
जिन पर शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी, उनके कार्यालय ही स्वच्छ नहीं
श्योपुर। शहर में स्वच्छता सर्वेक्षण-2023-24 के लिए तैयारी हो री है। जबकि जिन अधिकारियों पर शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी है, उनके कार्यालयों में गंदे प्रसाधन कक्ष पूरी तैयारी में हो रही लापरवाही को आइना दिखा रहे हैं। आमजन के सामान्य कामकाज का ठिकाने नगर पालिका की मुख्य सीढिय़ां चढऩे के बाद अध्यक्ष और सीएमओ के चैंबर के सामने हॉल साफ-सफाई दिखती है, जबकि पीछे की ओर कर्मचारियों की कक्षों और बाहर की दीवारें के कौने गुटखा की पीक से रंगी दिखती हैं। कलेक्ट्रेट में अपर कलेक्टर की ओर का प्रसाधन कक्ष बदहाल है। इसमें प्रवेश करते ही समझ आता है कि स्वच्छता से दूर-दूर तक नाता नहीं है। शौचालय बेहद गंदे हैं, यूरिनल से पाइप गायब हैं और गंदगी इतनी है कि उपयोग करने की अपेक्षा लोग दूसरी जगह जाना पसंद करते हैं।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण में श्योपुर को 41 वीं रैंक मिली थी। अब इस वर्ष सर्वेक्षण में और बेहतर रंैंक के लिए इंदौर की कंपनी को प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी दी है। इस कंपनी ने अभी तक अपना काम शुरू नहीं किया है। दो बार नगर पालिका ने कार्यक्रम किए हैं। इन कार्यक्रमों में स्वच्छता सर्वेक्षण की सीख दी गई लेकिन पालन कराने पर अभी तक ध्यान नहीं दिया गया। सर्वेक्षण की जागरूकता के लिए हुए कार्यक्रमों में नगर पालिका ने ऐसे लोगों को मंच दिया जिनका सर्वेक्षण को लेकर समझ न्यूनतम है।
खुले में शौच पर नहीं रोक
नगर पालिका की सीमांत बस्तियों में अधिकतर लोग अमराल, कदवाल और सीप नदी को ही शौचालय बनाए हुए हैं। खुले में शौच और हर तरफ फैले कचरे को साफ करने के लिए नगर पालिका हर वर्ष लाखों रुपए खर्च कर रही है। करीब 350 स्वच्छताकर्मियोंं को बेहतर सफाई के लिए पे्ररित करने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
वर्सन
-स्वच्छत सर्वेक्षण-2023-24 के लिए जागरूकता कार्यक्रम शुरू कर दिए गए हैं। नगर पालिका कार्यालय में वैसे तो सफाई रहती है, लेकिन फिर भी अगर कहीं गंदगी दिखती है तो उसे भी साफ कराया जाएगा।
रेणु सुजीत गर्ग, अध्यक्ष-नगर पालिका
-कलेक्ट्रेट में एक ओर का प्रसाधन कक्ष तो बेहतर है, दूसरी ओर के प्रसाधन कक्षों को साफ कराया जाएगा।
शिवम वर्मा, कलेक्टर
Published on:
26 Mar 2023 11:31 pm

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