व अशोकनगर जिले के मरीजों के समुचित उपचार के लिए बेहद जरूरी एआरटी सेंटर (एंटी रेट्रोवायरल थैरेपी) अब तक गुना जिला अस्पताल में नहीं खोला जा सका है। जिसके कारण एड्स मरीजों का एआरटी सेंटर में पंजीयन कराने व दवा चालू कराने में बहुत अधिक परेशानी आ रही है। लेकिन मरीजों की इस गंभीर समस्या पर न तो प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही स्वास्थ्य महकमे के आला अधिकारी।
मरीजों के समक्ष यह आ रही परेशानियां
जिला अस्पताल में संचालित आईसीटी (इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर) केंद्र में पदस्थ काउंसर के मुताबिक जांच में पॉजिटिव पाए मरीज का एआरटी सेंटर में पंजीयन होना बेहद जरूरी है। क्योंकि इसके बाद ही उसकी दवा चालू हो पाती हैं। वहीं इससे पहले मरीज की सीडी-4 जांच की जाती है, जो बेहद आवश्यक है।
क्योंकि इसकी रिपोर्ट के आधार पर ही निर्धारित होता है कि मरीज को कौनसी दवा और कितनी मात्रा में दी जानी है। चूंकि एआरटी सेंटर गुना में नहीं है। यहां से करीब 100 किमी दूर शिवपुरी में होने की वजह से कई मरीज वहां नहीं जाते हैें तथा कुछ मरीज दवा को बीच में ही छोड़ देते हैं। जो मरीज के लिए सबसे ज्यादा घातक है। क्योंकि फिर बीमारी को कंट्रोल करना लगभग मुमकिन नहीं हो पाता है।
इसलिए जरूरी है एआरटी सेंटर
गुना व अशोकनगर जिले के एड्स मरीजों को 100 किमी से अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है। गुना जिला अस्पताल में एआरटी सेंटर खुलने से जिले के मरीजों को तो फायदा होगा ही, साथ ही पड़ौसी जिला अशोकनगर के मरीजों के लिए भी सुविधा होगी।
क्योंकि अभी उन्हें शिवपुरी एआरटी सेंटर की दूरी 150 किमी तक पड़ रही है। यही कारण है कि जब मरीज शिवपुरी जाता है तो उसे कई बार डॉक्टर नहीं मिल पाते तो कभी जांच नहीं हो पाती हैं। अधिकांश मरीज लंबी दूरी के फेर में एआरटी सेंटर ही नहीं पहुंचते तो कुछ दवा को बीच में ही छोड़ देते हैं।
गुना में एआरटी सेंटर जरूरी
एचआईव्ही एड्स पॉजिटिव मरीजों के बेहद जांच सीडी-4 तथा नियमित उपचार के लिए एआरटी सेंटर को होना बेहद जरूरी है, जो अभी गुना में नहीं है। इसलिए सभी मरीजों को शिवपुरी भेजना पड़ता है। दूरी अधिक होने की वजह से कई मरीज दवा बीच मेें ही छोड़ देते हैं। जो उसके स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
नीरज वैध, काउंसलर आईसीटी केंद्र गुना
क्या होता है एआरटी सेंटर में
शिवपुरी एआरटी सेंटर के डॉ आशीष व्यास के मुताबिक एआरटी सेंटर में दो डॉक्टर, नर्स, काउंसलर, फार्मासिस्ट व पैरामेडिकल स्टाफ होता है। यहां एचआईवी संक्रमित मरीजों का पंजीयन किया जाता है। इसके बाद एक कार्ड दिया जाता है। बीमारी की गंभीरता के अनुसार उन्हें एक से दो महीने के बीच बुलाया जाता है।
इस दौरान उनकी सभी जरूरी जांचें कराई जाती हैं। प्रतिरोधक क्षमता देखने के लिए सीडी-4 टेस्ट कराया जाता है। मरीजों को सभी दवाएं यहां से मुफ्त दी जाती हैं। इनमें हाई एंटीबायोटिक भी शामिल हैं। एआरटी सेंटर्स से नियमित दवा लेकर व्यक्ति स्वस्थ्य जीवन व्यतीत कर सकता है। जबकि दवा छोडऩे की स्थिति में रोगी बमुश्किल 10 साल ही जीवन जी सकेगा।
धीरे धीरे प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है एचआईव्ही
एचआईव्ही एक ऐसा वायरस है जो कि केवल मानव शरीर में पाया जाता है तथा मनुष्य की प्रतिरोधक क्षमता को धीरे धीरे कम कर देता है या नष्ट कर देता है। एचआईव्ही की आखिरी अवस्था एड्स कहलाती है। जब शरीर रोगों से लडऩे की अपनी ताकत खो बैठता है। इस अवस्था में मनुष्य में एचआईव्ही के साथ साथ एक से अधिक बीमारियों के लक्षण दिखने लगते हैं।
फैक्ट फाइल
1 अप्रैल 2018 से अक्टूबर 2019 तक कुल सामान्य मरीजों ने कराई जांच : 1704
महिलाओं की कुल एएनसी जांच : 3777
एचआईव्ही पॉजिटिव
पुरुष (सामान्य जांच) : 41
महिला (सामान्य जांच) : 13
किशोर (सामान्य जांच) : 01
महिला (एएनसी) : 03
शिवपुरी एआरटी सेंटर में इलाजरत मरीज : 138
मृतक मरीज : 69
Published on:
01 Dec 2019 11:29 am
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