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बड़ी खबर : मध्यप्रदेश में मिला करोड़ों टन सोने का भंडार,जल्द शुरू होगी खुदाई!

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा कराई गई ड्रिलिंग में जो सेम्पल मिले उसमें इस बात की पुष्टि भी हो रही है

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Survey Report of Geological of India

Survey Report of Geological of India

ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर चंबल संभाव में वैसे तो प्रकृति ने यहां अपना खूब खजाना लुटाया है। लेकिन बेशकीमती धातुओं का भी इसे तोहफा दिया है। चंबल संभाग के श्योपुर के बड़ौदा क्षेत्र में हाईड्रो कार्बन (पेट्रोल तेल और मीथेन गैस) के प्रमाण मिले हैं। यहां जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा कराई गई ड्रिलिंग में जो सेम्पल मिले उसमें इस बात की पुष्टि भी हो रही है। ये सेम्पल अब नागपुर स्थित सेंट्रल इंडिया के मुख्यालय भेजे जाएंगे। बताया गया है कि कुछ वर्ष पूर्व भी यहां सोने की खदान सहित अन्य हाईड्रो कार्बन मिलने की चर्चा भी हुई थी। जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग उसे देखने पहुंचे थे, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया था।

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मप्र के 27 जिलों में हाईड्रो कार्बन होने की संभावनाएं लगातार सामने आ रहीं थी। जिस पर मप्र ने इसकी तलाश के प्रयास भी शुरू किए। राज्य के बाद इसमें केंद्र सरकार ने भी दिलचस्पी ली और आइल एण्डनैचुरल गैस कार्पोरेशन लिमिटेड को इसके लिए अनुमति प्रदान की। केन्द्र और राज्य शासन की दिलचस्पी के बाद कंपनी ने मप्र में इस कार्य को करने के लिए अल्फा जीईओ इण्डिया लिमिटेड हैदराबाद को जिम्मा सौंप दिया था। जिसके द्वारा अभी से श्योपुर के बड़ौदा क्षेत्र में कार्य भी शुरू कर दिया है।

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कंपनी के द्वारा शॉटगन से 30 मीटर गहरे गड्ढे करके इसकी तलाश की जा रही है। साथ ही इन गड्ढों को भी मशीन से डाटा कलेक्ट करने के बाद बंद किया जा रहा है। यहां पर कार्य कर रहे तकनीकी दल के सदस्यों ने बताया कि एक लाइन विशेष में हाइड्रो कार्बन की खोज की जा रही है। श्योपुर में यह कार्य करीब दो दिन और चला जहां क्षेत्र में हाईड्रो कार्बन मिलने के संकेत मिले हैं। इतना हीं नहीं मध्यप्रदेश के भिण्ड,मुरैना और श्योपुर में करोड़ों टन सोने के भंडार होने की जानकारी पता चली है। जिस पर जल्द ही खुदाई का कार्य शुरू किया जाएगा।

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12 साल बाद एक बार फिर सिद्ध हो रही है।
जिले के बड़ौदा क्षेत्र में हाईड्रो कार्बन (पेट्रोल तेल और मीथेन गैस) मौजूद हैं। यह बात केन्द्र और राज्य शासन के आदेश से अल्फा जीईओ कंपनी द्वारा क्षेत्र में इसकी तलाश किए जाने से १२ साल बाद एक बार फिर सिद्ध हो रही है। ऐसा इसलिए कि वर्ष २००६ में बड़ौदा के ऊंडाखाड के पुल के नजदीक एक खेत के बोर से अचानक ५० फीट ऊंची पानी की धार, गैस के साथ निकलना शुरू हो गई थी। जिसको एक माह बाद जिला प्रशासन के बुलावे पर ओएनजीसी की टीम ने आकर बंद किया और तब टीम ने गैस का परीक्षण करके बताया कि गैस मीथेन है।

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हालांकि तब भी यहां पर गैस का भंडार होने और उसकी तलाश किए जाने की मांग क्षेत्र के लोगों के द्वारा उठाई गई। जिससे जिले में रिफाइनरी शुरू हो सके। लेकिन बताया जाता है कि तत्समय जांच को आए एक्सपर्टस ने बोर के अंदर से निकल रही गैस को बंद करने से पूर्व उसका परीक्षण भी किया और यह पाया था कि गैस तो है। पर उतनी मात्रा में उपलब्ध नहीं है, जिससे रिफाइनरी लगाकर उसका दोहन किया जा सके और मामला शने-शने कर ठंडा पड़ गया।

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इसके साथ बड़ौदा सहित जिलेवासियों की तैल और गैस होने की संभावनाओं को लेकर परवान चढ़ी उम्मीद भी काफूर हो गई। अब एक बार फिर इसकी तलाश यहां पर सरकार द्वारा कराए जाने की जानकारी से लोगों के चेहरे खिल गए हैं। कारण साफ है कि जिलेवासियों को यह भलीभांति मालूम है कि बड़ौदा क्षेत्र में गैस और तैल का भण्डार मौजूद है।

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यही वजह है कि १२ साल पूर्व बोर से जहां तेजी के साथ पानी निकला था। वहीं अभी कुछ माह पूर्व भी इसीतरह एक बोर से ३० फीट ऊंची पानी की धार निकलना शुरू हो गई और उसमें भी गैस होने की बात लोगों के द्वारा कही गई। हालांकि उसे भी खेत मालिक द्वारा बंद कर दिया गया।क्षेत्र में जांच कर रही कंपनी को बड़ौदा क्षेत्र के लोगों ने इस बात से अवगत कराया है और उनसे ऊंडाखाड क्षेत्र में भी जांच की मांग रखी है। जिसपर कंपनी के तकनीकी स्टाफ द्वारा उस क्षेत्रमें भी गैस का परीक्षण कराए जाने का भरोसा उन्हें दिलाया गया है।

कंपनी को मिले गैस होने के संकेत
अल्फा जीईओ कंपनी के द्वारा की जा रही हाईड्रो कार्बन गैस की तलाश बुखारी से शुरू हुई। जो रतोधन से मूंडला की ओर पहुंच बढ़ रही है। इस दौरान कंपनी द्वारा शॉटगन से गहरे गड्ढे करके परीक्षण किया जा रहा है। बता रहे हैं कि कंपनी को कई जगह गैस होने के संकेत भी मिले हैं। हालांकि कंपनी ऐसा कुछ बता नहीं रही है, मगर बताया जा रहा है कि ऐसा पाया गया है। लेकिन जो गैस और तेल होने के संकेत मिले हैं, वह कितनी मात्रा में है।

इन जिलों में होगी गैस तेल की तलाश
कंपनी के द्वारा हाइड्रो कार्बन की तलाश जिन जिलों में करने की स्वीकृति दी गई है। उनमें ओवेदुल्लागंज, रायसेन, सीहोर, विदिशा, भोपाल, देवास, अशोकनगर, धार, गुना, रामगढ, शिवपुरी, उज्जैन, अली राजपुर, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर, नीमच और श्योपुर शामिल है।श्योपुर के साथ ही बडवार, इंदौर, शाजापुर, होशंगाबाद, नरसिंहपुर, पश्चिम छिंदबाड़ा, पूर्व छिंदवाडा, दक्षिण सागर, उत्तर सागर, दमोह और उत्तर बैतूल शामिल हैं।

तराशने में नहीं होता वेस्ट
पन्ना में हीरे की खदान नीलाम करने की योजना तैयार कर ली है। अब मप्र का पन्ना ही एक मात्र ऐसी जगह है, जहां की खदानों से हीरे निकाले जा रहे हैं। बाकी सभी खदानों को बंद कर दिया गया है। 5 साल पहले यहां की खदान से 37.68 का बड़ा हीरा निकलने का दावा किया गया था। मध्यप्रदेश की विध्या रेंज में लगभग 240 किलोमीटर के अंदर हीरे की खदाने हैं। 6 हजार साल पहले यहां कच्चे हीरे मिले थे।

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इन्हें पन्ना की खदानों के नाम से भी जाना जाता है। यहां हीरे की खुदाई के लिए 1968 में नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन(एनएमडीसी) की स्थापना की गई थी। एनएमडीसी पन्ना जिले के मझगांव में हीरे की खदान का संचालन करती है, जो अब तक कई नायाब हीरे दे चुकी है। कहा जाता है कि यहां से निकला हीरा साउध अफ्रीका की खदानों से भी अच्छा होता है। ये चमकदार होता है और काटने में कम वेस्ट होता है। एनएमडीसी की मानें तो ये खदान साल भर में करीब 80 हजार कैरेट हीरा उत्पादन कर सकती है।

308 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है एमपी
खनिज संसाधनों के क्षेत्र में देश के आठ खनिज संपन्न राज्यों में से एक है। प्रदेश में देश का सबसे अच्छी गुणवत्ता का कोयला तो प्राप्त होता ही है, इसके साथ ही हीरा उत्पादन में देश में इसका एकाधिकार है। प्रदेश सरकार द्वारा खनिजों की खोज के कार्य में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिये निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके अच्छे परिणाम मिले हैं और प्रदेश की राजस्व आय पिछले तीन वर्षों में 35 प्रतिशत तक बढ़ी है।

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देश के ह्रदय स्थल में स्थित 308 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में मध्यप्रदेश फैला हुआ है। विविध खनिज भण्डारों से परिपूर्ण है। विभिन्न खनिज भण्डारों के दोहन से प्राप्त होने वाली खनिज राजस्व आय का प्रदेश की राजकोषीय आय में पांचवा महत्वपूर्ण स्थान है। प्रदेश को खनिजों से राजस्व प्राप्ति में देश में तीसरा स्थान (तेल एवं प्राकृतिक गैस को छोड़कर) प्राप्त है।

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मध्यप्रदेश का दूसरा स्थान
प्रदेश में मुख्य रूप से 21 खनिजों का उत्पादन वर्तमान में किया जा रहा है। हीरा उत्पादन में प्रदेश को राष्ट्र में एकाधिकार प्राप्त है। वित्तीय वर्ष 2006-07 में स्लेट, डायस्पोर, पायरोफिलाइट, कॉपर के उत्पादन में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय परिदृश्य में प्रथम स्थान पर रहा है। इसी प्रकार राक फास्फेट, कैल्साइट के उत्पादन में द्वितीय स्थान तथा चूना पत्थर, ऑकर, मैंगनीज तथा फायर क्ले के उत्पादन में तृतीय स्थान प्राप्त है।

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कोयला उत्पादन में प्रदेश का स्थान राष्ट्रीय परिदृश्य में चौथा है। प्रदेश में अच्छी गुणवत्ता का कोयला प्राप्त होता है। देश में कोयले से प्राप्त होने वाली रायल्टी में झारखण्ड के बाद मध्यप्रदेश का दूसरा स्थान है। चूना पत्थर आधारित सीमेंट उत्पादन में मध्यप्रदेश का देश में दूसरा स्थान है।

50 करोड़ का हीरा गायब!
पिछले साल पन्ना से विधायक कुसुम मेहदले ने मुख्यमंत्री को शिकायत की थी कि जून 2015 में खदान से 80 कैरेट का हीरा निकला था, जिसकी कीमत 50 करोड़ रुपए थी। वह हीरा खदान संचालकों और पुलिस अफसरों ने मिलीभगत कर बेच दिया है। इसके पहले एनएमडीसी ने 2010 में दावा किया था कि खदान से 37.68 कैरेट का हीरा निकला था, जिसकी कीमत करीब 1 करोड़ रुपए थी। एनएमडीसी का यह भी दावा था कि वह खदान से निकला अब तक का सबसे बड़ा हीरा था।

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"बड़ौदा क्षेत्र में पेट्रोल, तेल और गैस मौजूद है। यहां पर १२ साल पहले जब ऊंडाखाड के पास बोर से गैस निकलना शुरू हुई तब उसकी जांच कराई गई। जिसमें उसके मीथेन होने की पुष्टि हुई। हमने इस बात से अभी यहां पर सरकार की ओर से जांच कर रही कंपनी को अवगत कराकर उस तरफ भी जांच का आग्रह किया है, जिसे कंपनी द्वारा स्वीकार करते हुए उस क्षेत्र में भी परीक्षण कराए जाने की बात बताई गई है।"
भारती रीतेश तोमर,अध्यक्ष, नगर पंचायत बड़ौदा

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"इतना ही नहीं मध्यप्रदेश के पन्ना मेंज्यादातर हीरे ऐसी खदानों से निकले हैं जो ज्यादा गहरी नहीं है। जमीन से दो से तीन फीट नीचे ही काफी बड़े हीरे निकले हैं। 1961 में 44.55 कैरेट का हीरा महुआ टोला की खदान से निकला था। इसके बाद 2015 में 80 कैरेट का हीरा निकला, जिसे लेकर खदान संचालक भाग गया।"
सीएस निनामा,डीएफओ सामान्य वनमण्डल

"श्योपुर यह सच है कि हमारी कंपनी के द्वारा तेल गैस की तलाश का कार्य किया जा रहा है। श्योपुर में भी कार्य शुरू किया गया है। इसके बाद सागर क्षेत्रमें होगा। अभी एक दफा और फिर सभी जिलों में सर्वे कार्य किया जाएगा।"
ललित महादेव, एरिया मैनेजर, अल्फा जीईओ कंपनी