13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बड़ी खबर : यहां रथ पर सवार होकर आते हैं भगवान श्रीकृष्ण फिर करते है कंस का दहन,जानें क्या है इसका रहस्य

दशहरा पर रावण का पुतला दहन देशभर में किया जाता है,जहां भगवान राम रावण के पुलते पर अग्निबाण चलाकर उसका दहन करते हैं,

2 min read
Google source verification
indian festival

ग्वालियर/मुरैना। दशहरा पर रावण का पुतला दहन देशभर में किया जाता है,जहां भगवान राम रावण के पुलते पर अग्निबाण चलाकर उसका दहन करते हैं, लेकिन सबलगढ़ में रावण नहीं अपितु कंस का पुतला दहन किया जाता है। सैकड़ों वर्षों से होजी की तीज तिथि को कंस वध के मेल का आयोजन किया जाता है। जहां भगवान श्रीकृष्ण बलदाऊ रथ पर सवार होकर आते हैं और अग्निबाण छोड़कर कंस का पुलता दहन करते हैं। नगर की देवी संकीर्तन मंडल द्वारा यहां पिछले साठ वर्ष से कंस वध का मेला आयोजित कराया जा रहा है। मेला तो पिछले सैकड़ों वर्षों से लग रहा है जिसकी समय के बदलते जिम्मेदारियां बदली है, लेकिन पिछले साठ वर्ष स देवी संकीर्तन मंडल द्वारा ही आयोजित किया जाता है।

यह भी पढ़ें: Holi 2018: इस वर्ष होलिका दहन पर भद्रा का साया, कम बन रहे शुभ मुहूर्त , जानिए क्या है सही मुहूर्त

पूर्व में मेला खार मैदान पर आयोजित किया जाता था, लेकिन इस मैदान पर स्कूल व अन्य भवन बनने के बाद अब मेले का आयोजन बीटीआई प्रांगण में किया जाता है। जहां होली की तीज पर हजारों की संख्या में ग्रामीण मेले का तुत्फ उठाने पहुंचते हैं। हालांकि मेला का आयोजन कब से शुरू किया गया और किसने किया यह किसी को स्पष्ट नहीं है। सैकड़ों वर्ष पुरानी परम्परा को अनवरत रूप से निभाया जा रहा है। मेले में कई तरह की दुकानें भी सजाई जाती हैं जहां बच्चे खिलौने खरीदते हैं।

यह भी पढ़ें: MP के इस शहर में खेली जाती है लट्ठमार होली,पहले गुजराना पड़ता है इस दौर से

कंस के छोटे पुलते भी मेले में आते हैं जिन्हें बच्चे खरीदते हैं। इसके साथ ही मनोरंजन के लिए ग्वालवालों की टीम बनाई जाती है जो लोगों का भजनों व कृष्ण ? लीलाओं से मनोरंजन करती है। इसके बाद शाम को देवी अन्नपूर्णा मंदिर से भगवान श्रीकृष्ण व बलदाऊ की शोभायात्रा रथ पर निकाली जाती है जो बीटीआई परिसर में पहुंचती है जहां अग्निबाण छोड़कर भगवान श्रीकृष्ण कंस के पुतले का बध करते हैं। प्रतिवर्ष ५० फीट तक का कंस का पुलता यहां बनाया जाता है।

यह भी पढ़ें: देश में यहां खेली जाती है अजीब होली,दूर-दूर तक है इसकी प्रसिद्ध,जानें

हजारों ग्रामीण जुटते हैं मेले में
कंस मेले में सबलगढ़ क्षेत्र के हजारों ग्रामीण प्रतिवर्ष जुटते हैं। जैसे ही कंस के पुलते का दहन किया जाता है कि ग्रामीण डण्डों से इस पुतले पर टूट पड़ते हैं। दरअसल पुतले को यह डंडे इसलिए मारे जाते हैं जिससे ग्रामीण पुलते में लगी बांस की लकड़ी ले सकें। इस लकड़ी को लेने के लिए एक तरह से लूट मार सी मच जाती है। ग्रामीणों का मानना है कि पुतले की लकड़ी को अपने खेत में लगाने से फसलें अच्छी होती है और कोई भी प्राकृतिक आपदा नहीं आती है। इसलिए प्रतिवर्ष ही ग्रामीण पुतले से इस बांस की लकड़ी को ले जाते हैं।