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हमारे जिनालय: 200 वर्ष पुराना है सराफा बाजार का श्वेतांबर मंदिर

jain mandir gwalior: दो हजार बैलगाडिय़ों से 550 लोग अपना घर छोडकऱ ग्वालियर आए थे। इस मंदिर में भगवान पाŸवनाथ जो श्याम वर्ण की है इसके साथ रिषभ देव, पारसनाथ, सुपार्शनाथ, भैरोनाथ, पद्मावती, स्वामी भगवान महावीर को मिलाकर कुल 16 प्रतिमाएं स्थापित हैं।

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jain mandir gwalior: shewtambar mandir of sarafa gwalior 200 year old

jain mandir gwalior: shewtambar mandir of sarafa gwalior 200 year old

ग्वालियर. टोपी बाजार के सामने सराफा बाजार में 200 वर्ष पुराना श्वेतांबर जैन मंदिर उपाश्रय भवन का अपना अलग ही इतिहास है। श्वेतांबर मंदिर की स्थापना 1792 में जतनचंद सचेती और मेड़ता राजस्थान के सेठों द्वारा की गई थी। मंदिर में बनी दर्जनों प्राचीन पेंटिंगों पर 4 किलो 500 ग्राम सोने की पोलिश की गई है।

मंदिर के श्रावक जय कुमार कोठारी ने बताया कि 1792 में जब लश्कर बस रहा था, तब स्टेट टाइम के महाराज महादजी राव सिंधिया ने दान में मकान और जमीन दी, जिसमें सराफा बाजार से बारादरी तक की जगह के पट्टे दिए गए थे। इस मंदिर में भगवान पाŸवनाथ की मूर्ति स्थापित है, जो राजस्थान के मेड़ता से लाए थे। दो हजार बैलगाडिय़ों से 550 लोग अपना घर छोडकऱ ग्वालियर आए थे। इस मंदिर में भगवान पाŸवनाथ जो श्याम वर्ण की है इसके साथ रिषभ देव, पारसनाथ, सुपार्शनाथ, भैरोनाथ, पद्मावती, स्वामी भगवान महावीर को मिलाकर कुल 16 प्रतिमाएं स्थापित हैं।

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