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MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मोटर दुर्घटना मामले में फर्जी लाइसेंस के लिए ड्राइवर जिम्मेदार नहीं

Motor Accident Case: मोटर दुर्घटना मामलों में जिम्मेदारी तय करने को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा और चौंकाने वाला फैसला दिया है। फर्जी लाइसेंस, बीमा शर्तें और वाहन मालिक की भूमिका पर अदालत की सख्त टिप्पणी ने बीमा कंपनियों की नींद उड़ा दी है।
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ग्वालियर

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Akash Dewani

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Updated: 13 Jan 2026, 1:30 AM IST

gwalior high court motor accident case fake driving licence insurance company to pay compensation mp news

gwalior high court verdict on motor accident case (Patrika.com)

MP News: एमपी हाईकोर्ट (MP High Court) ग्वालियर की एकल पीठ ने मोटर दुर्घटना दावा से जुड़े एक महत्त्वपूर्ण मामले में वाहन मालिक को दायित्व से मुक्त करते हुए बीमा कंपनी को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। मामला 2009 के दो आपस में जुड़े अपील प्रकरणों कमल किशोर बघेल बनाम उदय सिंह व अन्य व पंकज शर्मा बनाम कमल किशोर व अन्य से संबंधित था, जिनमें 20 अप्रैल 2009 के एमएसीटी (मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ग्वालियर) के निर्णय को चुनौती दी गई थी। अदालत के समक्ष तथ्य आए कि 8-9 अगस्त 2004 की रात एक डंपर के पलटने से कमल किशोर बघेल घायल हुए थे। अधिकरण ने उन्हें 4.90 लाख का मुआवज़ा दिया था।

घायल ने मुआवजा बढ़ाने की मांग की, जबकि वाहन मालिक पंकज शर्मा ने यह कहते हुए अपील की कि चालक के ड्राइविंग लाइसेंस को फर्जी (fake driving licence) मानकर उन पर जो जिम्मेदारी डाली है, वह गलत है और बीमा कंपनी को भुगतान करना चाहिए। कोर्ट ने रिकॉर्ड और साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए पाया कि वाहन मालिक ने चालक को नियुक्त करते समय उसका लाइसेंस देखा था, जो आरटीओ, ग्वालियर से कई बार नवीनीकृत भी हुआ था।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का दिया हवाला

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदि मालिक ने लाइसेंस देखकर और चालक की क्षमता से संतुष्ट होकर उसे नियुक्त किया है, तो उससे लाइसेंस की वास्तविकता की आरटीओ से अलग से जांच की अपेक्षा नहीं की जा सकती, यह सिद्ध न हो कि मालिक को लाइसेंस के फर्जी होने की जानकारी थी या उसने जानबूझकर शर्तों का उल्लंघन किया, तब तक बीमा कंपनी (insurance company) अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।

मुआवजा राशि बढ़ाने की अपील खारिज

हाईकोर्ट ने वाहन मालिक की अपील स्वीकार करते हुए उन्हें दायित्व से मुक्त कर दिया और बीमा कंपनी को मुआवजा भुगतान के लिए उत्तरदायी ठहराया। घायल की मुआवजा बढ़ाने की अपील खारिज कर दी. यह कहते हुए कि अधिकरण द्वारा तय राशि उचित और न्यायसंगत है। आदेश के अनुसार, बीमा कंपनी अब दावेदार को मुआवजा अदा करेगी, जबकि वाहन मालिक पर कोई वित्तीय दायित्व नहीं रहेगा। (MP News)