
ग्वालियर। देश भर में हनुमान जंयती का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार ३१ मार्च को हनुमान जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई जाएगी। हनुमान जंयती का हिदुओं के मुख्य पर्वों में विशेष महत्व रखता है। जयंती को लेकर ग्वालियर के मंदिरों में भी तैयारियां शुरू कर दी है। पडि़त जयनारायण शर्मा ने बताया कि हनुमानजी भगवान शिव के अवतार हैं और हनुमानजी एक ऐसे देवता हैं जो थोड़ी सी प्रार्थना और पूजा से ही शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं।
वो अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता हैं। अर्थात हनुमानजी को प्रसन्न कर आप धन, संपत्ति, विद्या, स्वास्थ्य, वैभव, संतान सभी कुछ प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने हनुमानजी को प्रसन्न करने के उपाय भी बताए जिससे आप हनुमान जी को जल्द से जल्द प्रसन्न कर सकते हैं तो आइए जानते है हनुमानजी को प्रसन्न करने के ये उपाय।
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हनुमान जयंती के दिन हनुमानजी की पूजा विधि विधान से करनी चाहिए। इसके लिए पूजा के स्थान पर उनकी मूर्ति स्थापित करें और विधि विधान से उनकी पूजा करें। श्रीराम भक्त हनुमान संकटमोचक के रूप में जाने जाते हैं। यह ऐसे देव के रूप में भी प्रसिद्ध हैं जिन्हें सबसे आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है। हनुमानजी में किसी भी संकट को हर लेने की क्षमता है और अपने भक्तों की यह सदैव रक्षा करते हैं। हनुमान रक्षा स्त्रोत का पाठ यदि नियमित रूप से किया जाए तो कोई बाधा आपके जीवन में नहीं आ सकती। हनुमान जी परभक्ति, भक्ति और सरलता के प्रतीक भी माने जाते हैं। हनुमान चालीसा का पाठ करने से बड़े से बड़ा भय दूर हो जाता है।
इस दिन हनुमानजी की मूर्ति स्थापित करके शुद्ध जल, दूध, दही, घी, मधु और चीनी का पंचामृत, तिल के तेल में मिला सिंदूर, लाल पुष्प, जनेऊ, सुपारी, नैवेद्य, नारियल का गोला चढ़ाएं और तिल के तेल का दीपक जलाकर उनकी पूजा करें। इससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के सारे कष्ट हर लेते हैं। आज के दिन वीरता अथवा शौर्य का प्रदर्शन करने वाले खेलों का आयोजन भी किया जाना चाहिए। आज के दिन ही हनुमानजी का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन का हनुमान पूजा में खास महत्व है। वैसे जिस दिन हनुमानजी का जन्म हुआ था उस दिन मंगलवार था।
शहर के ये है हनुमान मंदिर
1. संकट मोचन महाराज का मंदिर
संकट मोचन महाराज का मंदिर रेलवे लाइन के ठीक पास है और उसके उपर से ब्रिज बना हुआ है। मंदिर से जुड़े लोग बताते हैं कि करीब 60 के दशक में जब यह पुल बन रहा था तो उस वक्त इंजीनियरों ने हनुमान जी को रास्ता नहीं दिया और पुल का निर्माण कर डाला। पुल निमार्ण के कुछ दिनों बाद ही पुल के बीच में दरार आ गई। पुल की दरार को एक बार फिर से दुरुस्त किया गया, लेकिन कुछ दिनों पर वहीं पर फिर से दरार आ गई। यह सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा। पुल की दरार से परेशान अधिकारी मंदिर के महंत के पास पहुंचे और व्यथा सुनाई। लोग बताते हैं कि उस वक्त मंदिर के प्रमुख महंत ने अधिकारियों को यही बताया कि आपने हनुमान जी को रास्ता नहीं दिया और पुल बना दिया। इसलिए ये परेशानी आ रही है। इसके बाद हनुमान जी को वहां से रास्ता दिया और उसके बाद आजतक पुल में कभी दरार नहीं आई।
2. गरगज हनुमान जी के नाम से जानते है भक्त
बहोड़ापुर स्थित गरगज के हनुमान मंदिर का निर्माण दो सौ साल पहले महाराजा जनकोजी राव सिंधिया के शासन काल में कराया गया था। यहां पं.पूर्णानंद शर्मा की पीढ़ी पूजा पाठ कर रही है। पहले जिस पहाड़ पर मंदिर बना है वहां से गडगड़़ की आवाज आती थी, इस कारण इनका नाम गडगड़़ के हनुमान हो गया,जो बाद में गरगज के हनुमान के नाम से जाना जाने लगा। यहां पहले सुबह जन्म की आरती की गई और रुद्राभिषेक किया गया।
3. खेड़ापति हनुमान मंदिर- गांधी नगर में स्थित ख़ेडापति मंदिर में दूर-दराज से लोग अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं।
4. जौरासी हनुमान मंदिर- शहर से 20 किलोमीटर दूर जंगल में बने जौरासी हनुमान मंदिर के सामने से गुजरने वाली हर एक गाड़ी वाले प्रसाद जरूर लगाते हैं। इस मंदिर में आने वाले ३ साल के प्रसाद लगाने के लिए तारिख बुक हो चुकी हैं।
Published on:
27 Mar 2018 04:01 pm
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