
ग्वालियर. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 7947 हैंडपंपों का पानी शुद्ध करने के लिए भेजा गया सोडियम हाइपोक्लोराइड (chlorine) भी एक्सपायर्ड है। इसका उपयोग भितरवार क्षेत्र के 728 हैंडपंपों में किया जा चुका है। कुछ अन्य जगहों पर भी यह केमिकल डाला गया है। पीएचई के अधिकारी एक्सपायर्ड क्लोरीन की बात से इनकार कर रहे हैं, लेकिन पत्रिका के पास इसके सबूत हैं।
स्टोर से बोतल गायब
पत्रिका के पास क्षेत्र में उपयोग दवा की बोतल है। इसमें पर्ची चिपकाकर सितंबर 2021 की एक्सपायरी दर्शाई गई है। इसे हटाने पर एक्सपायरी डेट नवंबर 2020 सामने आई है। अफसरों से जानकारी मांगी गई तो स्टोर से सारी बोतलें गायब कर दी गईं।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक एक्सपायर्ड क्लोरीन से क्लोरीनेशन किए जाने पर पानी का मैल कट जाएगा और पानी साफ दिखेगा पानी पीने योग्य नहीं माना जांएगा। वही इससे शरीर की आंतरिक प्रणाली पर विपरीत असर पड़ने की आशंका, घाव, त्वचा और आंखों पर इसका सीधा असर हो संकता है।
इंदौर की फर्म से सप्लाई
सूत्र बताते हैं कि पीएचई के ऑर्डर दिए जाने के बाद इंदौर की फर्म ने क्लोरीन की सप्लाई की थी। मैक्स फार्मा नाम की कंपनी से क्लीनवेट की करीब 1 लाख 50 हजार बोतल की सप्लाई आई थी। इस मामले में कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह का कहना है कि एक्सपायर्ड क्लोरीन करा उपयोग किए जाने की जानकारी अभी नहीं है। यदि इसमें एक्सपायर्ड क्लोरीन का उपयोग हुआ है तो जांच कराकर कार्रवाई करेंगे।
पीएचई के कार्यपालन यंत्री संजीव गुप्ता ने बताया कि हमारे पास पुराना स्टॉक नहीं है। 15 हजार लीटर सोडियम हाइपोक्लोराइड मंगाई है। अभी ग्वालियर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र भितरवार के 728 हैंडपंपों में 100 एमएल प्रति हैंडपंप के मान से क्लोरीनेशन किया गया है। एक्सपायर्ड दवा का इस्तेमाल नहीं किया है। अगले 15 दिन बाद फिर क्लोरीनेशन होगा।
Published on:
11 Aug 2021 11:24 am
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