
guru nanak jayanti
ग्वालियर। शहर में गुरुनानक के ५४९वें प्रकाशोत्सव का आगाज हो चुका है। चार दिवसीय इस कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुवार सुबह प्रभात फेरी से किया गया। इस दौरान धूमधाम के साथ नगर कीर्तन भी निकाला गया। चार दिवसीय महोत्सव में सुबह प्रभात फेरी निकाली गई,जो हजीरा,गुरुद्वारा फलका बाजार व गुरुद्वारा नूरगंज से प्राभात फेरी सुबह ५:३० बजे गुरुद्वारा फूलबाग पहुंची। इसके बाद दोपहर २ बजे से हजीरा स्थित गुरुद्वारे से विशाल नगर कीर्तन का शुभारंभ किया गया, जो हजीरा से किलागेट,सेवानगर, खेड़ापति मार्ग से होते हुए फूलबाग चौराहा से होकर देर शाम गुरुद्वारा पर पहुंची।
जहां कमेटी द्वारा कीर्तन का जोरदार स्वागत किया गया। कीर्तन के दौरान सबसे आगे महिला-पुरुष मार्ग को स्वच्छ करते हुए चले, जिनके बाद पंच प्यारे हाथों में तलवार लेकर चल रहे थे। इसके बाद महाराज की सुदंर व आकर्षक ढंग से सजाई गयी पालकी चल रही थी। कीर्तन यात्रा के अगले क्रम में भक्तों के जत्थे कीर्तन करते हुए चल रहे थे। कीर्तन यात्रा का विभिन्न स्थानों पर स्वागत किया गया। यात्रा में विभिन्न प्रकार के बैंडो ने भी अपना प्रदर्शन किया।
गुरु नानक शुरू से ही थे प्रतिभाशाली
गुरु नानक बचपन से ही प्रतिभाशाली और चमत्कारी थे। उनके चमत्कारों से जुड़ी हुई घटनाएं इतिहास में आज भी दर्ज है। वह जीवन भर समाज सेवा से जुड़े रहे और अपने उपदेशों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयत्न करते रहे। उनका केवल एक ही उद्धेश्य था समाज में रहकर अच्छे कार्य करो।
गुरुनानक के यह थे,सिद्धांत आज भी है प्रासंगिक
1. ईश्वर एक है। 2.सदैव एक ही ईश्वर की उपासना करो। 3. जगत का कर्ता सब जगह और सब प्राणी मात्र में मौजूद है। 4. सर्वशक्तिमान ईश्वर की भक्ति करने वालों को किसी का भय नहीं रहता। 5. ईमानदारी से मेहनत करके उदरपूर्ति करना चाहिए। 6. बुरा कार्य करने के बारे में न सोचें और न किसी को सताएँ।
7. सदा प्रसन्न रहना चाहिए। ईश्वर से सदा अपने को क्षमाशीलता माँगना चाहिए। 8. मेहनत और ईमानदारी से कमाई करके उसमें से जरूरतमंद को भी कुछ देना चाहिए। 9. सभी स्त्री और पुरुष बराबर हैं। 10. भोजन शरीर को जिंदा रखने के लिए जरूरी है पर लोभ-लालच व संग्रहवृत्ति बुरी है।
Published on:
03 Nov 2017 02:48 pm

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