
सोना-चांदी खरीदने से पहले जरूर पढ़ लें यह खबर,कहीं आप तो नहीं हो रहे ठगी के शिकार
ग्वालियर। सोना-चांदी खरीदने में जल्दबाजी दिखाना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। सोना-चांदी खरीदने से पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि वह असली है या नकली। आज के समय में हर किसी को इस बात का डर रहता है कि कहीं उसके साथ धोखा तो नहीं हो रहा है,लेकिन ज्वेलरी पर हॉलमार्क की मुहर के बाद उसकी विश्वसनीयता बढ़ जाती है। अगर आप सोना खरीदने जा रहे हैं तो इन बातों का ध्यान रखना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। क्योकि आजकल ग्वालियर शहर में कईं ऐसी शिकायते मिल रहीं हैं जिसमें लोग कह रहे है कि उन्हें असली के नाम पर नकली सोना दे दिया है।
आपको बता दें कि प्रदेश भर में जहां 80 से अधिक हॉलमार्क सेंटर काम कर रहे हैं वहीं ग्वालियर संभाग में इनकी संख्या सिर्फ एक ही है। इतना ही नहीं ग्वालियर संभाग के सराफा कारोबारियों की संख्या करीब 2 हजार से अधिक है। अगर आप सोने-चांदी के सिक्के या गहने खरीदने की सोच रहे हैं तो सबसे पहले अपने शहर में सोने का भाव पता करें।
हर शहर में सोने के दाम अलग-अलग हो सकते हैं। दरअसल, स्थानीय ज्वेलर्स एसोसिएशन विदेशी बाजार में भाव के हिसाब से सोने के भाव तय करती हैं। उदाहरण के तौर पर अगर आप ग्वालियर में गहने खरीद रहे हैं तो ग्वालियर सरऱ्ाफा एसोसिएशन के तरफ से जारी सोने का भाव पता कर लें। इसके अलावा कम से कम दो ज्वेलर्स से सोने का भाव जरूर पता कर लें।
20 कैरेट को मान्यता मिले
अभी सरकार की ओर से सोने और चांदी के गहनों की हॉल मार्किंग में 14 कैरेट (58 फीसदी), 18 कैरेट (75 फीसदी) और 22 कैरेट (91.6 फीसदी) को मान्यता है। कारोबारी चाहते हैं कि 20 कैरेट (83.30 फीसदी) को भी मान्यता दी जानी चाहिए। शहर में हॉल मार्किंग सेंटर पर एक बार जांच कराने के 200 रुपए तक वसूले जा रहे हैं वहीं दूसरी जगहों पर ये जांच 10 से 12 रुपए में हो जाती है।
"प्रदेश भर में करीब 80 हॉलमार्किंग सेंटर काम कर रहे हैं। इनके सेंटर बढाए जाना जरूरी है क्योंकि आने वाले समय में सरकार सभी को लाइसेंस लेना अनिवार्य करने वाली है। ग्वालियर संभाग में अभी केवल दो ही सेंटर हैं। हॉलमार्किंग कराने से विश्वसनीयता बढ़ती है।"
हुकुमचंद सोनी, अध्यक्ष, मप्र सराफा ऐसोसिएशन
ऐसे पहचानें असली हॉलमार्क
हॉल मार्किंग में किसी उत्पाद को तय मापदंडों पर प्रमाणित किया जाता है। भारत में बीआईएस वह संस्था है, जो ग्राहकों को उपलब्ध कराए जा रहे गुणवत्ता स्तर की जांच करती है। यदि सोना-चांदी हॉलमार्क है तो इसका मतलब है कि उसकी शुद्धता प्रमाणित है। लेकिन कई ज्वैलर्स बिना जांच प्रकिया पूरी किए ही हॉलमार्क लगा रहे हैं।
ऐसे में यह देखना जरूरी है कि हॉलमार्क ओरिजनल है या नहीं। असली हॉलमार्क पर भारतीय मानक ब्यूरो का तिकोना निशान होता है। उस पर हॉलमार्किंग सेंटर के लोगो के साथ सोने की शुद्धता भी लिखी होती है। उसी में ज्वैलरी निर्माण का वर्ष और उत्पादक का लोगो भी होता है।
Published on:
19 Sept 2018 08:10 am
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